December 05, 2016

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आम सहमति के बिना समान नागरिक संहिता नहीं : वेंकैया नायडू

तीन बार तलाक कहने की प्रथा की मांग करने वाली मुसलिम महिलाएं व संगठन हैं जो सुप्रीम कोर्ट गए हैं।

Author नई दिल्ली | October 27, 2016 03:16 am
सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ।

सूचना व प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि समान नागरिक संहिता को पिछले दरवाजे और आम सहमति के बिना नहीं लाया जाएगा। उन्होंने इस आरोप से इनकार किया कि भाजपा इस विवावादस्पद मुद्दे को चुनावों विशेषकर उत्तर प्रदेश चुनाव के कारण हवा दे रही है। नायडू ने दावा किया कि आगामी चुनाव में भाजपा राजनीतिक लाभ लेने के लिए तीन बार तलाक, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर मुद्दों का इस्तेमाल नहीं करेगी। भाजपा विकास के एजंडा पर चुनाव लड़ेगी।

नायडू ने कहा-सरकार इसे (तीन बार तलाक कहने को) एक धार्मिक मामला नहीं मानती है। यह लैंगिक संवदेनशीलता का मामला है। विधि आयोग ने प्रश्नावली जारी की है और लोगों की प्रतिक्रिया मांगी है। व्यापक आम सहमति के बिना आप समान नागरिक संहिता नागरिक संहिता नहीं ला सकते हैं। आपको इस दिशा में काम करना होगा और आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट तीन बार तलाक कहने के मुद्दे पर सही दिशा दिखाएगा। इन संवेदनशील मुद्दों को चुनाव के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि भारत में चुनाव त्योहारों की तरह हैं जो आते-जाते रहते हैं।

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तीन बार तलाक कहने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के हलफनामे का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय वह (सती) एक हिंदू प्रथा थी तब सरकार ने उसमें हस्तक्षेप किया था। भारतीय संसद, उसकी राजनीतिक प्रणाली द्वारा हिंदू संहिता विधेयक, तलाक कानून, दहेज निषेध, सती प्रथा निषेध कानून पारित किए गए हैं। तीन बार तलाक कहने की प्रथा की मांग करने वाली मुसलिम महिलाएं व संगठन हैं जो सुप्रीम कोर्ट गए हैं। भेदभाव के खिलाफ चर्चा करने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार चाहती है कि प्रत्येक धर्म, प्रत्येक पर्सनल कानून उसके अनुरूप हो। महज तीन बार तलाक कहकर महिला को त्याग देना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है तथा इस प्रथा को बंद होना चाहिए। यह बहस हमने शुरू नहीं की है। कुछ लोग अदालत गए तथा मुद्दे पर चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का मत जानना चाहा। सरकार ने हलफनामा जारी कर कहा कि हमारा मत है कि तीन बार तलाक कहना अनुचित, असभ्य, नाजायज है और इसको खत्म होना चाहिए।

नायडू ने सवाल के जवाब में कहा कि भारत के लोग राम जन्मस्थान पर भव्य मंदिर चाहते हैं किन्तु आप इसे कैसे करेंगे। इसके लिए या तो दावा करने वाले पक्षों के बीच समझौता होना चाहिए या कानूनी निर्णय का पालन करना होगा जिसमें काफी समय लग रहा है। जहां तक सरकार की बात है सरकार व राजनीतिक दलों का किसी मंदिर के निर्माण में कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, बाधाएं पैदा कर या हटा नहीं सकते जैसा कि पहले मुलायम ने किया था। यह पूछे जाने पर कि अब इन विवादास्पद मुद्दों पर ध्यान क्यों केंद्रित किया जा रहा है, उन्होंने पलट कर सवाल किया-जब आप इन पर बात नहीं करते तो कहते हैं कि राम को भुला दिया। जब आप उनकी बात करते हो तो कहा जाता है कि उप्र चुनावों के कारण राम को याद किया जा रहा है।
भाजपा उप्र चुनाव के प्रचार में विकास व सुशासन पर ध्यान अधिक केंद्रित करेगी। इसका यह अर्थ नहीं है कि पार्टी ने समान नागरिक संहिता और राम जन्मभूमि जैसे मुद्दों को त्याग दिया है। नियंत्रण रेखा के परे हुए लक्षित हमले का भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करने की विपक्षी दलों की आलोचना के बारे में नायडू ने कांगे्रस को याद दिलाया कि अटल विहारी वाजपेयी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दुर्गा कह कर जो प्रशंसा की थी, उसका राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

नायडू ने कहा कि राजनीतिक दलों को जानकारी दी गई व सर्वदलीय बैठक में लक्षित हमले के बारे में उनके प्रश्नों का सेना ने जवाब दिया और सभी लोग खुश होकर घर गए। हमलों पर प्रश्न उठाना और इसके सबूत मांगना बाद में आई बात है। लक्षित हमलों के बारे में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ब्योरों का खुलासा राष्ट्रीय हितों में नहीं किया जाता तथा उन पर सवाल भी नहीं उठाए जाते हैं। राहुल गांधी की खून की दलाली वाली टिप्पणी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह अपरिपक्व टिप्पणी थी। जिसने भी टिप्प्णी की है, वह देश के साथ अन्याय है, यह खुद के साथ अन्याय है। यह टिप्पणी करने के बाद वे अलोकप्रिय हो गए।
समाजवादी की आपसी टकराव में भाजपा की भूमिका होने के आरोपों के बारे में नायडू ने कहा कि किसी भी चीज के लिए सत्तारूढ़ दल या आरएसएस पर दोषारोपण करना कुछ लोगों के लिए फैशन बन गया है। अच्छा है कि उन्होंने आरएसएस पर दोषारोपण नहीं किया है। यह परिवार की अंदरूनी समस्या है। वे आपस में खुले में लड़ रहे हैं। उप्र चुनाव में भाजपा के विजयी होने का भरोसा जताते हुए उन्होंने राज्य को तबाह करने का सपा पर आरोप लगाया। यह पूछे जाने पर उप्र में भाजपा का अव्वल प्रतिद्वंद्वी कौन है, उन्होंने कहा कि सपा, बसपा एवं कांगे्रस मैदान में हैं। उन्होंने उप्र मुख्यमंत्री अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल के बीच लड़ाई को सेमी फाइनल करार देते हुए कहा, देखिए, कौन विजयी होता है।

 

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First Published on October 27, 2016 3:16 am

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