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व्यापमं के आरोपियों की गुहार, जमानत दें या फिर खुदकुशी की इजाजत

मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिए प्रदेश में हुए प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) को अनुचित तरीके से पास करने वाले ग्वालियर जेल में बंद चिकित्सा पाठ्यक्रम के लगभग 70 छात्रों और जूनियर डॉक्टरों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिख कर गुहार लगाई है कि उन्हें इस मामले..
Author August 10, 2015 09:48 am

मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिए प्रदेश में हुए प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) को अनुचित तरीके से पास करने वाले ग्वालियर जेल में बंद चिकित्सा पाठ्यक्रम के लगभग 70 छात्रों और जूनियर डॉक्टरों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिख कर गुहार लगाई है कि उन्हें इस मामले में जमानत पर जेल से रिहा किया जाए या उन्हें खुदकुशी करने की इजाजत दी जाए।

एक छात्र के पालक एएस यादव और अन्य छात्रों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में राष्ट्रपति को लिखा गया है, ‘हम सभी विचाराधीन आरोपी बहुत लंबे समय से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं, जिसकी वजह से हम सभी छात्रों और डाक्टरों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इसके कारण हम लोग अत्यधिक मानसिक व सामाजिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं और हमारे मन में आत्महत्या करने जैसे नकारात्मक विचार उत्पन्न हो रहे हैं।’

पत्र में लिखा गया है, ‘हम लोगों में से अधिकतर युवा डॉक्टर शासकीय चिकित्सा सेवाओं में कार्यरत हैं और कई चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अध्यनरत हैं। लंबे समय से जेल में बंद होने के कारण हमारी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई है और हमारे परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।’

पत्र में आगे कहा गया है कि, ‘न्यायिक प्रक्रिया में असमानता होने के कारण सभी युवा डॉक्टरों को सेंट्रल जेल ग्वालियर में लंबे समय से बंद रखा गया है, जबकि समान धाराओं और आरोपों में गिरफ्तार हुए हमारे समकक्ष आरोपियों को जबलपुर, भोपाल और अन्य स्थानों की न्यायपालिका के द्वारा कुछ ही दिनों में सत्र और हाई कोर्ट से जमानत हासिल हो चुकी है।’

पत्र में कहा गया है, ‘व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों (प्रवेश समिति), काउंसलिंग कमेटी की अनिमितताओं को छुपाने एवं उन्हें बचाने के लिये लाचार और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को इसमें आरोपी बना कर उन्हें राजनीतिक कारणों से जमानत नहीं देकर, उनमें आपराधिक प्रवृत्ति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।’

पत्र के अंत में राष्ट्रपति से गुहार की गई है, ‘न्यायिक प्रक्रिया में समानता लाते हुए हमें जमानत दी जाए, जिससे हमारा अध्ययन और चिकित्सा सेवाएं लंबे समय के लिए प्रभावित न हों और हम दोबारा समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।’

आरोपी विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रपति को लिखे इस पत्र के प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मप्र हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और गृह मंत्रालय सहित मीडिया को भी भेजी गई है।

ग्वालियर जेल के अधीक्षक दिनेश नारगवे ने बताया, ‘राष्ट्रपति और अन्य को लिखा यह पत्र उन्होंने (छात्रों) मुझे नहीं सौंपा है। पिछले एक साल से ग्वालियर जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी विशाल यादव से मैंने इस संबंध में पूछा तो उसने बताया, उन्होंने ऐसा पत्र लिखा है लेकिन उसे भेजा नहीं है और यह पत्र उनके वकील के पास है।’

वकील विनय हासवानी ने ग्वालियर से फोन पर बताया कि जेल में बंद आरोपियों से अदालत में सुनवाई के दौरान मिलने पर पालकों द्वारा हासिल किया गया यह पत्र लेकर कुछ पालक मेरे पास आए और मुझे यह पत्र सौंपा।
हासवानी ने बताया, ‘कल मैंने यह पत्र राष्ट्रपति कार्यालय सहित अन्य स्थानों को भेज दिया है।’

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