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मेरे हीरो हैं सुब्रमण्‍यम स्‍वामी, राम मंदिर को लेकर उनकी हर बात पर है भरोसा: उमा भारती

एक समय में राम मंदिर आंदोलन की सक्रिय सदस्य रहीं केंन्द्रीय मंत्री उमा भारती बातचीत के माध्यम से लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समाधान चाहती हैं।
Author नई दिल्‍ली | June 5, 2016 14:46 pm
अप्रैल में मुंबई में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान स्वामी ने दावा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का कार्य इस वर्ष के आखिर तक शुरू हो जायेगा।

केंन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने सुब्रमण्यम स्वामी को अपना हीरो बताया है। उन्होंने कहा कि वह उनके (स्वामी के) वादे पर भरोसा करती हैं कि अयोध्या में राम मंदिर का काम इस वर्ष के आखिर तक शुरू हो जायेगा। हालांकि विवादित भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को अपना ‘‘नायक’’ बताते हुए मंत्री ने उनकी सराहना की।

भारती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनको मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने की संभावना को खारिज किया लेकिन विश्वास जताया कि अमित शाह की अगुवाई में भाजपा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस राज्य में अपनी सरकार बनाने में सक्षम होगी। भारती ने कहा, ‘‘मैं स्वामी का बहुत अधिक सम्मान करती हूं। वह मेरे नायक हैं। मैं 15-16 वर्ष की थी जब आपात काल लागू किया गया था और डॉक्टर स्वामी एवं जार्ज फर्नांडीस मेरे नायक थे। मेरे लिए उनका व्यक्तित्व नायक की तरह है। वह जो कहते हैं, उस पर मुझे विश्वास है।’’

हिंदुत्व की पुरानी पैरोकार रहीं भाजपा नेता का ये बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी नेतृत्व राम मंदिर से जुड़े प्रश्नों से बच रही है और लगातार इस बात का भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी।

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अप्रैल में मुंबई में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान स्वामी ने दावा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का कार्य इस वर्ष के आखिर तक शुरू हो जायेगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर की थी कि अगले वर्ष हिंदू राम मंदिर में रामनवमी मनायेंगे।

भारती ने कहा, ‘‘राम मंदिर आंदोलन का मुद्दा यह था कि वह स्थान भगवान राम की जन्मभूमि है या नहीं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने निर्विवाद रूप से ये कहा था कि मध्य में जो गुंबद है वो रामलला का है। इस घोषणा के साथ ही राम मंदिर आंदोलन को कानूनी मंजूरी मिल गयी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब भूमि से जुड़ा विवाद बचा है। अब ये विवाद नहीं रह गया है कि ये राम जन्मभूमि है या नहीं। भूमि विवादों के समाधान के लिए आंदोलनों की जरूरत नहीं। इसका समाधान बातचीत या कानूनी तरीके से होना है। मुझे लगता है कि बातचीत के जरिये राम जन्मभूमि के मुद्दे का समाधान संभव है।’’

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भारती ने सुझाव दिया कि इस विवाद के संबद्ध पक्षों को एकसाथ बैठना चाहिए और संतों एवं दोनों पक्षों के धार्मिक गुरूओं को दोनों समुदायों के बीच वार्ता में मदद करनी चाहिए एवं अदालत को बताना चाहिए कि उन्होंने मुद्दे को सुलझा लिया है।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री ने कहा, ‘‘वहां एक शानदार मंदिर बने। मुझे गर्व है कि मैंने आंदोलन में हिस्सा लिया, जिस पर अदालत की मुहर लगी कि मैं सही थी।’’ सितंबर 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति एस यू खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी वी शर्मा की तीन सदस्यीय पीठ ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने में का फैसला सुनाया था। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की संगठनात्मक कौशल की सराहना करते हुए भारती ने कहा, ‘इस बार हम लोगों के पास एक ऐसा नेता है जो ठीक तरीके से काम करता है, और किसी के भी दबाव में नहीं आता है। उत्तर प्रदेश के लिए जादुई मंत्र है कि आप बगैर किसी दबाव में आये और खुले दिमाग के साथ निर्णय करे।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष खुले दिमाग से और सटीक निर्णय करते हैं, खुद कड़ी मेहनत करते हैं और दूसरों से भी ऐसा करवाते हैं। साथ ही चाटुकारिता जैसी चीज के लिए कोई स्थान नहीं है।’ उत्तर प्रदेश चुनाव में पार्टी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए या नहीं, इससे जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा का उदाहरण दिया जहां पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा किए बिना जीत दर्ज की और साथ ही असम का भी जहां पार्टी ने सर्वानंद सोनोवाल को इस पद का उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा, ‘अमित शाह इस मुद्दे पर जो भी निर्णय लेंगे, वह सही होगा। हम लोग कड़ी मेहनत करेंगे।’

एक सवाल के जवाब में भारती ने कहा, ‘मेरी इसमें थोड़ी भी रुचि नहीं है। यहां तक कि मुझे इस मुद्दे पर चर्चा करने की भी रूचि नहीं है। यह मेरे से जुड़ा हुआ विषय नहीं है। मैं गंगाजल के अलावा किसी और मुद्दे से जुड़ी हुई नहीं हूं। मैं इस पर बात करने के लिए तैयार नहीं हूं।’ केंन्द्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि पार्टी प्रदेश में 1991 की तरह ही बहुमत हासिल करेगी। उस समय पार्टी ने 425 में से 221 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

मथुरा की हाल की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ‘मथुरा की घटना बहुत गंभीर है। अगर आप घटना के सभी पहलुओं पर गौर करते हैं तो….किसने उन 2000 लोगों को राजनीतिक संरक्षण दिया जो वहां इतने दिनों तक रहे? क्या 2000 लोग सत्तारूढ़ दल के संरक्षण के बिना भूमि पर कब्जा जमा सकते हैं? क्या वे लोग इतने खतरनाक थे कि उत्तर प्रदेश सरकार उनसे नहीं निपट सकी। यह दिखाता है कि इस सरकार में प्रशासन कितना कमजोर है।’

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