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व्यापमं घोटाला: गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा, जो आया है, उसे जाना ही है

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले के दो आरोपियों की रविवार को हुई मौत की जांच कराने की मांग को खारिज करते हुए राज्य के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा, ‘मृत्यु एक...
पिछले दो दिनों में व्यापमं मामले से जुड़ी यह तीसरी मौत है।

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले के दो आरोपियों की रविवार को हुई मौत की जांच कराने की मांग को खारिज करते हुए राज्य के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा, ‘मृत्यु एक स्वाभाविक घटना है। दुनिया में जो आता है, उसे जाना ही होता है।’

गौर ने व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपने की विपक्षी कांग्रेस की मांग को भी खारिज कर दिया और दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार के आदेश पर चल रही जांच ‘सही दिशा में’ आगे बढ़ रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार घोटाले में आरोपियों और गवाहों की बड़ी संख्या में संदिग्ध हालात में मौत की जांच का आदेश देने पर विचार कर रही है, गौर ने कहा कि मौत स्वाभाविक है…. यह जेल में हो या रेल में। जो आया है, उसे जाना ही है…।

इस मामले में आरोपी डॉ राजेंद्र आर्य (40) की रविवार को ग्वालियर के बिरला अस्पताल में मौत हो गई जबकि एक अन्य आरोपी नरेंद्र सिंह तोमर (29) की रविवार को ही इंदौर की एक जेल में मौत हो गई। सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के पुत्र शैलेश यादव (50) की मौत पर हुई।

इसके साथ ही इस मामले में मृतक आरोपियों और गवाहों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। शैलेश इसी साल 25 मार्च को लखनऊ के माल एवेन्यू क्षेत्र में अपने पिता के आवास पर मृत मिले थे। उन पर 10 उम्मीदवारों को ग्रेड तीन शिक्षकों के रूप में भर्ती कराने का आरोप था। व्यापमं मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने तीन दिन पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को 23 ऐसे लोगों की सूची सौंपी थी जो इस घोटाले में आरोपी थे और जिनकी अस्वाभाविक मौत हुई।

उधर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामले पर लीपापोती की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी का हाई कोर्ट की ओर से नियुक्त एसआइटी में भरोसा नहीं रह गया है। कांग्रेस ने सोमवार को व्यापमं घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की।

पार्टी ने इसे आजाद भारत का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए दावा किया कि इस मामले में तकरीबन 43 गवाहों और अभियुक्तों की अब तक संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। कांग्रेस प्रवक्ता टाम वड़क्कन ने नई दिल्ली में कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल से कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापमं घोटाला आजाद भारत का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है और इसलिए इसकी सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एक विशेष जांच दल से जांच कराए जाने की जरूरत है।

इस बीच बड़े पैमाने पर दाखिले और भर्ती घोटाले का पर्दाफाश करने वाले प्रशांत पांडेय ने भी मामले की सीबीआइ जांच की मांग की है। व्यापमं घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले विसलब्लोअर व फोरेंसिक विशेषज्ञ प्रशांत पांडे ने कहा कि सीबीआइ जांच जरूर होनी चाहिए। यह कोई संयोग नहीं है कि सारे आरोपी किसी न किसी बीमारी से मर रहे हैं। कहीं कोई बात जरूर है। उन्होंने कहा कि विसलब्लोअर बनने के बाद उन्हें अपनी जान का डर सता रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने पांडे पर विपक्षी नेताओं के हाथ में खेलने का आरोप लगाया है।

उधर, एसआइटी प्रमुख न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) चंद्रेश भूषण ने घोटाले में आरोपियों की मौत के मद्देनजर की जा रही कार्रवाई के बारे में बात करने से इनकार कर दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या एसआइटी मामले के आरोपियों और गवाहों की मौत पर संज्ञान लेगी, उन्होंने कहा, ‘मैं फोन पर कुछ नहीं कह सकता।’

उधर भाजपा ने चौहान सरकार का बचाव किया और पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चल रही जांच पर ‘पूरा भरोसा’ जताया है। उन्होंने कहा कि यह सबसे गहन जांचों में से एक है ताकि सच्चाई का पता लग सके। एसआइटी निश्चित रूप से इस तरह की चीजों का संज्ञान लेगी।

(एजंसी)

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