December 04, 2016

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वीडियो: एक आदमखोर बाघिन को मारने में उत्तराखंड सरकार को लगे 44 दिन, खर्च हुए 75 लाख रुपये

उत्तराखंड सरकार ने इस अभियान को अपनी तरह का अब तक का सबसे लंबा और खर्चीला अभियान बताया है। यह अभियान 44 दिनों तक चला जिसमें उत्तराखंड सरकार के 75 लाख रुपये खर्च हुए।

उत्तराखंड सरकार ने 44 दिन तक चले अभियान में 75 लाख रुपए खर्च कर आदमखोर बाघिन को मार गिराया है। (इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर की प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

उत्तराखंड सरकार ने एक आदमखोर बाघिन को मारने के लिए 44 दिनों तक चले लंबे अभियान पर 75 लाख रुपये खर्च कर दिए। इस अभियान में शामिल शिकारियों और लगभग सौ के करीब वन विभाग के अधिकारियों को आखिर 44 दिन के बाद देहरादून से 250 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में इस आदमखोर बाघिन को मार गिराने में सफलता मिल गई। वन विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी कि दो लोगों को जान से मारने वाली आदमखोर बाघिन को देहरादून से 250 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में गन्ने के खेत में मार गिराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को इस बाघिन को मारने की नाकाम कोशिश की गई थी जिसमें उसे गोली भी लगी थी। गोली लगने से घायल बाघिन एक गन्ने के खेत में छिपी हुई थी जहां उसे मार गिराया गया।

उत्तराखंड सरकार ने इस अभियान को अपनी तरह का अब तक का सबसे लंबा और खर्चीला अभियान बताया है। बाघिन को मारने के लिए चलाया गया यह अभियान 44 दिनों तक चला जिसमें उत्तराखंड सरकार के 75 लाख रुपये खर्च हुए। इस मुद्दे पर उत्तराखंड में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

वीडियो: इस आदमखोर की तलाश में वन विभाग के सैकड़ों अधिकारी और शिकारियों की टीम तैनात की गई थी

(Video Source: न्यूज स्टेट)

भारतीय जनता पार्टी ने हरीश रावत की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि एक बाघिन को मारने के लिए मौजूदा सरकार 75 लाख रुपये पानी की तरह बहा देती है वहीं, राज्य की जनता की भलाई के लिए कुछ नहीं कर रही है। हालांकि, आदमखोर बाघिन के मारे जाने के बाद वन विभाग और गांव के लोग खुश हैं। हालांकि, वन विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उत्तराखंड में हाल के वर्षों में जंगली जानवरों और इंसानों के बीच द्वन्द्व बढ़ा है और जानवारों को मारकर इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले कुद वर्षों में उत्तराखंड में जंगलों की तरफ इंसानों ने अपना आसियाना बनाना शुरू क दिया है जिससे जानवरों के बीच असुरक्षा का माहौल पनपा है और इससे जैव विविधता को भारी क्षति पहुंच रही है। उन्होंने चेताया है कि यदि जंगली जानवरों के क्षेत्र में इंसनी अतिक्रमण ऐसे ही बढ़ता रहा तो भविष्य में जानवरों और इंसानों के बीच और भी ऐसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2000 से अब तक राज्य में जंगली जानवारों खासकर चीता और बाघिन के हमलों में 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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First Published on October 21, 2016 12:46 pm

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