December 03, 2016

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22 साल पहले स्वीडिश कपल ने लिया था गोद, तब से ढूंढ़ रही थी अपने मां-बाप, अब हुआ सपना पूरा

ज्योति और उसकी छोटी बहन गायत्री को एक स्वीडिश परिवार ने 1994 में बेंगलुरु के एक अनाथालय से गोद लिया था।

Author बेगलुरु | October 30, 2016 16:23 pm
बेंगलुरु में अपने पिता दशरथ और भाई मारुति के साथ ज्योति। (एक्सप्रेस फोटो)

स्वीडिश गांव में पली-बढ़ी ज्योति स्वान का सपना एक अनजाने इंसान के घोड़े पर सवारी की तरह था जिसे उसने कई बार देखा। आखिरकार 22 साल के बाद 24 अक्टूबर को उसका यह सपना सच हुआ जब ज्योति अपने बायोलॉजिकल पिता दशरथ से मिली, जोकि बेंगलुरु शहर निगम में एक स्वास्थ्य कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। ज्योति, जोकि अपने माता-पिता की तलाश में दूसरी बार भारत दौरे पर आई थी, ने कहा उसने अपने पिता दशरथ को देखते ही तुरंत पहचान लिया। 27 वर्षीय ज्योति के चेहरे पर मुस्कार बिखरी थी, हो भी क्यों न, करीब 20 सालों के दर्द का अंत जो हुआ था। ज्योति और उसकी छोटी बहन गायत्री को एक स्वीडिश परिवार ने 1994 में बेंगलुरु के एक अनाथालय से गोद लिया था, जब वे (ज्योति-गायत्री) क्रमशः 5 और 4 साल के थे। ज्योति उस पल को याद करते हुए ग़मगीन हो जाती है जब उन दोनों को एक महिला ने अनाथालय में छोड़ दिया था। ज्योति की धुंधली यादों में शायद वह महिला उसकी मां थी। स्वीडन के अपने गांव में ज्योति कहती है, ‘यहां वह और गायत्री ही सिर्फ सांवले बच्चे हैं। उन्हें इस बात की जानकारी थी वे अलग हैं और वे हमेशा खुद को दूसरों से अलग ही महसूस करते थे।’ ज्योति कहती है कि उसके इसी अहसास ने उसे इस बात के लिए प्रेरित किया वह अपना वास्तविक वजूद ढूंढे।

2013 में, पहली बार ज्योति और उसकी छोटी बहन गायत्री अपने स्वीडिश माता-पिता के साथ बेंगलुरु के आश्रय अनाथालय पहुंचे जहां से उन्हें गोद लिया गया था। काफी निवेदन के बाद अनाथालय ने उनके (ज्योति और गायत्री) बायोलॉजिकल मां का नाम कमला बाई बताया और कहा उसने रिकॉर्ड कराया था कि वह सिंगल मदर है। ज्योति जो कि एक लेखक भी है, ने कहा, ‘अनाथालय ने मुझे यह भी बताया कि 1996 में हमारी मां दोबारा हमें देखने के लिए आई थी। आश्रय (अनाथालय) ने इसके अलावा हमारी कोई मदद नहीं की।’ 2016 में अक्टूबर महीने के तीसरे सप्ताह में, उसने (ज्योति ने) पुणे के बाल अधिकार ग़ैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) सखी और इसके संस्थापक अंजलि पवार से संपर्क किया। जल्द ही वह (अंजलि पवार) अपने फिल्म क्रू के साथ बेंगलुरु पहुंची ताकि वह ज्योति की इस खोज को एक दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) के तौर पर ढाल सके।

