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धमकी देने, जबरन बसूली और मर्डर केस में शामिल MLA मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी मकोका में बरी

उत्तर प्रदेश के विधायक मुख्तार अंसारी और उनके तीन सहयोगियों को अनुचित आर्थिक लाभ के लिए संगठित आपराधिक गिरोह चलाने के आरोप से गुरुवार को बरी कर दिया गया है।
Author नई दिल्ली | February 5, 2016 03:04 am
उत्तर प्रदेश के विधायक मुख्तार अंसारी का फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के विधायक मुख्तार अंसारी और उनके तीन सहयोगियों को अनुचित आर्थिक लाभ के लिए संगठित आपराधिक गिरोह चलाने के आरोप से गुरुवार को बरी कर दिया गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र शेखर ने 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में आरोपी और मऊ से निर्दलीय विधायक 57 साल के अंसारी, उनके कथित सहयोगियों प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी, इफ्तिखार अहमद और मिराज अहमद को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की धारा तीन (चार) से बरी कर दिया।
अभियोजन ने पहले अदालत में कहा था कि सभी चारों लोग दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में धमकी देने, जबरन वसूली के विभिन्न मामलों में शामिल हैं। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्या मामले में भी अभियोजन का सामना कर रहे हैं। लेकिन पुलिस अदालत में साक्ष्य नहीं दे पाई।

अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि चार आरोपियों को उनके खिलाफ सबूत के अभाव और कमजोर अभियोजन मामला के कारण बरी किया गया। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने अंसारी और तीन अन्य के खिलाफ 2009 में मकोका के प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया था और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत ने तीन मई 2012 को मकोका के तहत चार लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। अदालत में वकील दीपक शर्मा ने अंसारी का प्रतिनिधित्व किया।

अंसारी और अन्य आरोपियों ने दोषी होने से इनकार किया था और सुनवाई का सामना किए जाने की बात की थी। बजरंगी अभी झांसी जेल में है और बजरंगी पर संगठित अपराध का आरोप भी लगाया गया था। अदालत ने कहा कि अपराध के कारण कोई मौत नहीं हुई। इफ्तिखार और मिराज अहमद पर बजरंगी के संगठित अपराध में जानबूझकर मदद करने, अपराधों को अंजाम देने की साजिश रचने आदि के आरोप थे। बजरंगी को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने जबरन पैसे वसूलने के लिए दक्षिणी दिल्ली के एक कारोबारी अशोक टेबरीवाल को धमकी देने के आरोप में अक्तूबर 2009 में गिरफ्तार किया था।

इफ्तिखार और मिराज को नवंबर 2009 में गिरफ्तार किया गया था और पुलिस के यह कहने पर उन लोगों के खिलाफ मकोका लागू किया गया था कि वे संगठित आपराधिक गिरोह चला रहे हैं। बजरंगी, इफ्तिखार और मिराज को 2012 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आइपीएस के तहत जबरन वसूली के आरोप में बरी कर दिया था जबकि मकोका के तहत मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष था। पुलिस ने बजरंगी और अन्य को मुंबई से गिरफ्तार किया था और दावा किया था कि उन्होंने टेलीफोन पर हुई एक बातचीत को पकड़ा है जिससे टेबरीवाल से जबरन पैसे वसूले जाने की साजिश का खुलासा होता है। पुलिस का दावा था कि फोन करने वाले लोग बजरंगी के सहयोगी हैं और टेबरीवाल से एक करोड़ रुपए की मांग करते हुए फोन किए गए थे।

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