March 27, 2017

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उड़ी हमले के बाद सेना ने की कार्रवाई, ब्रिगेडियर सोमशेखर हटाए गए

सेना की 28 माउंटेन डिवीजन के एक अधिकारी उड़ी ब्रिगेड के कमांडर के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

Author श्रीनगर | October 2, 2016 00:14 am
सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग (फाइल फोटो)

सेना ने 18 सितंबर को उड़ी में हुए घातक हमलों के बाद उड़ी ब्रिगेड के कमांडर को हटा दिया है। इस हमले में 19 जवान शहीद हुए थे। रक्षा सूत्रों ने बताया कि ब्रिगेडियर के सोमशेखर को संवेदनशील ब्रिगेड से हटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि सेना की 28 माउंटेन डिवीजन के एक अधिकारी उड़ी ब्रिगेड के कमांडर के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस घटनाक्रम पर टिप्पणी मांगने पर सेना के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने शनिवार को उत्तरी व पश्चिमी कमान का दौरा किया। नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकी शिविरों पर लक्षित हमले के बाद भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव के मद्देनजर सीमा पर किसी भी स्थिति से निपटने की भारत की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उन्होंने यह दौरा किया। सेना प्रमुख को दो महत्त्वपूर्ण कमान के शीर्ष कमांडरों ने मौजूदा स्थिति,  तैयारियों और आपात योजनाओं के बारे में जानकारी दी। लक्षित हमले की योजना और उसे अंजाम देने वाले उत्तरी कमान के ऊधमपुर मुख्यालय में जनरल सिंह ने स्पेशल फोर्सेज के कर्मियों से बातचीत की, जिन्होंने इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। उन्हें कमान क्षेत्र में समग्र सुरक्षा स्थिति के बारे में उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टीनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने जानकारी दी। उत्तरी कमान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना प्रमुख ने कोर कमांडरों के साथ बातचीत की और मौजूदा सुरक्षा स्थिति व अभियानगत तैयारियों के बारे में स्वयं जानकारी ली।

उन्होंने बताया कि जनरल सिंह ने लक्षित हमला अभियान में भाग लेने वाले सैनिकों के साथ बातचीत की और इस सफल अभियान के लिए उनकी सराहना की। सिंह ने लीपा, तत्तापानी, केल और भीमबर में सात आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाने के लिए अधिकारियों एवं जवानों की व्यक्तिगत रूप से सराहना की। चंडीगढ़ में एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि सेना प्रमुख को पश्चिमी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टीनेंट जनरल सुरिंदर सिंह ने अभियानगत मामलों की जानकारी दी। सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि सेना प्रमुख ने विभिन्न वरिष्ठ कमांडरों के साथ बातचीत की तथा उन्हें पश्चिमी सीमाओं पर उच्चतम सतर्कता व चौकसी बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।  सूत्रों के मुताबिक 18 सितंबर को उड़ी में सेना के शिविर पर हमले के कुछ ही समय बाद लक्षित हमले का निर्णय किया गया था। उन्होंने बताया कि लक्षित हमले के बाद पाकिस्तान के संभावित जवाबी हमले की आशंका को देखते हुए भारत अपनी आपात योजना के साथ तैयार है। अनुमान है कि लक्षित हमले में कम से कम 40 की मौत हुई है पर इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सेना ने अभियान के दौरान भारतीय पक्ष में हताहत होने संबंधी पाकिस्तान से आने वाली खबरों को बकवास बताया है। सेना ने कहा कि स्पेशल फोर्सेज के एक सदस्य को लौटते समय मामूली चोट आई है पर यह सेना या आतंकवादी कार्रवाई के चलते नहीं आई है।

इस बीच, पाकिस्तानी सैन्य बलों ने एक बार फिर संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए जम्मू कश्मीर की अखनूर तहसील में नियंत्रण रेखा के पास मोर्टार बमों व भारी मशीन गनों से भारतीय चौकियों व असैन्य क्षेत्रों को शुक्रवार देर रात निशाना बनाया। रक्षा सूत्रों ने कहा कि देर रात साढ़े तीन बजे शुरू होकर सुबह छह बजे तक चली गोलीबारी में जान-माल का किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। सीमा की सुरक्षा कर रहे भारतीय बलों ने प्रभावशाली तरीके से जवाबी कार्रवाई की। सूत्रों ने कहा कि अखनूर तहसील के चंब इलाके और पल्लनवाला सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम चौकियों पर मोर्टार बमों, आरपीजी, भारी मशीन गनों व छोटे हथियारों से हमला किया गया। पुलिस ने बताया कि पाकिस्तानी सैन्य बलों ने बादू व चानू बस्तियों पर हमला किया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पास रह रहे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

उन्होंने कहा कि सीमाई इलाकों में रह रहे निवासी अपने मवेशियों व घरों की देखरेख के लिए सीमा के पास लौट रहे थे, तभी पाकिस्तानी बलों ने उन्हें भारी हथियारों से निशाना बनाने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से बादू गांव के कुछ मकानों में गोलियां लगीं। पीओके में 29 सितंबर को किए गए लक्षित हमले के बाद सीमा पार से गोलीबारी बढ़ी है। जम्मू के उपायुक्त सिमरनदीप सिंह ने शुक्रवार को बताया था कि पाकिस्तान की ओर से कल रात को छोटे हथियारों से नियंत्रण रेखा में जम्मू जिले के पल्लनवाला, चपरियाल और समनाम इलाकों में छोटे हथियारों से गोलीबारी की गई।

