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करदाताओं का धन धार्मिक ढांचों की मरम्मत के लिए नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने सांप्रदायिक दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मंदिर और मस्जिद सहित सभी धर्मस्थलों को नष्ट हुए मकानों के समान ही 50000 रुपए तक का अनुदान देने की राज्य सरकार की योजना स्वीकार कर ली।
Author नई दिल्ली | August 30, 2017 03:03 am
अयोध्या का एक राम मंदिर (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में क्षतिग्रस्त हुए धर्मस्थलों के जीर्णोद्धार के लिए मुआवजा अदा करने का राज्य सरकार को निर्देश देने वाला हाई कोर्ट का 2012 का आदेश मंगलवार को रद्द कर दिया। अदालत ने सांप्रदायिक दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मंदिर और मस्जिद सहित सभी धर्मस्थलों को नष्ट हुए मकानों के समान ही 50000 रुपए तक का अनुदान देने की राज्य सरकार की योजना स्वीकार कर ली। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत के पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 27 पर शीर्ष अदालत के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि कर दाताओं का धन धार्मिक ढांचों की मरम्मत के लिए नहीं दिया जा सकता। पीठ ने कहा, ‘प्रफुल्ल गोरडिया और आर्कबिशप राफेल चीनथ एस वी डी मामलों में न्यायालय के पहले के फैसलों में दिए गए निर्देशों के अनुरूप बनी योजना की सराहना करनी होगी। पहले मामले में दो जजों के पीठ ने कहा था कि अनुच्छेद 27 धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के बारे में है और यदि करों के रूप में जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा किसी एक धर्म को बढ़ावा देने या उसकी देखभाल में इस्तेमाल करना इस अनुच्छेद का उल्लंघन होगा। गुजरात सरकार ने अपनी योजना में क्षतिग्रस्त धार्मिक ढांचों को दंगों में क्षतिग्रस्त मकानों की तरह ही मरम्म्त के लिए 50000 रूपए तक की अनुग्रह सहायता देने का प्रस्ताव है, बशर्ते मंदिर या  मस्जिदों को अनधिकृत नहीं होना चाहिए। इस नीति में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मार्ग या किसी भी अनधिकृत स्थान पर स्थित धार्मिक स्थलों को इस तरह की अनुग्रह सहायता राशि नहीं दी जाएगी और इस तरह के किसी भी नुकसान के लिए पहले से प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।

इस योजना में यह भी कहा गया है कि इस तरह की अनुग्रह राशि के लिए दावा करने वाले व्यक्ति को जिले के कलक्टर को ऐसे धार्मिक स्थल के स्वामित्व या प्रशासनिक अधिकारों के बारे में संतुष्ट करना होगा और जिला कलक्टर का फैसला अंतिम होगा।सरकार की इस योजना को मंजूरी देते हुए पीठ ने कहा कि हमने पाया है कि सरकार ने अनुग्रह राशि की सहायता के लिए अधिकतम सीमा निर्धारित की है और इसका अधिकार संबंधित जिले के कलक्टर को दिया गया है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए अपने 49 पेज के फैसले में दावेदारों से कहा कि वे चार हफ्ते के भीतर प्राधिकारियों से संपर्क करें। साथ ही न्यायालय ने प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे दावे मिलने के तीन महीने के भीतर वे इन पर फैसला करें। अदालत ने अनुच्छेद 27 का जिक्र किया, जो कहता है कि किसी भी व्यक्ति को किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देने के लिए कोई कर देने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा और सरकार ऐसे कार्य के लिए करदाताओं द्वारा दी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा मंजूर नहीं कर सकती है। गुजरात हाई कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन इस्लामिक रिलीफ कमेटी आॅफ गुजरात की जनहित याचिका पर राज्य सरकार को पूजा स्थलों सहित उन सभी धार्मिक स्थलों के प्रभारी व्यक्तियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया था जो 2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हो गये थे ताकि उनका जीर्णोद्धार किया जा सके।

गुजरात हाई कोर्ट का आदेश रद्द किया सुप्रीम कोर्ट ने
गुजरात हाई कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार को गोधरा दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण व मरम्मत के लिए पैसों का भुगतान करने को कहा था

 

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