April 27, 2017

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा केंद्रीय मंत्री का नाम, फिर कहा- भारत सरकार है या कोई पंचायत?

यह एक अनोखा वाकया था जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी कानून अधिकारी ने कैबिनेट मंत्री का नाम लेने को कहा हो।

Author November 24, 2016 20:53 pm
कुमार ने बेंच को बताया कि केंद्रीय संयोजन कमेटी की अगली बैठक 29 नवंबर को बुलाई जाएगी।

लोकपाल की नियुक्‍ति न करने पर एक दिन पहले ही केंद्र सरकार को फटकार लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिर नरेंद्र मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से केंद्रीय मंत्री का नाम बताने को कहा, जो अदालत के मुताबिक, दिव्‍यांगों कल्‍याण की ‘फाइलों पर बैठे’ हुए हैं। इस पर जब सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि सरकार ने दिव्‍यांगों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं, तो चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने नाम पूछना तब तक बंद नहीं किया, जब तक कुमार ने जवाब नहीं दिया। उन्‍होंने कहा, ”मंत्री का नाम थावर चंद गहलोत है।” बेंच ने पूछा कि कया सरकार ‘पंचायत’ की तरक काम कर रही है। गहलोत केंद्रीय सामाजिक न्‍याय और सशक्तिकरण मंत्री है। यह एक अनोखा वाकया था जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी कानून अधिकारी ने कैबिनेट मंत्री का नाम लेने को कहा हो। आमतौर पर, अगर अदालत अपने निर्देशों के क्रियान्‍वयन या किसी विशेष वर्ग के कल्‍याण के लिए बने कानून की कार्यप्रणाली से असंतुष्‍ट होती है, तो यह उससे जुड़े अधिकारियों के नाम मांगती है और उन्‍हें समन करती है।

दिव्‍यांगों को विकास के लिए एकसमान उपलब्‍धता और समान अवसर देने के लिए दायर की गई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार को शुरू हुई थी। सॉलिसिटर जनरल ने वर्तमान सरकार द्वारा उठाए गए कदम गिनाए, जिनमें दिसंबर 2015 में ‘एक्‍सेसिबल इंडिया कैंपेन’ के लॉन्‍च की बात भी शामिल थी। इस अभियान के तहत जुलाई 2018 तक राष्‍ट्रीय राजधानी और राष्‍ट्रीय राजधानियों की कम से कम 50 सरकारी इमारतों को दिव्‍यांगों के लिए ‘पूरी तरह उपभोग’ लायक बनाया जाएगा। इस पर बेंच ने पूछा कि एनडीए सरकार के दो साल के शासनकाल में विकलांग कानून के तहत केंद्रीय संयोजन कमेटी की कोई बैठक क्‍यों नहीं बुलाई गई।

अदालत ने पूछा कि ”संबंधित केंद्रीय मंत्री कौन है?” इस पर कुमार ने कहा कि बैठक इसलिए नहीं हो पाई क्‍योंकि एनडीए सरकार ने 2014 में ‘राइट्स ऑफ पर्संस विद डिसएबिलिटी बिल’ पेश किया था, लेकिन बेंच ने मंत्री का नाम जानने पर जोर दिया। कुमार ने इस पर जोर देते हुए कि आखिरी बैठक 2012 को बुलाई गई थी, कहा कि पिछली सरकार के काल में भी ऐसी काेई बैठक नहीं बुलाई गई। इस पर बेंच ने कहा, ”पिछली सरकार ने नहीं किया, ठीक है मगर आप कहते हैं कि यह सरकार अलग है। फाइलों पर बैठा हुआ माननीय मंत्री कौन है?… बताइए ये कौन मंत्री है जो फाइलों पर बैठा रहता है।”

अदालत ने आगे कहा, ”यह भारत सरकार है या कोई पंचायत? भारत सरकार सोचती है कि वर्तमान कानून को बदलने के लिए एक बिल काफी है। यह मंजूर नहीं है कि पिछले चार साल में कोई बैठक नहीं हुई। ऐसा लगता है कि कानून या भ‍ियान को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया गया। क्‍या सरकार इसी तरह काम करती है?”

