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Elections 2016 …तो इसलिए तमिलनाडु में टूटा 30 साल का रिकॉर्ड और लगातार दूसरी बार सत्‍ता में आईं जयललिता

जिन लोगों को यकीन था कि AIADMK की वापसी होगी, वो गांवों में रहते हैं। आॅटो चलाने वाले और चाय बनाने वाले इन लोगों को Twitter, Whatsapp जैसे सोशल मीडिया की कोई समझ नहीं हैंं।
MGR के बाद पहली बार दोहराया गया कारनामा, लगातार दूसरी बार सत्ता में आई जयललिता

राज्य में सत्ता—विरोधी लहर के बावजूद, तमिनलाडु के मतदाताओं ने सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए वोट नहीं दिया, जैसा कि पिछले चुनावों में होता रहा है। अब जब ये तय हो चुका है कि एआईएडीएमके जीत रही है, तमिलनाडु चुनावों में कई बड़े नाम धराशारी हो रहे हैं। चाहे वो डीएमके के नेता एमके स्टालिन का नौ महीने लम्बा चुनाव प्रचार हो, या कैप्टन विजयकांत की अगुवाई में बना थर्ड फ्रंट पीडब्ल्यूएफ। चुनाव के दौरान ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल सर्वे, न्यूज रूम की बहसों और राजनैतिक विश्लेषकों ने डीएमके की जीत की भविष्यवाणी की थी। इन चुनावों में एक बड़ा फैक्टर ये भी रहा कि तमिलनाडु अभी भी (2006-2011) के बीच डीएमके की भ्रष्ट सरकार को भुला नहीं सका है।

2011 में डीएमके के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जयललिता सरकार की ओर से जमीन हड़पने के 62,000 मामले दर्ज किए गए थे। एमके स्टालिन की साफ छवि के बावजूद लोगों ने देखा कि टूजी घोटाले में आरोपी ए राजा और दयानिधि मारन अभी भी राजनैतिक रैलियों में एम करुणानिधि के साथ बैठ रहे हैं। पूरे राज्य में नौ महीनों तक चले स्टालिन की यात्रा असफल साबित हुई क्योंकि लोगों को लगा कि उनके पिता सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसका ये मतलब नहीं कि लोगों ने एआईडीएमके को क्लीन चिट दे दी। जयललिता के सभी बड़े मंत्री वोटों की गिनती के आखिरी चरण में जूझ रहे हैं। आधे से ज्यादा मंत्री अपनी—अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं। इनमें उच्च शिक्षा मंत्री पी पालानीअप्पन और उर्जा मंत्री नाथम विश्वनाथन शामिल हैं।

जयललिता के सरकार चलाने का अंदाज और नीतियां भले ही विशेषज्ञों के लिहाज से ठीक नहीं हो, लेकिन आम आदमी को मुफ्त में मिलने वाले तोहफे और पावर सेक्टर में बेहतरी ने रिझा लिया। लॉ एंड आॅर्डर और पावर सेक्टर को डीएमके सरकार ने बिलकुल नजरअंदाज कर दिया था।

जयललिता लोगों पर ज्यादा बोझ डाले बिना ही सिस्टम को दुरुस्त करने में सफल रही। सरकार की ओर से चलाए जा रहे कई कार्यक्रमों के तहत उन्होंने लोगों को मुफ्त में उनकी जरूरत का सामान मुहैया कराया। लोगों को पिछले पांच सालों में कई तोहफे मिले। हर बीपीएल परिवार को चार बकरी, एक गाय, मिक्सर ग्रांइडर, पंखे दिए गए। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे को फ्री यूनिफॉर्म, स्कूल, बैग्स, कॉपियां—किताबें मुहैया कराई गईं। 11 और 12 में पढ़ने वालों को साइकिल और लैपटॉप दिए गए। ऐसे राज्य में जहां आधे से ज्यादा आबादी महिलाओं की है, 6 लाख महिलाओं को चार ग्राम सोना और शादी के लिए 50 हजार रुपए की मदद दी गई।

एक डीएमके नेता के मुताबिक, 21,628,807 महिलाओं और उनके परिवार ने जरूर अम्मा के लिए वोट किया होगा। जयललिता ने लोगों ने बीच में हर महीने 20 किलो चावल बंटवाए। मुफ्त में सैनिटरी नैपकिन, ब्रेस्ट फीडिंग शेल्टर और अम्मा बेबी केयर किट्स बांटी गईं। जो लोग अम्मा के मॉडल पर हंस रहे थे वो शायद ये भूल गए कि एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाला लड़का जिसे अम्मा का लैपटॉप मिला है, वो बिना स्टिकर हटाए क्लास में जाता है।

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