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केंद्र सरकार के खिलाफ समूचे विपक्ष की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कराना चाहती हैं सोनिया गांधी, तीन प‍ार्टियों ने किया इनकार

इस प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को भी हिस्‍सा लेकर मीडिया को संबोधित करना है।
राष्‍ट्रपति से मुलाकात के बाद बाहर आते विपक्षी सांसद। (PTI Photo: 12/16/2016)

कांग्रेस ने मंगलवार (27 दिसंबर) को सभी विपक्षी दलों की बैठक और संयुक्‍त प्रेस कॉन्‍फ्रेंस बुलाई है। संसद सत्र के पूरी तरह बर्बाद होने के बाद कांग्रेस समूचे विपक्ष को फिर से एक मंच पर लाना चाहती थी। नोटबंदी के मुद्दे पर संसद के बाहर होने वाली इस प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को भी हिस्‍सा लेकर मीडिया को संबोधित करना है। मगर कांग्रेस की यह मुहिम खटाई में पड़ती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि वाम दलों और नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बैठक और काॅन्‍फ्रेंस में शामिल हो पाने में असमर्थता जताई है। एनडीटीवी रिपोर्ट के अनुसार, शरद पवार की नेशनलिस्‍ट कांग्रेस पार्टी ने भी इस कवायद का हिस्‍सा होने से इनकार कर दिया है। नोटबंदी के फैसले के बाद जिस तरह संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्षी दलों की एकता बरकरार रही, उससे कांग्रेस को लगा था कि वह सत्र समाप्‍त होने के बाद भी अपनी ताकत और सामंजस्‍य का प्रदर्शन कर सकती है। संसद में करीब 14 पार्टियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया था।

वामदलों की तरफ से सीताराम येचुरी ने कहा कि संसद में फ्लोर मैनेजमेंट के मुकाबले बाहर किसी प्‍लेटफॉर्म पर पार्टियों को लाना उतना आसान नहीं है। उन्‍होंने एनडीटीवी से कहा, ”सभी विपक्षी पार्टियों को देश में संयुक्‍त रूप से बातचीत कर कार्रवाई करनी चाहिए। मैं किसी एक पर ठीकरा नहीं फोड़ना चाहता मगर मैं यह कहना चाहूंगा कि विपक्ष की ऐसी किसी गतिविधि हमेशा पहले से तय बातचीत पर निर्भर करती है।”

जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्‍यागी ने कहा है कि उनकी पार्टी ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होगी या नहीं। लेकिन त्‍यागी ने कहा कि वह पहले इन सबका एजंडा जानना चाहती है।

त्‍यागी ने कहा कि कोई ‘न्‍यूनतम साझा कार्यक्रम’ तय नहीं किया गया है और पीएम मोदी द्वारा 500, 1000 रुपए के नोट बंद करने को लेकर सभी विपक्षी पार्टियों का एकमत नहीं है।

शीतकालीन सत्र में घंटों का हिसाब लगाया जाए तो लोकसभा ने हंगामे की वजह से 92 घंटे खोए और सिर्फ 19 घंटे काम किया। वहीं राज्यसभा ने 86 घंटे खोए और 22 घंटे काम किया। दूसरे शब्दों में लोकसभा ने एक घंटे काम के बदले पांच घंटे गंवाए गए वहीं राज्यसभा में एक घंटे के बदले चार घंटे का समय बर्बाद हुआ।

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  1. A
    Abu talib
    Dec 27, 2016 at 2:55 am
    दरअसल पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस ने अपनी खोई हुई काफी ज़मीन वापिस हासिल की है ! इससे न केवल सत्तारूढ़ दल बल्कि विपक्ष के भी कुछ दल चिंतित हैं !
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    Reply
    1. B
      Bharat Bhushan
      Dec 27, 2016 at 7:13 am
      कांग्रेस का सपोर्ट कोई ही कर सकता है, जिनके पास प्रेजिडेंट भी कोई इंडियन ओरिजिन का नहीं है. पप्पू इन्हें ४४ से ४ पे ला के ही रहेगा.
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      1. H
        hisam
        Dec 26, 2016 at 1:17 pm
        one person dead is another bread, congress a familly party seeing is opporunity to get public attraction, Goverment of India must ban all polotical party who is depend on one familly ownership like congress, Mrs Sonia hi president her son wise president her daughter central commite and party vito power authority her son in law also in the party, this type of familly business must be ban in india.
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        1. J
          jaya
          Dec 26, 2016 at 1:36 pm
          किसी न किसी विपक्षी दाल ने अपने खिलाफ कोई जांच न हो इसलिए पिछले दरवाज़े से संधि कर लिया हो सकती है
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          1. J
            jaya
            Dec 26, 2016 at 1:48 pm
            बीजेपी पार्टी में बहुत सारे लोग खानदान के साथ राजनीती में है,जहा तक कांग्रेस का सवाल है आज़ादी की लड़ाई में यह अत्यंत धनी खानदान घर के एक एक वियक्ति के साथ यहाँ तक की इंदिरा गाँधी की उम्र मात्र ७ सात वर्ष थी , आज़ादी की लड़ाई में घर तक राष्ट्र को समर्पित किया.कांग्रेस के गाँधी परिवार की मेनका गाँधी मंत्री है बीजीपी में, उनका पुत्र वरुण गाँधी भी बी जी पी का संसद है. बी जी पी के यशवंत सिन्हा का पुत्र बी जी पी का मंत्री, नितीश कुमार लालू सभी के खानदान और शिवसेना
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            1. R
              rambharosr
              Dec 27, 2016 at 12:03 am
              आप जैसे लाख कोशिश करलें सूरज पर थूकने की कोशिश करनेवालों के मुहं पर ही थूक वापस गिरता है
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              1. Load More Comments