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भारत में फांसी देने से पहले किए जाते हैं ये काम, जानिए- उस वक्त क्या बोलता है जल्लाद

आज हम आपको फांसी देने के ठीक पहले की जाने वाली औपचारिकताओं के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में आपको शायद ही पता होगा।
विजय ने भी उसी कमरे में और उसी पंखे से फांसी लगाई, जिससे उसकी पत्नी प्रिया ने फांसी लगाकर जान दी थी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारे देश में जघन्य अपराध करने पर अपराधी को फांसी की सजा दी जाती है, हालांकि इससे पहले अपराधी अपनी फांसी की सजा कम करने के लिए कई तरह की याचिका भी दायर कर सकता है। मगर फांसी का ऐलान होने के बाद और फांसी देने से ठीक पहले कई औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। आज हम आपको फांसी देने के ठीक पहले की जाने वाली औपचारिकताओं के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में आपको शायद ही पता होगा।

– जिस दिन दोषी को फांसी दी जानी होती है उस दिन सबसे पहले दोषी को सुबह 3 बजे ही उठा दिया जाता है और फ्रेश होने के लिए कहा जाता है।

– उसके बाद उसे नहाने के लिए कहा जाता है और खास बात यह है कि उस दिन उसे उसकी मर्जी वाला पानी दिया जाता है, यानि अगर वो ठंडे पानी से नहाना चाहता है तो उसे ठंडा पानी दिया जाता है और अगर वो गर्म पानी से नहाना चाहता है तो उसे गर्म पानी दिया जाता है।

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– उस दिन दोषी को उसके पंसद के अनुसार खाना दिया जाता है। उस दिन वो जो चाहता है वो ही खाना उसे खिलाया जाता है।

– खाना खिलाने के बाद उसे हल्का नाश्ता भी दिया जाता है और उसे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है ताकि वो अपने परिवार वालों को याद कर सके।

– साथ ही दोषी को उसकी इच्छा के अनुसार धार्मिक किताबें भी पढ़ने को दी जाती है और अपने भगवान के सामने प्रार्थना करने का मौका दिया जाता है।

– उसके बाद डॉक्टर दोषी की जांच करते हैं और दोषी की शारीरिक व मानसिक जांच करते हैं। अगर उसकी तबियत पूरी तरह से ठीक होती है तो उसे फांसी पर लटकाया जाता है।

– उसके बाद फांसी के लिए ले जाते वक्त दोषी को काले रंग का कपड़ा दिया जाता है, ताकि वो कुछ ना देख सके।

– दोषी का मुंह ढकने के बाद मजिस्ट्रेट दोषी की पहचान करके वारंट को पढ़कर सुनाता है और वो दोषी की भाषा में भी इसे पढ़ता है। उसके बाद जल्लाद को फांसी देने के लिए लिवर खेंचने को बोलता है।

– खास बात यह है कि फांसी देने वाले जल्लाद को पहचान गोपनीय रखी जाती है। वहीं जल्लाद फांसी देने से पहले बोलता है कि ‘मुझे माफ कर दिया जाए। हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लमान भाईयों को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो हुकुम के गुलाम हैं’।

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