December 06, 2016

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बुलंदशहर गैंगरेप: सुप्रीम कोर्ट ने आज़म खां से बिना शर्त माफी मांगने को कहा

सुप्नीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह सामूहिक बलात्कार की पीड़िता का किसी नजदीक के केंद्रीय विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित करे।

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के विवादास्पद मंत्री आजम खां को गुरुवार (17 नवंबर) को निर्देश दिया कि सनसनीखेज बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड पर कथित टिप्पणियों के लिए वह ‘बिना शर्त माफी’ मांगे। इसके साथ ही न्यायालय ने ऐसे मामलों में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों से उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिये अटार्नी जनरल की मदद मांगी है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने पुरानी कहावत को दोहराया कि एक बार बोले गये शब्द वापस नहीं लिये जा सकते और उसने खां की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, ‘यदि वह(खां) बिना शर्त माफी मांगने संबंधी हलफनामा दाखिल करते हैं तो यह मामला खत्म है।’ न्यायालय इस मामले में अब सात दिसंबर को आगे सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने न्यायाधीशों से कहा कि हालांकि खां ने इस मामले की पीड़ितों के बारे में ऐसा नहीं कहा था जो उनके हवाले से कहा बताया गया है परंतु यदि पीडित के पिता किसी भी तरह से ‘अपमानित या आहत’ महसूस करते हैं तो समाजवादी पार्टी का यह नेता क्षमा याचना के लिये तैयार है।

इस पर पीठ ने कहा, ‘दो सप्ताह के भीतर बिना शर्त क्षमा याचना का हलफनामा दाखिल किया जाये।’ पीठ ने कहा कि वह अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों से बलात्कार सहित जघन्य मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में पहले तैयार किये गये सवालों पर विचार करेगा। पीठ ने महिला की गरिमा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर देते हुये राज्य सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे की सामूहिक बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की को उसके पिता की पसंद के किसी नजदीकी केन्द्रीय स्कूल में दाखिला मिले। पीठ ने कहा कि दाखिले और शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और केन्द्र इसके लिये हर सहयोग देगा। पीठ ने यह भी कहा कि स्कूल यह भी सुनिश्चित करे कि पीडिता की गरिमा पर कोई आंच नहीं आये।

न्यायालय ने कहा, ‘यह विवाद यहीं खत्म नहीं होता। प्रतिवादी नंबर दो (खां) द्वारा दी जाने वाली बिना शर्त क्षमा याचना पर न्यायालय विचार करेगा कि क्या इसे स्वीकार किया जाये। इस न्यायालय द्वारा पहले तैयार किए गए सवालों पर विचार किया जायेगा। हम अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से न्यायालय की मदद का अनुरोध करते है।’ न्यायमित्र की भूमिका निभा रहे विधिवेत्ता फली नरीमन ने पीठ से कहा कि न्यायालय द्वारा तैयार किये गये सवालों पर बहस होनी चाहिए ताकि बलात्कार और छेड़छाड़ जैसे मामलों में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सके। हालांकि पीठ ने टिप्पणी की कि महिला की गरिमा के लिए प्रेस की जिम्मेदारी और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि स्कूल में प्रवेश और शिक्षा पर आने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और केन्द्र इसके लिये हर तरह की सहायता करेगा। न्यायालय ने कहा कि स्कूल भी बलात्कार की शिकार इस लड़की की गरिमा सुनिश्चित करेगा।

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First Published on November 17, 2016 3:55 pm

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