अजहर को आतंकी घोषित नहीं होने दिया चीन ने

चीन ने शनिवार को कहा कि भारत की ओर से पाकिस्तान स्थित जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकवादी घोषित करवाने के प्रयास पर उसकी ओर से लगाई गई तकनीकी रुकावट आगे बढ़ा दी गई है। चीन की ओर से लगाई गई तकनीकी रोक की मियाद सोमवार को पूरी हो रही थी बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
और चीन ने अगर आगे आपत्ति नहीं उठाई होती तो अजहर को आतंकवादी घोषित करने वाला प्रस्ताव स्वत: पारित हो गया होता। अब चीन की यह रोक अगले छह महीने के लिए फिर बढ़ गई है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि भारत की ओर से मार्च, 2016 में 1267 समिति को सौंपे गए आवेदन पर तकनीकी रोक को पहले ही आगे बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के आवेदन पर अब भी मतभेद हैं। तकनीकी रोक के आगे बढ़ जाने के बाद समिति को इस मामले पर विचार करने के लिए और संबंधित पक्षों को आगे विचार-विमर्श के लिए समय मिल जाएगा।

इसी साल 31 मार्च को चीन ने पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड अजहर को आतंकवाद घोषित कराने के कदम पर रोक लगा दी थी। सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य होने की वजह से चीन को वीटो का अधिकार हासिल है। सुरक्षा परिषद के 15 देशों में चीन इकलौता देश रहा जिसने भारत के आवेदन का विरोध किया जबकि 14 अन्य देशों ने भारत की कोशिश का समर्थन किया। 1267 समिति की सूची में अजहर का नाम शामिल हो जाने से उसकी संपत्तियां जब्त हो जाएंगी और उसकी यात्रा पर भी रोक लग जाएगी। गेंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति ‘सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुसार अपना काम करती है।’ उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से यह मानता रहा है कि किसी मामले को सूचीबद्ध करने के लिए 1267 समिति को उद्देश्यात्मकता, निष्पक्षता व पेशेवराना रवैए के मुख्य सिद्धातों पर खरा उतरना चाहिए और सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के सदस्यों के बीच सहमति से फैसला करना चाहिए। चीन ने इस तकनीकी रोक को ऐसे समय आगे बढ़ाया है जब उड़ी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति है। उड़ी हमले के लिए जैश ए मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया गया था।

लक्षित हमलों पर पाक को नहीं मिला संरा में समर्थन : अकबरुद्दीन

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लक्षित हमलों के मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जा रहे पाकिस्तान को वैश्विक संस्था में कोई समर्थन नहीं मिला है और उन्होंने इन दावों को भी खारिज किया कि संघर्षविराम पर नजर रख रहे संयुक्त राष्ट्र मिशन ने नियंत्रण रेखा पर सीधे तौर पर किसी प्रकार की गोलीबारी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी है। संयुक्त राष्ट्र में
भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर 29 सितंबर को भारत के लक्षित हमलों का जिक्र करते हुए महासचिव बान की मून के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक के इन बयानों को खारिज कर दिया कि भारत व पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य निगरानी समूह (यूएनएमओजीआइपी) ने नियंत्रण रेखा के पार ताजा घटनाक्रम संबंधी कोई गोलीबारी सीधे तौर पर नहीं देखी है।

अकबरुद्दीन ने यहां भारतीय स्थायी मिशन में शुक्रवार को कहा कि किसी के देखने या नहीं देखने से असल बात बदल नहीं जाती। भारतीय दूत से जब दुजारिक के बयान पर टिप्पणी करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि दुजारिक ने जो कहा उसे सीधे तौर पर देखा गया। यह उन्हें ही देखना है। कोई किसी बात को स्वीकार करता है या नहीं, इससे हकीकत बदल नहीं जाती। वास्तविकता, वास्तविकता होती है, हमने तथ्य सामने रखे। दुजारिक से उनके दैनिक संवाददाता सम्मेलन में जब इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा गया कि भारत ने कहा है कि उसने लक्षित हमला किया तो यूएनएमओजीआइपी कैसे यह कह सकता है कि उसने कोई गोलीबारी नहीं देखी, तब उन्होंने दोहराया कि यूएनएमओजीआइपी ने सीधे तौर पर कोई गोलीबारी नहीं देखी। अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर व लक्षित हमलों के मामलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख व 15 सदस्यीय परिषद के पास गया है। लेकिन वैश्विक संस्था की ओर से हस्तक्षेप की उसकी अपील को कोई समर्थन नहीं मिला, क्योंकि इस मामले पर आगे कोई चर्चा नहीं हुई।

बताते चलें कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ बैठक में कहा कि नियंत्रण रेखा के पार लक्षित हमला करने का भारत का दावा गलत है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत ने खुद माना है कि उसने पाकिस्तान के खिलाफ ‘आक्रामकता दिखाई’ है। पाकिस्तानी मिशन की ओर से यहां जारी बयान के अनुसार मलीहा लोधी ने बान की मून से कहा कि भारत ने अपनी घोषणाओं व कार्रवाइयों से ऐसी स्थितियां पैदा की हैं जिनसे क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने सितंबर महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष व संयुक्त राष्ट्र में न्यूजीलैंड के राजदूत गेरार्ड वान बोहेमेन से मुलाकात करके भारत की कार्रवाई का मामला यूएनएससी में उठाया था। अकबरुद्दीन ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान की राजदूत ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड से संपर्क किया था। उन्होंने इसके बाद आपको जो नहीं बताया, वह हुआ। क्या किसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई बात के बारे में कोई बात उठाई। इसके बारे में मैं जो जानता हूं, वह यह है कि इस (लक्षित हमला व कश्मीर मसले) पर आगे कोई बात नहीं हुई। हम एक जिम्मेदार देश हैं। हमारी मंशा स्थिति को और बिगाड़ने की नहीं है।

 

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First Published on October 1, 2016 11:04 pm

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