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संघ ने दो घंटे में वसुंधरा को दिखाई ताकत

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जयपुर शहर में दो घंटे के चक्का जाम आंदोलन से ही भाजपा सरकार को अपनी ताकत दिखा दी। संघ ने मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में गुरुवार को दो घंटे का चक्का जाम आंदोलन किया था। संघ के आंदोलन में भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ बिगुल बजा दिया। संघ ने आंदोलन के लिए मंदिर बचाओ संघर्ष समिति बना कर आंदोलन की अपील की थी जो सफल रही। समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि उसकी मांगें सात दिन में मान ली जाएं नहीं तो फिर बड़ा आंदोलन होगा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जयपुर शहर में दो घंटे के चक्का जाम आंदोलन से ही भाजपा सरकार को अपनी ताकत दिखा दी।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जयपुर शहर में दो घंटे के चक्का जाम आंदोलन से ही भाजपा सरकार को अपनी ताकत दिखा दी। संघ ने मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में गुरुवार को दो घंटे का चक्का जाम आंदोलन किया था। संघ के आंदोलन में भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ बिगुल बजा दिया। संघ ने आंदोलन के लिए मंदिर बचाओ संघर्ष समिति बना कर आंदोलन की अपील की थी जो सफल रही। समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि उसकी मांगें सात दिन में मान ली जाएं नहीं तो फिर बड़ा आंदोलन होगा।

देश में पहली बार आरएसएस अपनी समर्थित भाजपा सरकार के खिलाफ गुरुवार को जयपुर में सड़कों पर उतर गया। उसके आंदोलन में भाजपा विधायकों और नेताओं ने शामिल होकर वसुंधरा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया। जयपुर शहर में विकास के नाम पर तोड़े गए मंदिरों के विरोध में गुरुवार सुबह नौ बजे से ही चौराहों पर भगवा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा हो गया।

संघर्ष समिति ने दो घंटे के लिए चौराहों पर जाम लगाने का एलान किया था। संघ के अनुशासित कार्यकर्ताओं ने तय समय से पहले ही चौराहों पर मोर्चा संभाल लिया था। इस आंदोलन को जयपुर शहर के सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापार संघों का भी समर्थन हासिल था। चक्का जाम के कारण दो घंटे तक जयपुर शहर थम सा गया और लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।

हालांकि समिति ने एंबुलेंस, पुलिस-प्रशासन और परीक्षार्थियों के वाहनों को ही आने-जाने की छूट दी थी। सरकार ने अपने ही समर्थकों के आंदोलन को देखते हुए पुलिस बल के खासे इंतजाम किए थे। सरकार ने प्रशासन और पुलिस को हिदायत दे रखी थी कि आंदोलनकारियों के प्रति नरम रवैया रखा जाए। संघर्ष समिति ने पहले से ही वादा कर दिया था कि उसका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्वक और आम लोगों के सहयोग से होगा। इसलिए प्रशासन के लिए कोई परेशानी खड़ी नहीं होगी।

भाजपा के लिए भीतरी तौर पर संघ का आंदोलन झकझोर देने वाला साबित हुआ। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी व नरपत सिंह राजवी समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता इस आंदोलन में शामिल हुए। प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री भंवरलाल शर्मा ने बड़ी चौपड़ स्थित जाम स्थल पर धरना देकर कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। शर्मा ने शहर के मंदिरों को तोड़ने पर सरकार के प्रति खासी नाराजगी भी जताई।

उनका मानना था कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अफसरों ने सही जानकारी नहीं दी। इसके कारण ही इतनी बड़ी संख्या में मंदिरों को तोड़ा गया। शर्मा का कहना था कि भाजपा शासन में ही मंदिरों को तोड़े जाने से शहर का नागरिक आहत हुआ। इसके बाद संघ ने पहल कर सरकार को चेताने का काम किया। सरकार के ध्यान नहीं देने पर ही चक्का जाम आंदोलन की नौबत आई।

मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने चक्का जाम आंदोलन को बेहद सफल बताया। समिति ने सरकार से अपनी सभी मांगे सात दिन में मानने की अपील भी की। समिति का कहना है कि सरकार ने सात दिन में उनकी मांगें नहीं मानीं तो फिर से पदाधिकारी फैसला लेकर आगे के आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे। मंदिर का मुद्दा आम जन से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे किसी भी दल में बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

समिति ने साफ किया कि सरकार के बुलावे पर ही वार्ता के जरिए समाधान होगा। समिति की मांग है कि मंदिर तोड़ने के लिए दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही तोड़े गए प्राचीन मंदिरों को फिर से विधि-विधान के साथ उसी स्थान पर स्थापित किया जाए। इसके साथ ही भविष्य में किसी मंदिर को तोड़ने से पहले स्थानीय लोगों की राय ली जाए।

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