ताज़ा खबर
 

नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला- गंगा भारत की पहली जीवित इकाई, गंगा-यमुना को मिलेंगे मानव के अधिकार

भारत की दोनों पौराणिक नदियों को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे।
गंगा किनारे स्थित वाराणसी के घाट। (Source: PTI)

उत्‍तराखंड की नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में गंगा नदी को मानव के अधिकार दिए हैं। अदालत ने गंगा को ‘भारत के पहले जीवित तंत्र के रूप में मान्‍यता दी है। गंगा और यमुना, भारत की दोनों पौराणिक नदियों को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे। गंगा के विषय में याचिका लगाने वाले के वकील एमसी पंत ने कहा, ”हाईकोर्ट ने गंगा को वे सभी अधिकार उपलब्‍ध कराए हैं जो इंसान को हैं। हमने अदालत के ध्‍यान में मामला लाया। न्‍यूजीलैंड ने एक नदी को ऐसे ही अधिकार दे रखे हैं।” जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि ‘हम तो गंगा को हमेशा से ही मां करते हैं, तो मां लिविंग पर्सन (जीवित प्राणी) ही होती हैं और हाईकोर्ट ने उसी की पुष्टि कर दी है।’

गंगा भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण और पौराणिक दृष्टि से पूज्‍यनीय नदी है। उत्‍तराखंड में हिमालय पर्वत श्रृंखला के गंगोत्री ग्‍लेशियर से निकलने वाली गंगा भारत के मैदानी इलाकों को सींचते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए कुछ समय पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को गंगा में पर्याप्त पानी छोड़ने और गंगा के आसपास पॉलीथीन को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया था, लेकिन अब भी इन क्षेत्रों में पालीथीन पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सका है।

गंगा का उद्गम स्थल भी प्रदूषण की चपेट में है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के ग्लेशियर अध्ययन केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार गंगोत्री ग्लेशियर के माइक्रो क्लाइमेट में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। इसकी सतह पर कार्बन और कचरे की काली परत जमा हो गई है। एनजीटी के अनुसार गंगा से प्रदूषण दूर करने के लिए अभी तक तीस हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ परियोजना शुरू की।

पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या विस्फोट के कारण गंगा किनारे की आबादी तेजी से बढ़ी है। विडंबना है कि गंगा किनारे बसी इस आबादी ने भी गंगा को साफ-सुथरा रखने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि इसे प्रदूषित ही किया।

संबंधित वीडियो देखें:

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग