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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एमएलए पर लगाया 10 लाख जुर्माना, वकील ने की माफी की गुहार तो चीफ जस्टिस ने सुनाया पुराना किस्सा

सुप्रीम कोर्ट ने राजद विधायक रविंद्र सिंह पर कोर्ट का समय जाया करने के चलते 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने राजद विधायक रविंद्र सिंह पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम विधायक की एक गैरजरूरी याचिका दायर करने से नाराज होकर लगाया है। कोर्ट यह जुर्माना लगाकर उन लोगों को चेतावनी देना चाहता है, जो आदतन गैरजरूरी याचिका दायर कर कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करते हैं। विधायक रविंद्र सिंह ने यह याचिका साल 1994 में छपे एक लेख को लेकर दायर की थी। इससे नाराज कोर्ट ने कई बार विधायक को लताड़ा। कोर्ट ने विधायक को लताड़ते हुए कहा कि ‘इस तरह की तुच्छ मुकदमेबाजी से बाहर आइए’। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर इस तरह की याचिकाएं वह स्वीकार ही क्यों करे? इस तरह की व्यर्थ की याचिकाओं में हर रोज कोर्ट का कीमती वक्त जाया होता है और इन याचिकाओं की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हो रही है।

कोर्ट ने आगे कहा, “हम यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि आखिर याचिकाकर्ता ने 1994 में छपे लेख के खिलाफ हाईकोर्ट में 2015 में याचिका क्यों दायर की। फिर 2016 में आए हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दायर की, क्या इनकी याचिका इसलिए महत्वपूर्ण है कि वह एमएलए हैं।” वहीं फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने एक पुराने केस का भी उदाहरण दिया। कोर्ट ने ऐसा ही एक और निर्णय महाराष्ट्र के एक रिटायर्ड टीचर की याचिका पर दिया था। इसमें टीचर पर हल्के स्तर की एक याचिका दायर करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

चीफ जस्टिस जे.एस.खेहर की खंडपीठ ने फैसला सुनाने के बाद काउंसिल को अपने कॉलेज के दिनों का एक किस्सा भी सुनाई। जब कॉलेज डीन ने एक स्टूडेंट पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था, तो स्टूडेंट ने कहा था कि वह बहुत अमीर परिवार से है और डीन इतना छोटा फाइन लगाकर उसकी इंसल्ट न करें। घटना का जिक्र करने के बाद सीजेआई ने काउंसिल से कहा कि ‘आप भी इस तरह की बात कह सकते हैं, आखिर इतना छोटा जुर्माना लगाकर सुप्रीम कोर्ट मेरी बेइज्जती कैसे कर सकता है।’ जस्टिस जे.एस.खेहर, जस्टिस एन.वी. रमणा और जस्टिस डी. वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने विधायक रविंद्र सिंह से कहा, “आप जनप्रतिनिधि हैं, इसका यह मतलब नहीं कि किसी भी तरह की याचिका दायर कर दें।”

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