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NEET के विरोध में प्रदर्शन किया तो होगी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने किया बैन

चीफ जस्टिस जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह निर्देश देते हुये टिप्पणी की कि नीट परीक्षा को शीर्ष अदालत पहले ही सही ठहरा चुकी है।
तमिलनाडु के कोयंबटूर में नीट के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते और रेल रोकते लोग। (फोटो-PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय प्रवेश एवं पात्रता परीक्षा (नीट) के विरोध में तमिलनाडु में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदी लगा दी है और तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि नीट की परीक्षा के मसले को लेकर राज्य में कोई आन्दोलन नहीं हो। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई भी व्यक्ति ऐसी गतिविधि में संलिप्त होता है जिससे राज्य का सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है तो उसके खिलाफ उचित कानून के तहत मामला दर्ज किया जाये।

चीफ जस्टिस जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह निर्देश देते हुये टिप्पणी की कि नीट परीक्षा को शीर्ष अदालत पहले ही सही ठहरा चुकी है। पीठ ने कहा, ‘‘अंतरिम उपाय के रूप में यह निर्देश दिया जाता है कि तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव का यह दायित्व है कि नीट परीक्षा के संबंध में किसी प्रकार का आन्दोलन नहीं हो।’’

शीर्ष न्यायालय ने इसके साथ ही एक याचिका पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया। इस याचिका में राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाये रखने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि नीट की परीक्षा के खिलाफ किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को आन्दोलन, हडताल या विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाए। याचिका में कहा गया है कि इस मुद्दे को लेकर राज्य में चल रहे आन्दोलन से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस मामले में अब 18 सितंबर को आगे की सुनवाई होगी।

बता दें कि नीट के खिलाफ केस लड़ने वाली अनीता की खुदकुशी के बाद लोग ‘जस्टिस फॉर अनीता’ नाम से कैम्पेन चला रहे हैं और नीट से छूट चाहते हैं। दरअसल, तमिलनाडु में इससे पहले 12वीं के अंकों के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस साल से नीट के आधार पर ही लोगों को मेडिकल में दाखिला दिया जाएगा। इससे कई विद्यार्थी वंचित रह गए। अनीता ने 12वीं में तो अच्छे अंक लाए लेकिन नीट परीक्षा में अच्छा स्कोर नहीं कर सकी। इस वजह से उसका नामांकन मेडिकल कॉलेज में नहीं हुआ और उसने राज्य सरकार से इसमें छूट देने की मांग की लेकिन राज्य सरकार ने यह कहकर हाथ खड़े कर लिए कि इसमें उसका कोई रोल नहीं है। लिहाजा, अनीता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से भी उसे निराशा हाथ लगी। इससे दुखी होकर उसने खुदकुशी कर ली। अनीता की मौत पर कई संगठन अभी भी राज्यभर में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

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