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व्यापमं घोटाला: हाई कोर्ट ने टाली सुनवाई, CBI जांच को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट पर नजर

व्यापमं घोटाले की एक आरोपी और एमबीबीएस की छात्रा नम्रता डामोर की तीन साल पहले हुई मौत का रहस्य उसके शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के साथ और गहरा गया है। इसमें मौत का कारण ‘हिंसक रूप से दम घुटना बताया’ गया है जिसे रिपोर्ट में मानव वध के रूप में अंकित किया गया है।
नम्रता डामोर की हुई थी हत्या

व्यापमं घोटाले की एक आरोपी और एमबीबीएस की छात्रा नम्रता डामोर की तीन साल पहले हुई मौत का रहस्य उसके शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के साथ और गहरा गया है। इसमें मौत का कारण ‘हिंसक रूप से दम घुटना बताया’ गया है जिसे रिपोर्ट में मानव वध के रूप में अंकित किया गया है।

वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को व्यापमं घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंपने संबंधी राज्य सरकार के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को इसी मामले पर सुनवाई करेगा। अब व्यापमं घोटाले में सीबीआइ जांच के आदेश को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर रहेगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जिसकी प्रतिलिपि समाचार एजंसी के पास उपलब्ध है, 9 जनवरी 2012 की है। इस पर डॉक्टर बीबी पुरोहित (फॉरेंसिक मेडिसिन), डॉक्टर ओपी गुप्ता (चिकित्सा अधिकारी) और डॉक्टर अनिता जोशी (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के हस्ताक्षर हैं।

रिपोर्ट में मृत्यु से पहले ‘यौन संसर्ग’ की संभावना खारिज करने के लिए ‘हिस्टोपैथालॉजिकल’ परीक्षण की सलाह दी गई थी। यह पोस्टमार्टम उज्जैन जिला अस्पताल में किया गया था और नम्रता का शव पुलिस थाना क्षेत्र में रेल पटरियों के पास पाया गया था।

नम्रता के शव का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों के दल के सदस्य डॉक्टर पुरोहित ने बुधवार को बताया कि संक्षिप्त और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हमने कहीं भी उसके द्वारा आत्महत्या की बात नहीं लिखी थी। जिस समय यह शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था, तब तक उसकी शिनाख्त नहीं हुई थी। शव के चेहरे पर तीन जगह नाखून से चोट के निशान थे।

व्यापम घोटाला, व्यापमं घोटाला, शिवराज सिंह चौहान, नम्रता दामोर, Vyapam, Vyapam Scam, Shivraj Singh Chouhan, Namrata Damor नई दिल्ली में बुधवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिल कर लौटते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

 

इस बीच, उज्जैन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोहर सिंह वर्मा ने बुधवार को बताया, ‘नम्रता डामोर की मौत की फिर से जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। तराना के पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) आरके शर्मा इस मामले की जांच करेंगे’। एसपी ने बताया कि पुलिस ने पहले इस मामले में ‘हत्या’ का मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में इसे ‘दुर्घटना’ करार देकर मामले को बंद कर दिया गया था।

नम्रता इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (एमजीएम) की छात्रा थी। यह संदेह था कि उसने व्यापमं में प्रवेश कराने वाले गिरोह की मदद से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था। यह मामला फिर तब सामने आया जब टीवी पत्रकार अक्षय सिंह हाल ही में नम्रता के झाबुआ जिले के मेधनगर स्थित निवास पर उनके पिता का इंटरव्यू लेने पहुंचे थे, जहां सिंह की रहस्यमय हालात में मौत हो गई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को व्यापमं घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंपने संबंधी राज्य सरकार के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को इसी मामले पर सुनवाई करेगा। हाई कोर्ट ने सुनवाई 20 जुलाई तक टाल दी। कांग्रेस का दावा है कि इस घोटाले में अब तक 49 लोगों की जान जा चुकी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक दिन पहले इस मामले की सीबीआइ जांच की सिफारिश करने का फैसला किए जाने के बाद बुधवार को मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाले खंडपीठ के समक्ष मामला सुनवाई को आया जिन्होंने इस आधार पर सुनवाई 20 जुलाई तक स्थगित कर दी कि सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को इसी तरह की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।

अतिरिक्त महाधिवक्ता पी कौरव ने कहा कि राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस का विशेष कार्य बल (एसटीएफ) प्रभावी तरीके से घोटाले की जांच कर रहा है, लेकिन हाल ही में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से सरकार सीबीआइ जांच चाहती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और तीन विसिलब्लोअर कार्यकर्ताओं-आशीष चतुर्वेदी, आनंद राय और प्रशांत पांडेय की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है जिसमें घोटाले में सीबीआइ जांच की मांग की गई है।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव को घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर हटाने की मांग करते हुए भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं। एसटीएफ ने मामले में यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। लेकिन उन्हें हाई कोर्ट से राहत मिल गई जिसने कहा कि जब तक वे संवैधानिक पद पर हैं, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू नहीं हो सकता।

इस बीच दिल्ली में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट से सीबीआइ जांच का आदेश देने का अनुरोध करेगी, लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे की संभावना को एक तरह से खारिज कर दिया। चौहान ने कहा, ‘हमने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि सीबीआइ को जांच करनी चाहिए। गुरुवार को मामला सुप्रीम कोर्ट में आ सकता है। हम वहां भी यही अनुरोध करेंगे’।

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