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कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी का अध्यादेश मंजूर

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने निजी कंपनियों को कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी के लिए अध्यादेश को मंगलवार को अपनी मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही राष्ट्रपति से इसकी सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने दिए एक फैसले में 1993 के बाद आबंटित 214 कोयला खानों के आबंटन रद्द कर दिए […]
Coal Block Auction: इन ब्लॉकों के लिये जेएसपीएल तथा बाल्को सर्वोच्च बोलीदाता के रूप में उभरी थीं।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने निजी कंपनियों को कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी के लिए अध्यादेश को मंगलवार को अपनी मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही राष्ट्रपति से इसकी सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने दिए एक फैसले में 1993 के बाद आबंटित 214 कोयला खानों के आबंटन रद्द कर दिए थे। अदालत के इस निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर सरकार ने अध्यादेश लाने का कदम उठाया है।

 

सरकार के इस कदम को कोयला क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें बिजली, इस्पात जैसे कोयले की खपत वाली निजी कंपनियों को अपने इस्तेमाल के वास्ते कोयला उत्खनन के लिए कोयला ब्लाकों के लिए नीलामी में बोली लगाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा इसमें केंद्र और राज्य सरकार के उपक्रमों को कोयला खानों का सीधे खान आबंटन का प्रावधान होगा। राष्ट्रपति के पे्रस सचिव वेणु राजामणि के मुताबिक, राष्ट्रपति ने अध्यादेश पर मंगलवार को हस्ताक्षर कर दिए।

 

अध्यादेश जारी होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के एनटीपीसी और राज्य विद्युत बोर्डों जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कोयला खानों का सीधे आबंटन किया जाएगा। सरकार ने कहा है कि वह सीमेंट, इस्पात और बिजली क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों के लिए ई-नीलामी में काफी संख्या में कोयला खानों को रखेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार शाम मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा था कि ई-नीलामी पूरी तरह से पारदर्शी होगी और इसे तीन से चार माह में पूरा कर लिया जाएगा। इससे मिलने वाली पूरी राशि उस राज्य सरकार को जाएगी जहां कोयला खान स्थित होगी।
झारखंड, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ राज्यों को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश को भी फायदा होगा। जेटली ने कहा कि अदालत द्वारा जिन कंपनियों को दोषी करार दिया गया है, उन्हें छोड़कर अन्य सभी कंपनियों को नीलामी में भाग लेने की अनुमति होगी और किसी को भी पहले इनकार का कोई अधिकार नहीं होगा। बोली लगाने वाली कंपनियां ई-नीलामी की उल्टी बोली प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगी।

 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले चयन समिति प्रणाली के जरिए आबंटित कोयला खानों के तौर-तरीकों को लेकर सवाल उठे हैं। नियंत्रक व महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में इन खानों के आबंटन में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया और इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया गया था। मामला अदालत में पहुंच गया और उसके बाद शीर्ष अदालत ने पिछले महीने फैसला सुनाते हुए 1993 के बाद आबंटित 218 में से 214 खानों का आबंटन रद्द कर दिया।

 

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