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सहारा चीफ सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर- जेल से बाहर रहना है तो 6 फरवरी तक जमा कराइए ₹6 अरब

उच्चतम न्यायालय ने सुब्रत राय की अंतरिम जमानत को 6 फरवरी 2017 तक बढ़ा दिया है।
सहारा प्रमुख सुब्रत राय (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (28 नवंबर) को सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय से कहा कि यदि उन्हें जेल से बाहर रहना है तो वह सेबी-सहारा रिफंड खाते में अगले साल 6 फरवरी तक 600 करोड़ रुपए जमा करायें। साथ ही न्यायालय ने उन्हें आगाह किया कि धनराशि जमा कराने में विफल रहने पर उन्हें फिर जेल में लौटना होगा। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि यदि सहारा समूह निवेशकों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिये संपत्ति बेचने में असफल रहा तो वे इसके लिये ‘रिसीवर’ नियुक्त करने पर विचार कर सकते हैं। पीठ ने कहा, ‘यदि आप (सहारा समूह) संपत्ति बेचने में असफल रहे तो न्यायालय रिसीवर नियुक्त करना बेहतर समझेगी।’’ साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि वह किसी व्यक्ति को जेल में नहीं रखना चाहती।

न्यायालय ने शुरू में राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि दो महीने के लिये सेबी के पास एक हजार करोड रूपए जमा करायें अन्यथा वह रिसीवर नियुक्त करेगी, परंतु बाद में पीठ ने दो फरवरी, 2017 तक जमा कराने वाली राशि घटाकर छह सौ करोड़ रुपए कर दी। इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही सिब्बल ने कहा कि सहारा समूह ने न्यायालय के पहले के निर्देशानुसार धनराशि जमा कर दी है और पुन:भुगतान के बारे में नया कार्यक्रम न्यायालय में पेश किया है। इस पर न्यायालय ने सेबी की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द दातार और इस मामले में न्याय मित्र शेखर नफडे को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि 2012 से लंबित इस मामले का एक ‘इतिहास’ है। न्यायालय ने सेबी और न्याय मित्र से कहा कि वे इस सवाल का जवाब दें कि क्या पुन:भुगतान के कार्यक्रम के मामले में यह समूह और लाभ का हकदार है। समूह ने कहा कि उसके पास एक लाख 87 करोड रूपए की संपत्ति है। इस पर पीठ ने कहा, ‘आप अभी बकाया देनदारी का भुगतान करने में असमर्थ हैं। साथ ही पीठ ने सिब्बल से सहारा समूह के मुखिया की मां की मृत्यु होने के कारण जेल से बाहर आये राय द्वारा जमा करायी गयी राशि के बारे में जानना चाहा।’ सिब्बल ने कहा, ‘मैंने इसके बाद से 1200 करोड़ रुपए जमा करायें हैं। अब तक 11 हजार करोड़ रुपए जमा करा दिये गये हैं और अभी 11036 करोड़ जमा कराना शेष है।’’

सिब्बल ने कहा कि सेबी के अनुसार अभी भी 14000 करोड़ रुपए बकाया हैं। इस बीच, पीठ ने कहा कि समूह सर्किल रेट से 90 फीसदी कम पर अपनी संपत्ति बेचने के लिये वह उससे संपर्क कर सकता है। मामले की सुनवाई के अंतिम क्षणों में पीठ ने सहारा की सपंत्तियों या उसकी दूसरी योजनाओं में धन निवेश करने वाले व्यक्तिगत वादियों की अर्जियों पर विचार करने से इंकार करते हुये कहा कि उन्हें दीवानी अदालत या दूसरे मंचों पर अपनी गुहार लगानी होगी। पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में उसकी चिंता निवेशकों के धन के भुगतान को लेकर है।

सेबी की ओर से दातार ने इससे पहले कहा था कि सहारा समूह को सेबी को ब्याज सहित 37 हजार करोड रूपए का भुगतान करना है जिसमें मूलधन 24 हजार करोड़ रुपए है। उन्होंने कहा कि सहारा ने निवेशकों से लिये गये 24,029 करोड़ रुपए में से अभी तक 10, 918 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। इससे पहले, सहारा समूह ने न्यायालय से कहा था कि वह शीर्ष अदालत के आदेश में निर्धारित समय सीमा 24 अक्तूबर से पहले ही दो सौ करोड़ रुपए सेबी के पास जमा करा देगा। शीर्ष अदालत ने राय और दो अन्य निदेशकों अशोक राय चौधरी और रवि शंकर दुबे को पेरोल पर रिहा करने के अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ाते हुये 28 सितंबर को सहारा समूह से कहा था कि वह 24 अक्तूबर तक दो सौ करोड़ रुपए और जमा कराये और ऐसा नहीं करने पर उन्हें फिर से जेल भेज दिया जायेगा।

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