April 28, 2017

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर बोले- न्यायपालिका पर अंदर और बाहर से है आक्रामकता का खतरा, एक सुर में इसका विरोध करें

न्यायपालिका और सरकार के बीच खींचतान के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया ‘‘हाईजैक’’ नहीं की जा सकती।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर

न्यायपालिका और सरकार के बीच खींचतान के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने गुरुवार (1 दिसंबर) को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया ‘‘हाईजैक’’ नहीं की जा सकती और न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए क्योंकि ‘‘निरंकुश शासन’’ के दौरान उसकी अपनी एक भूमिका होती है। ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका न्यायाधीशों के चयन में कार्यपालिका पर निर्भर नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रशासन के मामलों में न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए जिसमें अदालत के भीतर न्यायाधीशों को मामलों को सौंपना शामिल है, जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं होगी, संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारी ‘‘बेमतलब’’ होंगे। प्रधान न्यायाधीश ठाकुर ने यह टिप्पणी ‘स्वतंत्र न्यायपालिका का गढ़’ विषयक 37वें भीमसेन सचर स्मृति व्याख्यान के दौरान कही। ठाकुर ने न्यायतंत्र से एकजुट होकर न्यापालिका की स्वतंत्रता को बचाए रखने के लिए एकजुट रहने के लिए कहा। ठाकुर ने कहा कि न्यायपालिका पर अंदर और बाहर से आक्रामकता का खतरा है और न्यायतंत्र को उसका एक सुर में विरोध करना चाहिए।

यह टिप्पणी उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। देश के दोनों ही अंग एक-दूसरे पर न्यायाधीशों के रिक्त पद बढ़ाने के आरोप लगाने के साथ ही एक-दूसरे को ‘लक्ष्मणरेखा’ में रहने के लिए कह रहे हैं।

गौरतलब है कि 26 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने उच्च न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में न्यायाधीशों की कमी का मामला फिर से उठाया था। ठाकुर ने कहा था, ‘उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के पांच सौ पद रिक्त हैं। ये पद आज कार्यशील होने चाहिए थे परंतु ऐसा नहीं है। इस समय भारत में अदालत के अनेक कक्ष खाली हैं और इनके लिये न्यायाधीश उपलब्ध नहीं है। बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित है और उम्मीद है सरकार इस संकट को खत्म करने के लिये इसमें हस्तक्षेप करेगी।’ हालांकि, विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने उसपर असहमति व्यक्त की थी। रविशंकर ने कहा था, ‘हम ससम्मान प्रधान न्यायाधीश से असहमति व्यक्त करते हैं। इस साल हमने 120 नियुक्तियां की हैं जो 2013 में 121 नियुक्तियों के बाद सबसे अधिक है। साल 1990 से ही सिर्फ 80 न्यायाधीशों की नियुक्तियां होती रही हैं। अधीनस्थ न्यायपालिका में पांच हजार रिक्तियां हैं जिसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह ऐसा मामला है जिसपर सिर्फ न्यायपालिका को ही ध्यान देना है।’

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First Published on December 2, 2016 9:08 am

  1. D
    Dev Verma
    Dec 2, 2016 at 3:20 pm
    जय ठाकुर भी माइक पकड़ कर रोज सास बहु की तरह नाटक कर रहा है और जितना टाइम जय इधर उधर की बातों में बर्बाद कर रहा है अगर बोही टाइम काम करे तो शायद देश का भल्ला होगा. थिस मन इस नोथेर पैन इन थे अस्स एवरीडे वे और थे इतर लिखे केजरीवाल,ममता,मायावती,मुलायम,सोनिया और राहुल की तरह करना कुश नहीं बस ड्रामा.
    Reply
    1. P
      Pradeep Kumar
      Dec 2, 2016 at 2:21 pm
      jajo ki kami k bare me supreme court bar bar agah kar raha hai.Lek in ye kisi se chhupa nahi hai k cologium system me kis tarah relation walo ko judge bana diya jata hai.Isliye judges k appointment ki process transparent honi chahiye.Court aur government ko apne- apne adhikar chhetra me rahkar kam karna chahiye.
      Reply
      1. S
        sanjay
        Dec 2, 2016 at 5:40 am
        न्याय पालिका सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ अपनी राय रख सकती है और उसे sacलेकिन उसने ७० सालो तक इस पर कोई बड़ा कदम नहीं उठाया,जब वर्तमान सरकार ईमानदारी से भरस्टाचार पर कड़े कदम उठा रही है तो उस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा!यदि देश की न्यायपालिका अपनी अदालते ४ घंटे अतिरिक्त गरीबो के न्याय के लिए लगाए,और राष्ट्र निर्मांण में सरकार का योग करे!हर जगह स्टाफ की कमी है लेकिन उस समस्या का हल अतिरिक्त कार्य करके किया जा सकता है!देश की माली हालात को जजो को समझना होगा!
        Reply
        1. S
          Sanjay Gupta
          Dec 2, 2016 at 10:07 am
          रिपीटिंग ओन कमैंट्स एंड नॉट रेस्पांडिंग तो ओठेर्स' कमैंट्स इस नॉट हेल्थी प्रैक्टिस. बोथ साइड्स ओघट तो रेस्पोंद तो एच ओठेर्स कंटेन्शन्स.
          Reply

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