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इस तरह ‘उज्ज्वला’ योजना ने बदल डाली तकदीर

पहली खुशी तो इस बात की कि उनकी बूढ़ी मां, जिन्होंने जिंदगीभर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाया, को अब ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत गैस का सिलेंडर मिल गया है।
Author वर्धा | November 14, 2017 01:32 am
‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ का शुभारंभ; 5 करोड़ परिवारों को मिलेगा लाभ, PM बोले-मैं देश का मजदूर नंबर-1

प्रशांत देशमुख

नौजवान मंगेश रायमल के लिए जिंदगी अब बदल चुकी है। विदर्भ क्षेत्र के दूरदराज इलाके में एक पिछड़े गांव में अपने घर के बाहर चारपाई पर बैठे मंगेश के लिए खुशी का कोई ठिकाना नहीं रह गया है। और यह खुशी एक नहीं, बल्कि दो वजहों से है। पहली खुशी तो इस बात की कि उनकी बूढ़ी मां, जिन्होंने जिंदगीभर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाया, को अब ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत गैस का सिलेंडर मिल गया है। और दूसरी खुशी इसलिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उन्हें खत भेजा है।  मंगेश की मां को ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत गैस का सिलेंडर मिलने से उनके चेहरे पर भी खुशी दौड़ गई है। मां जब चूल्हे पर खाना बनातीं और लकड़ियों के जलने से जो धुआं उनकी आंखों में लगता था, वह उनके लिए बहुत ही पीड़ादायक था। अब मंगेश को लगा है कि उज्ज्वला योजना देश की सभी मांओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को निजी रूप से धन्यवाद देने के लिए सीधे खत लिखने का विचार बनाया।

उन्हें सबसे ज्यादा आश्चर्य तो तब हुआ जब प्रधानमंत्री ने तुरंत खुद ही उनकी चिट्ठी का जवाब दिया। यह कोई उबाऊ या सरकारी किस्म का जवाब नहीं था। इसमें प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ थी, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्होंने रायमल के अनुभव और चूल्हे पर खाना बनाने से मुक्ति पाने वाली माताओं की भावनाओं को साझा किया। मंगेश एक इंजीनियरिंग स्नातक हैं और नागपुर में नौकरी करते हैं। लेकिन अपनी यादों के जरिए वह आज भी अपने गांव, परिवार और मां से पूरी तरह से जुड़े हैं। उज्ज्वला योजना ने उनकी इन यादों को फिर से ताजा कर दिया है। केंद्र सरकार की इस योजना का असल मकसद ग्रामीण महिलाओं को गैस का सिलेंडर मुहैया करवा कर मिट्टी के चूल्हे से निजात दिलवाना है।

मंगेश उन पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे उनकी मां मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाती थीं और लकड़ी जलने से निकला धुआं आंखों में लगता था। कई बार जब वह अपनी मां से इसे लेकर बहस करते और कहते कि लकड़ी का धुआं बीमार कर देगा, तो मां कहती कि वह जानबूझकर तो जला नहीं रहीं लकड़ी और इसके लिए तो वह कुछ कर भी नहीं सकतीं। संयोग से उनके गांव में एक गैस एजंसी थी। उन्होंने पिता से गैस कनैक्शन लेने के लिए कहा। शुरू-शुरू में मंगेश अपनी मां को भी इस बारे में समझाया करते ताकि वह गैस सिलेंडर जैसी नई सुविधा को अपना लें। और जब उनकी मां गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने की आदी हो गईं तो मंगेश की खुशी का भी क्या कहना था।

हालांकि मंगेश ने खुद इस सुविधा को नहीं लिया, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व और संतुष्टि है कि उज्ज्वला योजना से देशभर की ढाई करोड़ महिलाओं को जो लाभ मिला है, उस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनी भावनाओं से अवगत कराया। उन्हें उम्मीद है कि इस योजना से देश की ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजमर्रा की चूल्हे की मुश्किल से निजात मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगेश को जो जवाब लिखा उसमें उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि गैस कनैक्शन से किस तरह मंगेश और उनकी मां देवकाबाई का जीवन खुशहाल हो गया। प्रधानमंत्री ने लिखा-‘देश के करोड़ों घरों में जल रहे मिट्टी के चूल्हे महिलाओं के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमीर लोग अच्छी सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। लेकिन गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं के लिए तो यह अभी एक सपना ही है। इस सपने को साकार करने के लिए ही उज्ज्वला योजना के जरिए कोशिशें की जा रही हैं।’ प्रधानमंत्री ने मंगेश की भावनाओं का हवाला देते हुए यह भी बताया कि कैसे उसकी मां को इस तरह के कष्ट से गुजरना पड़ा।

 

मां बोलीं, बेटा बहुत खुश है

मंगेश की मां कहती हैं कि घर में गैस कनैक्शन आ जाने से बेटा बहुत ही खुश है। पिता संतोष रायमल कहते हैं कि चूल्हे के अलावा हमारे पास विकल्प ही क्या था। धुएं की वजह से मंगेश की मां को कफ की समस्या हो जाती थी। दमे के लक्षण नजर आने लगे थे। वह कहते हैं- मैं तो अपनी मां को नहीं बचा सका था, लेकिन मेरे बेटे ने अपनी मां को इससे निजात दिला दी है। यह गांव पिंपलगांव है जो देवली तहसील से 20 किलोमीटर दूर है। मंगेश बहुत ही गरीब किसान परिवार का है। गांव में शुरुआती पढ़ाई करने के बाद मंगेश 12वीं तक पढ़ाई के लिए वर्धा के नवोदय विद्यालय में चला गया। और फिर नागपुर के यशवंतराव चव्हाण इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली।

आजकल वह एक प्राइवेट कंपनी में हैं। मंगेश सामाजिक मुद्दों से सरोकार रखते हैं। सोशल मीडिया पर भी वह सक्रिय हैं। हालांकि जब उन्होंने मोदी को पत्र लिखा था तो उन्हें जवाब मिलने की उम्मीद नहीं थी। इससे पहले भी वह नोटबंदी से हुई परेशानी पर प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके थे। मंगेश ने पोस्ट आॅफिसों और बैंकों को मिलाने का भी सुझाव दिया था। तब मोदी ने उन्हें पत्र का जवाब देते हुए इसे जल्द ही करने की बात कही थी। वह कहते हैं- प्रधानमंत्री ने मेरे सुझाव पर गौर किया, यही मेरे लिए संतोष की बात है। मंगेश को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री ने किसानों की आमद दोगुनी करने का भरोसा दिया है, ताकि देश के किसानों को राहत मिल सकेगी।

 

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