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पीएम मोदी तरह चाय बेचा करते थे UP के नए बीजेपी प्रमुख केशव प्रसाद मौर्य

46 साल के केशव प्रसाद मौर्य को खुद अमित शाह ने कई वरिष्‍ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए चुना है। उनकी छवि उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली में हिंदुत्‍ववादी नेता की है।
यूपी में बीजेपी के नए प्रदेश अध्‍यक्ष केशव प्रसाद मौर्य।

2014 लोकसभा चुनाव में पहली बार सांसद बने केशव प्रसाद मौर्य का उत्‍तर प्रदेश भाजपा के अध्‍यक्ष पद पर चयन हैरान करने वाला है। 2017 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मौर्य का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में भाजपा की कमान संभालने वाले केशव प्रसाद मौर्य लक्ष्‍मीकांत बाजपेयी की जगह पार्टी प्रदेश अध्‍यक्ष का पद संभालेंगे। उनका कार्यकाल पिछले साल दिसंबर में खत्‍म हो गया था।

केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी हैं और 12 साल के बाद पहली बार यूपी में बीजेपी ने बैकवर्ड क्‍लास के किसी नेता को यह पद सौंपा है। इनकी कहानी भी पीएम मोदी की तरह बेहद रोचक है। मौर्य कभी कौशांबी के सिराथू कस्बे में एक छोटी सी दुकान में पिता के साथ चाय और अखबार बेचते थे। इसी दुकान पर चाय पीने के लिए आने वाले नेताओं से उन्‍होंने राजनीति सीखी। अयोध्या आंदोलन के दौरान वह विश्‍व हिंदू परिषद से भी जुड़े और राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ से भी नाता जोड़ा।

उनके पिता श्यामलाल मौर्य ने 80 के दशक में परिवार की जीविका चलाने के लिए ब्लॉक के सामने चाय की छोटी दुकान खोली थी। यहीं केशव पिता का हाथ बंटाया करते थे। 1989 में अयोध्या आंदोलन के दौरान विहिप से जुड़े कई नेता उनकी दुकान पर आते थे, जिनकी संगत में केशव विहिप की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन से जुड़े। फिर घर छोड़कर इलाहाबाद आ गए और विहिप का कामकाज संभालने लगे और जल्दी ही वह विहिप दिग्गज अशोक सिंघल के चहेते बन गए। अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ने वाले केशव ने समय के साथ चलते हुए भाजपा का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

भाजपा के टिकट पर उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से सबसे पहले किस्मत आजमाई, लेकिन नाकाम रहे। इसके बाद 2012 में सिराथू विधानसभा सीट पर सपा की आंधी के बीच उन्होंने किस्‍मत आजमाई और पहली बार जीत का स्‍वाद चखा। विधायक बनने के बाद पार्टी ने उन्हें 2014 लोकसभा चुनाव में फूलपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया, जहां से जीतकर वह सांसद बने। करीबियों के मुताबिक, केशव की संगठनात्मक क्षमता और वाकपटुता ने ही उन्हें भाजपा का मुखिया बना दिया।

46 साल के केशव प्रसाद मौर्य को खुद अमित शाह ने कई वरिष्‍ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए चुना है। उनकी छवि उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली में हिंदुत्‍ववादी नेता की है। उनके मीडिया इन्‍चार्ज ने बताया कि उन्‍होंने 1996 में इलाहाबाद में गौहत्‍या रोकने के लिए गौरक्षा चौकी की स्‍थापना की थी।

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  1. H
    Hindustani
    Apr 9, 2016 at 8:33 am
    id=8081
    (0)(0)
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