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सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार से लड़ने की नरेंद्र मोदी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल, कहा- बताइए कब तक काम करने लगेगा लोकपाल

भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि लोकपाल विधेयक लंबे सामाजिक संघर्ष के बाद आया था और मौजूदा सरकार चाहे या न चाहे इसे काम करना चाहिए।
Author November 24, 2016 08:09 am
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार (23 नवंबर) को केंद्र सरकार से पूछा कि अगर वो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहती है और सार्वजनिक जीवन में शुचिता बहाल करना चाहती है तो दो साल से भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाले लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही है। भारत की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वो लोकपाल को ‘बेजान शब्द’ या ‘बेकाम की चीज’ बनकर नहीं रह जाने देगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि लोकपाल विधेयक लंबे सामाजिक संघर्ष के बाद आया था और मौजूदा सरकार चाहे या न चाहे इसे काम करना चाहिए। खंडपीठ ने भारत के एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से लोकपाल नियुक्त किए जाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय बताने के लिए कहा है। अदालत ने रोहतगी से कहा, “क्या सरकार इसे आपद स्थिति नहीं समझती कि 2014 में लोकपाल विधेयक पारित होने के बावजूद आज तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुई है? अगर आप कहते हैं कि सरकार व्यवस्था की सफाई को लेकर बहुत चिंतित है तो फिर पिछले दो साल से आप इस पर अमल क्यों नहीं कर पा रहे हैं? हम लोकपाल जैसी संस्था को बेकार नहीं पड़े रहने देंगे।”

चीफ जस्टिस ठाकुर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूण और जस्टिस एल नागेश्वर राव की इस खंडपीठ ने कहा कि सरकार बहाना बना रही है कि लोक सभा में विपक्ष के नेता न होने के कारण लोकपाल का चयन नहीं हो पा रहा है और इसके लिए कानून में बदलाव (विपक्ष के नेता की जगह सबसे बडी विपक्षी पार्टी के नेता) किए जाने तक इंतजार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने रोहतगी से कहा, “अगर आपका यही तर्क है तो फिर आप अगले ढाई साल तक लोक सभा में विपक्ष का नेता नहीं पाने जा रहे….इसलिए अगर कानून में संशोधन नहीं हुआ है तो क्या ऐसी महत्वपूर्ण संस्था को बेकार पड़े रहने देंगे? हमें ये बात चिंतित कर रही है कि चूंकि लोक सभा में विपक्ष का नेता नहीं है तो आप पूरे लोकपाल उपेक्षित कर देंगे।” लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2013 को साल 2014 में अधिसूचित किया गया था। इस विधेयक के तहत लोकपाल का चयन एक कमेटी करेगी जिसके सदस्य भारत के प्रधानमंत्री, लोक सभा अध्यक्ष, लोक सभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नियुक्त सुप्रीम कोर्ट का कोई जज और एक प्रसिद्ध न्यायवादी होंगे।

जनहित याचिका दायर करने वालों की तरफ से अदालत में पेश हुए सीनियर एडवोकेट शांति भूषण और एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, सीबीआई चीफ और मुख्य सूचना आयुक्त इत्यादि की नियुक्त से जुड़े कानून में  संशोधन करके लोक सभा में विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता का नाम मान्य कर दिया है। भूषण और शंकरनारायण ने अदालत से कहा कि कोई भी राजनीतिक दल लोकपाल की नियुक्ति नहीं चाहता इसलिए इससे जुड़े कानून में संशोधन नहीं हो पाएगा जिसकी वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई कुंठित होकर रह गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एटार्नी जनरल को लताड़ लगाते हुए कहा कि अगर आप चार दूसरी संस्थाओं के लिए कानून में आसानी से बदलाव कर सकते हैं तो इस विधेयक में संशोधन करने में क्या दिक्कत है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “….हमारे ख्याल में अगर हम इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई आदेश देते हैं तो आपको इसका स्वागत करना चाहिए।”

वहीं एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि कानून बनाना संसद का काम है और वो लोकपाल की नियुक्ति की कोई तय समयसीमा बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर अदालत ने उनसे कहा कि वो सक्षम अधिकारी से इस बारे में निर्देश लेकर अदालत को सात दिसंबर को जवाब दें। आपको बता दें कि समाजसेवी अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक पारित करवाने के लिए अखिल भारतीय आंदोलन किया था जिसके बाद केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस गठबंधन सरकार ने ये विधेयक पारित किया था।

वीडियोः जानिए नोट छापने का फैसला कौन लेता है?

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  1. A
    Ajay Bhagat
    Nov 24, 2016 at 4:03 am
    भ्रष्टाचार खत्म करने का ढोल पीटने वाले मोदी जबाव दें !
    Reply
  2. M
    manoj
    Nov 24, 2016 at 7:03 am
    १० साल से ज्यादा हो गया कोर्ट में पता ही नहीं चला सलमान खान की गाड़ी कौन चला रहा था ? ३० साल में कोर्ट को पता नहीं चला की डेल्ही में ३००० लोगों को किसने मार १९८४ में ? ६० साल में फैसला नहीं कर पाए की अयोध्या में क्या है ? आजाद भारत में घोटाले पर घोटाले होते रहे और देश के न्यायधिस सोते रहे ? अब सरकार काम कर रही है तो ?अब कोर्ट संसद के बदले कानून बनाएगी ? देश के प्रजातंत्र में काल दिवस होगा जब कुछ अपारदर्शी तरीके से चुने हुए लोग देश का कानून बनाएंगे ?
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  3. S
    skverma
    Nov 25, 2016 at 2:51 am
    Jansatt Admin pl chk: Immediately done comments are being labelled as done "about 6 hours ago"
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  4. S
    skverma
    Nov 25, 2016 at 2:47 am
    अच्छा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट इतनी फुर्ती दिखा रहा है, और भी अच्छा हो अगर 60 साल में नहीं निपट पाए अयोध्या, 84 के सिख सामूहिक हत्याकांड जैसे राष्ट्रीय व्यापक प्रभाव के मुद्दों के प्रति और अन्य लंबित माों में भी अपनी व्यग्रता दिखा अपने ट्रैक पर बुलट नहीं तो सुपर फ़ास्ट गति लगा दें.. वैसे ये भी सभी जानते हैं कि केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने ये जो कानून पारित किया उसके अनुसार नेता विपक्ष का लोकपाल नियुक्ति समिति में होना आवश्यक है... आशा है 7 दिसंबर के बाद सुप्रीम कोर्ट नियुक्त कर देगा ..
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  5. V
    Vinay Totla
    Nov 24, 2016 at 8:43 am
    जिसने इतने सालो से गुजरात में लोकपाल नहीं आने दिया, जिसका काम करने का तरीका ही तानाशाही हो उससे ज्यादा उम्मीद भी कैसे की जा सकती है!!!
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  6. I
    Inidan
    Nov 24, 2016 at 6:53 am
    What was this court doing for last 3 or 4 decades.... sleeping
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  7. Load More Comments
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