ताज़ा खबर
 

अब तमिलनाडु और आंध्र सरकार में ‘मुठभेड़’

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में मंगलवार को लाल चंदन की तस्करी के आरोपों में 20 लोगों, जिनमें अधिकतर तमिल थे के मारे जाने के विरोध में बुधवार को तमिलनाडु के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और कार्रवाई की […]
Author April 9, 2015 14:08 pm
चित्तूर में हुए मुठभेड़ के खिलाफ बुधवार को चेन्नई में प्रदर्शन करते तमिलार काची के कार्यकर्ता।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में मंगलवार को लाल चंदन की तस्करी के आरोपों में 20 लोगों, जिनमें अधिकतर तमिल थे के मारे जाने के विरोध में बुधवार को तमिलनाडु के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश सरकार ने चित्तूर जिले में लाल चंदन तस्करों पर पुलिस गोलीबारी को बुधवार को सही ठहराते हुए कहा कि यह आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष केजी बालकृष्णन ने दिल्ली में कहा कि आयोग इस बात का पता लगाएगा कि मुठभेड़ सही थी या फर्जी थी। घटना पर आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किए गए हैं।

तमिलनाडु सरकार ने पुलिस कार्रवाई में मंगलवार को मारे गए श्रमिकों के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की। यहां एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को मारे गए लोगों में से प्रत्येक के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से तीन-तीन लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मारे गए लोगों के शव लाने के लिए तमिलनाडु राजस्व और पुलिस अधिकारियों के एक दल को आंध्र प्रदेश के तिरूपति भेजा गया है।

इस बीच तिरूपति में आंध्र प्रदेश के राजस्व अधिकारियों ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने इस बात के पूरे इंतजाम किए हैं कि शव जल्द से जल्द परिजनों को सौंपे जाएं। सरकार ने कहा कि तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग के शव वाहनों को भी इस काम के लिए भेजा गया है। आंध्र प्रदेश पुलिस की कथित लाल चंदन तस्करों से मुठभेड़ का असर बुधवार को दूसरे दिन भी
राज्य में दिखाई दिया। मुठभेड़ में 20 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकतर तमिलनाडु के थे।

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन निगमों ने आंध्र प्रदेश को जाने वाली और वहां से आने वाली बस सेवाओं को निलंबित कर दिया है। पथराव की घटनाओं के बाद बस स्टेशनों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। राज्यभर में बुधवार को प्रदर्शन जारी रहे। पीएमके के अध्यक्ष डाक्टर एस रामदॉस ने आरोप लगाया कि यह मुठभेड़ सुनियोजित थी और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा-चूंकि यह मुठभेड़ सुनियोजित थी, इसलिए आंध्र प्रदेश द्वारा जांच कराना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से जांच करानी चाहिए। रामदॉस ने कहा कि इस विषय को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में लाया जाना चाहिए और मृतकों के परिजन को न्याय मिलना चाहिए।

वहीं हैदराबाद में अधिकारियों ने कहा कि फरार तस्करों को पकड़ने के लिए बुधवार को आंध्र प्रदेश की शेषाचलम पहाड़ियों में धरपकड़ अभियान जारी रहा। पुलिस ने कहा कि चित्तूर में मंगलवार रात से 14 लाल चंदन तस्करों को पकड़ा गया है और 3.5 टन चंदन की लकड़ी और पांच वाहनों को जब्त किया गया है।

इस बीच नाम तमिलार काची जैसे संगठनों ने यहां आंध्र बैंक और इस राज्य से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों के सामने प्रदर्शन किया। सरकारी वेल्लूर लॉ कॉलेज के विद्यार्थियों ने वेल्लूर-चित्तूर मार्ग पर प्रदर्शन किया। तिरूनेलवेली और मायिलादुतरई समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में वकीलों ने भी घटना पर रोष जताया। तमिल मनीला कांग्रेस के अध्यक्ष जीके वासन ने कहा कि लोगों को मुठभेड़ में लोगों के मारे जाने की घटना में संदेह लगता है और जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।

दूसरी ओर आंध्र प्रदेश सरकार ने चित्तूर जिले में लाल चंदन तस्करों पर पुलिस गोलीबारी को बुधवार को सही ठहराते हुए कहा कि यह आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था। इस गोलीबारी में 20 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर तमिलनाडु के थे। तमिलनाडु में इस घटना को लेकर मचे हंगामे के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को घटना और इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी। सरकार के सूचना सलाहकार पराकाला प्रभाकर ने बताया-यह ऐसी घटना थी जहां पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई क्योंकि वे संख्या में बेहद कम थे।

लाल चंदन के तस्करों के खिलाफ बताई जा रही पुलिस की इस कार्रवाई में 20 लोग मारे गए थे। पड़ोसी जिले तमिलनाडु में सरकार और राजनीतिक दलों ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है, जिनका दावा है कि कई पीड़ित उनके राज्य के मजदूर थे। प्रभाकर ने बताया कि दस से 15 पुलिसकर्मियों के छोटे से गश्ती दल को 200 से अधिक तस्करों ने घेर लिया जो ‘खतरनाक ढंग से’ उनकी ओर बढ़ रहे थे। पूर्व में पुलिस अधिकारियों को कुल्हाड़ियों से काटकर मौत के घाट उतार दिया गया था। इसलिए आत्मरक्षा में पुलिस को गोली चलानी पड़ी। पिछले कुछ सालों में खोजबीन अभियानों के दौरान राज्य ने ड्यूटी कर रहे छह पुलिस अधिकारियों को खोया है, जिन्हें लाल चंदन तस्करों ने मार डाला था।

प्रभाकर ने कहा कि एक हजार से अधिक लाल चंदन तस्कर जेल में हैं जिसका मतलब है कि जहां भी संभव होता है हम उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल देते हैं। उनके खिलाफ 4500 मामले दर्ज किए गए हैं और छह हजार वाहनों को जब्त किया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.