अपने माता-पिता को खोजने के पक्के इरादे को देखते हुए इस बार अनाथालय ने ज्योति को गोद लेने से जुड़े सारे दस्तावेज (पेपर) मुहैया कराए। पेपर के मुताबिक कमला बाई का एक पति था जिसका नाम रिकॉर्ड में दशरथ दर्ज है और वह (कमला बाई) बेंगलुरु शहर के बाहरी इलाके की रहने वाली थी। अनाथालय द्वारा मुहैया कराए गए फाइल के मुताबिक कमला बाई ने जिस वक्त ज्योति और गायत्री को अनाथालय में छोड़ा, वह बेंगलुरु के चमरजपेट में रहती थी। ज्योति ने आगे कहा, ‘स्थानीय लोगों ने कहा कि वह (कमला बाई) मर गई होगी। उनलोगों ने कहा, कोई दशरथ नहीं है। इसने मुझे अहसास कराया कि मैं एक प्रेतात्मा का पीछा कर रही थी।’ अंजलि पवार ने सुझाया कि वे लोग मारुलुकट्टे गांव जाए। जल्द ही वहीं की एक औरत उन्हें (ज्योति-गायत्री) बताया कि उनकी एक स्कूल की दोस्त थी कमला बाई, जिसके पिता की मौत अस्थमा की वजह से हुई थी। ज्योति को इसी घटनाक्रम से जुड़ा हुआ कुछ याद आया। गांववालों ने उन्हें (ज्योति-गायत्री) दूसरे जगह जाने की सलाह दी, जहां वे अपने माता-पिता को ढूंढने की कोशिश कर सकते थे। 23 अक्टूबर की रात, ज्योति मारुलुकट्टे गांव के नजदीक सुसिवेगुंटे पहुंची। ‘यहां हमें हमारे पिता का बड़ा बेटा मिला। हमारे बिना कुछ कहे ही उसने कहा कि कमला बाई और दशरथ की दो बेटियां थीं, ज्योति और गायत्री।’ अंकल ने दशरथ को बेंगलुरु बुलाया और उसने ज्योति को उसके अगले दिन आने को कहा। 24 अक्टूबर को ज्योति बेंगलुरु में कुमारस्वामी लेआउट के फर्स्ट फ्लोर पर अपने माता-पिता के खोज की यात्रा के आखिरी कदम पर थी। एक-दूसरे से मुलाकात के दौरान ज्योति और उसके पिता दशरथ टूट गए। दशरथ ने ज्योति से कहा कि कमला बाई ने उसके (ज्योति) और गायत्री के साथ घर छोड़ दिया था जिसके बाद वह कभी नहीं लौटी।

ज्योति की मुलाकात मारुति से भी हुई, जिसके बारे वह नहीं जानती थी, जो दशरथ के साथ रहता था। दशरथ को दूसरी पत्नी से एक और बेटी भी थी। ज्योति और दशरथ के बीच रिश्तों की सत्यता जांचने के लिए उनका डीएनए सैंपल ले लिया गया है। लेकिन ज्योति को इस बात में ज़रा भी संदेह नहीं है कि दशरथ ही उनके पिता हैं। ‘जिस तरह से वह बात कर रही है उसके चहरे से यह साफ ज़ाहिर भी होता है।’ अंजलि पवार ने कहा, ‘जब उसके बच्चे बहुत छोटे थे तो दशरथ प्लाइड (एक तरह का वाहन) टोंगा का इस्तेमाल कर उन्हें (ज्योति और गायत्री) घुमाने के लिए ले जाया करता था। यही यादें संभवतः ज्योति के सपने में आते रहे होंगे।’  ज्योति को विश्वास है कि अपने पिता दशरथ को पाने के बाद उसे शांति भी मिल जाएगी। भेदभाव को झेलने पर उसने (ज्योति ने) कहा, विदेशों में गोद लिया जाना बच्चों के लिए हमेशा आसान नहीं होता। स्वीडिश माता-पिता ने कहा, हमने अपने बच्चों को सबकुछ दिया, उसने (ज्योति ने) कहा, ‘वे भूल गए थे कि एक देश जहां से हम हैं वहां हमारा एक परिवार है। आप उसे मिटा नहीं सकते।’ मारुति जिसकी एक बेटी है ने, ज्योति से कहा कि लगभग 10 सालों तक वह कमला बाई से संपर्क में थी और बाद में लोगों ने बताया कि वह मर गई। पवार ने बताया, ‘फिर भी ज्योति को इस बात पर यकीन नहीं है। हम लोग अभी भी कमला बाई को ढूंढ़ रहे है। मैं तब तक विश्वास नहीं करूंगी, जब तक डेथ सर्टिफिकेट ना देख लूं।’

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First Published on October 30, 2016 4:16 pm

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