January 24, 2017

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सर्जिकल स्ट्राइक: सामने आई और डिटेल, 12-12 की टुकड़ी बनाकर PoK में दाखिल हुए थे सौ कमांडो

इस आॅपरेशन को अंजाम देने के लिए स्पेशल फोर्सेज के दो यूनिट्स, उधमपुर स्थित 9 पैरा कमांडोज और 4 पैरा कमांडोज को चुना गया।

इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर की प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Photo: Reuters)

भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकवादियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के दावों को पुख्ता करने के लिए कुछ और साक्ष्य सामने आए हैं। इंडिया टूडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक उसे इंटेलिजेंस सूत्रों ने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में इंपुट उपलब्ध कराया है। जिसमें यह बताया गया है कि भारतीय सेना के जवानों ने कैसे इस आॅपरेशन को अंजाम दिया।

सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी कुछ यूं है, ‘प्रधानमंत्री की तरफ से अप्रूवल मिलने के बाद डीजीएमओ ने सेना के उत्तरी कमान के स्पेशल फोर्सेज को एक्टिव होने का निर्देश दिया। इस आॅपरेशन को अंजाम देने के लिए स्पेशल फोर्सेज के दो यूनिट्स, उधमपुर स्थित 9 पैरा कमांडोज और 4 पैरा कमांडोज को चुना गया। इन दोनों ही यूनिट्स के कमांडर्स को अपने सबसे बेहतरीन ‘असॉल्ट ट्रूप्स’ को इस गुप्त आॅपरेशन के लिए तैयार करने के लिए कहा गया। इन ‘असॉल्ट ट्रूप्स’ को नियंत्रण रेखा के पास उरी, पूंछ और भीमभेर सेक्टर की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ कोआॅर्डिनेट करना था।

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इस सर्जिकल स्ट्राइक के लिए स्पेशल फोर्सेज की चार ‘असॉल्ट टीम’ बनाया गया, जिसमें कुल 25 जवान शामिल थे। इनमें से तीन टीमों को हमला करना था और एक पैरा ट्रूपर्स की टीम थी जिनको बड़े हथियार चलाने थे। इस आॅपरेशन में शामिल टीमों के पास आरपीओ7 फ्लेम थ्रोअर्स, पीके मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर्स जैसे हथियार थे। आॅपरेशन शुरू होने के बाद इन चार टीमों में शामिल जवान 12-12 की आठ टीमों में बंट गए। फिर अंधेरे में केल, टुटमरी गली, नंगी टेकरी और बालनोई चौकियों से स्पेशल फोर्सेज के ये जवान पाक अधिकृत कश्मीर में दाखिल हुए।

इन जवानों को आर्टिलरी यूनिट की ओर से कवर फायर के जरिए पीओके में दाखिल हाने में मदद दी गई। आधी रात के बाद स्पेशल फोर्स के जवानों ने अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ना शुरू किया। टीम में शामिल कमांडोज ने आसानी से पहचान में न आने के लिए जंगल कैमफ्लाश़ पहने हुए थे। कमांडोज नाइट विजन कैमरा, रात में देखने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण और इजरायली टेवर राइफल्स से लैस थे। कुछ ही देर में भारतीय सेना के ये कमांडोज अपने लक्ष्य के पास थे और हर टीम ने आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स पर एक साथ धावा बोला। करीब चार घंटे तक चले इस आॅपरेशन के बाद कमांडोज बिना किसी नुकसान के भारतीय सीमा में वापस दाखिल हो गए।

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First Published on October 6, 2016 3:59 pm

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