कुमार ने बेंच को बताया कि केंद्रीय संयोजन कमेटी की अगली बैठक 29 नवंबर को बुलाई जाएगी। इस पर बेंच ने कमेटी के चीफ कमिश्‍नर को बैठक के मुख्य बिंदु 14 दिसंबर को जमा कराने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के फैसले पर की कड़ी टिप्‍पणी, देखें वीडियो: 

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First Published on November 24, 2016 8:53 pm

  1. A
    Anand
    Nov 24, 2016 at 4:41 pm
    साफ़ लगता है की माननीय न्यायलय पूरी तरह से सर्कार विरोधी है. खास कर मुख्यनायधिस .
    Reply
    1. d
      dr. Subhash
      Nov 25, 2016 at 3:26 pm
      मिनिस्ट्री ऑफ़ सोशल जस्टिस & एम्पावरमेंट & मिनिस्टर थावर गहलोत , मोदी जी . को मिसगाइड कर रहे हैं और विकलांग की स्कीम्स आ डी ई प को लूट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं , विकलांगो को लिम्बस और कैलिपरस फिट करने का काम हाइली टेक्निकल होता है और इस के लिए प & ओ प्रोस्थीस्ट & ऑर्थोटिस्ट होते हैं और बह ४ &१/२ बर्ष की एजुकेशन के बाद बनाये जाते हैं , मगर मिनिस्ट्री सारा फण्ड ३०० ४०० करोड़ को अपने लोगो को और अपनी ऑर्गोनिसतिओं एलिम्को कानपूर को दे कर खा रहे हैं ३३०० - ४००० की व्हील चेयर तीन पहिय
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      1. J
        jkkalla
        Nov 25, 2016 at 8:16 am
        ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी व्यतिगत खुंदक के चलते कानून के विधिसम्मत मापदंडो कि अवहेलना कर रहा है , सुप्रीम कोर्ट के पास BCCI के लिया समय है,क्योंकि लोढा पैनल कोलोजियम कि पैदाइश है और कॉलेजियम से ठाकुर साहब को प्यार है अगर कोर्ट इस प्रकार व्यंग का उपयोग करेगा तो अपनी गरिमा को ही गिरायेगा , मगर क्या करे व्यवस्था बदलना हमेशा मुश्किल होता है चाहें कोर्ट ही क्यों न हो.
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        1. N
          Navin Mange
          Nov 25, 2016 at 2:07 am
          कितने जज हिंदी जानते है और हिन्दुस्तानी की तरह जनता को समजते है क़ानून अंग्रेजो का और आप की जीवन शैली भी अंग्रेजो की सुनवाई के नाम फेसला टालना वकील जेब भरने मी लगे क़ानून काले कोट वालो की जेब में सब पैसो का खेल in ठाकुर का पुस्तेनी संबंध कोंग्रेस से रहा है
          Reply
          1. N
            Nitin Raval
            Nov 24, 2016 at 6:15 pm
            मेरा सुप्रीम कोर्ट से सवाल है - "क्या कोर्ट तुम्हारे बाप की जागीर है सालो, जो जब चाहे तब केस की सुनवाई टाल दी जाती है?" मेरा सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ओफ इन्डिया को यह चैलेंज है कि तुम्हारे बाप की औकात है तो मेरे पर अवमानना का केस करके दिखाये।
            Reply
            1. S
              sk
              Nov 25, 2016 at 4:46 am
              भाई मोदी सरकार को बोलो की वो जजों की नियुकित वाला फाईल जल्‍द से जल्‍द पास कर दे ा ताकि अदालत में पडे् करीब 3 करोड माों को निपटाया जा सके ा कोर्ट में जज ही नहीं हैं तो फैसला सरकार खुद सुनायेगा ा वो सरकार जिसके मंत्रीयों को जनता ने नकार दिया और मोदी नेे उसे ही वित्‍त और शिक्षा मंत्री तक बना दिया ा
              Reply
            2. V
              Vijay S
              Nov 25, 2016 at 12:14 pm
              ऐसा लगने लगा है . की इस देश मैं सरकार कोई है तो वो सरकारी सर्वोच्च न्यायालय है . ये आपने कोसर्वोच्च मानते है. न तो ये पब्लिक के दौर चुन्नी हुई सरकार को मानते है. ना ये किसी के प्रति जवाबदेह है.काया ये ही हिंदुस्तान का कॉन्स्टिट्यूशन हैपता नहीं ? हम तो नॉर् पब्लिक है. पर हम को इस लगता है. माफ़ी चाहता हु यदि कुछ गलत लिखा हो तो.वो भी डर से माफ़ी मांग रहा हु. कही मुझे ही न्यायालय दोषी करार ना दे दे.
              Reply
              1. R
                Ravi
                Nov 25, 2016 at 3:38 pm
                सरकार के प्रती सुप्रीम का रवैया बराबर है | सरकार अपनी मन मानी करती हे | लोकपाल बिल नही लाइ| इस में भी देरी के चलते बोला| कोर्ट सरकार से अछी होती हे यकिनन्|
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