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संविधान पीठ ने दो जजों के फैसले को पलटा

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के संविधान पीठ ने जजों के नाम पर कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले में बड़ी पीठ गठित करने के दो जजों के पीठ के आदेश को शुक्रवार को पलट दिया।
Author नई दिल्ली | November 11, 2017 11:19 am
उच्चतम न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के संविधान पीठ ने जजों के नाम पर कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले में बड़ी पीठ गठित करने के दो जजों के पीठ के आदेश को शुक्रवार को पलट दिया। पीठ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश अदालत के मुखिया हैं और मामलों को आबंटित करने का एकमात्र विशेषाधिकार उनके पास है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले पांच जजों के संविधान पीठ ने कहा कि न तो दो जजों और न ही तीन जजों का कोई पीठ मुख्य न्यायाधीश को विशेष पीठ गठित करने का निर्देश दे सकता है।

पीठ में न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय भी शामिल थे। संविधान पीठ ने न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर के पीठ के गुरुवार के आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें उन्होंने मामले पर सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के पांच सर्वाधिक वरिष्ठ जजों का संविधान पीठ गठित करने का निर्देश दिया था। बड़ी पीठ ने दो जजों के पीठ के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि कोई भी पीठ तब तक किसी मामले पर सुनवाई नहीं कर सकता जब तक कि प्रधान न्यायाधीश जो अदालत के मुखिया हैं, उन्होंने उसे मामला आबंटित नहीं किया हो।

प्रधान न्यायाधीश के अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि सीजेआइ द्वारा मामले का आबंटन कानून का सिद्धांत, न्यायिक अनुशासन और अदालत का शिष्टाचार है। सीजेआइ ने मीडिया के मामले की रिपोर्टिंग करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा- मैं वाकई अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता में विश्वास करता हूं। उन्होंने वकील प्रशांत भूषण और कामिनी जायसवाल से कहा कि उन्होंने मामले में उनके (न्यायमूर्ति मिश्रा) खिलाफ निराधार आरोप लगाए हैं। सीबीआइ ने इस सिलसिले में भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया है। भूषण एनजीओ कैंपेन फॉर जूडिशियल एकाउंटेबिलिटी की तरफ से उपस्थित हुए थे।
पीठ ने यह भी साफ कर दिया कि मामले को दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए उचित पीठ के समक्ष भेजा जाएगा।

भूषण इसके बाद खचाखच भरी अदालत से यह कहते हुए निकल गए कि उन्हें इस मामले में बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे पहले दिन में मामला न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। उसने इसे न्यायमूर्ति चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाले पीठ के शनिवार के आदेश के अनुसार पांच जजों वाले संविधान पीठ के पास भेज दिया।

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  1. M
    manish agrawal
    Nov 11, 2017 at 8:59 am
    न्यायपालिका क्या ऐसे ही नुकताचीनी में अदालतों का कीमती वक़्त बर्बाद करती रहेगी , या फिर कुछ वास्तविक फैंसले भी करेगी ! हिन्दोस्तान का चीफ जस्टिस , सिर्फ प्रशाशनिक matters में ही न्यायपालिका का मुखिया होता है, लेकिन अदालत में उसकी हैसियत , बाकी सुप्रीम कोर्ट जजों के बराबर ही होती है ! अभी अगस्त 2017 में ही तीन तलाक़ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने फैंसला दिया और तीन तलाक़ को खारिज कर दिया, हालांकि, उसी पीठ में शामिल तत्कालीन चीफ जस्टिस जे.एस.खेहर और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने तीन तलाक़ के पक्ष में फैंसला दिया था ! इस नज़ीर से साबित होता है की चीफ जस्टिस की सर्वोच्चता, सिर्फ administrative matters में है, ना की जुडिशल matters में ! इसलिए 2 जजों की बेंच भी , अपने विवेक के अनुसार, निर्देश दे सकती है ! चीफ जस्टिस को ego issue नहीं बनाना चाहिए !
    (2)(0)
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