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श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला से मिले मोदी, भारत-श्रीलंका के बीच हुआ असैन्य परमाणु समझौता

अपने संबंधों को नए स्तर तक ले जाते हुए भारत और श्रीलंका ने एक असैन्य परमाणु समझौते पर दस्तखत किए और रक्षा व सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने एक रचनात्मक व मानवीय रुख अपना कर मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे का समाधान तलाशने को […]
भारत-श्रीलंका के बीच हुआ असैन्य परमाणु समझौता

अपने संबंधों को नए स्तर तक ले जाते हुए भारत और श्रीलंका ने एक असैन्य परमाणु समझौते पर दस्तखत किए और रक्षा व सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने एक रचनात्मक व मानवीय रुख अपना कर मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे का समाधान तलाशने को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है।

सिरिसेना के साथ एक साझा पे्रस कांफ्रेंस में मोदी ने कहा कि असैन्य परमाणु सहयोग पर दोतरफा समझौता हमारे आपसी विश्वास की एक और अभिव्यक्ति है। श्रीलंका से यह पहला इस तरह का समझौता है। इससे कृषि व स्वास्थ्य देखभाल जैसे क्षेत्रों सहित अन्य मामलों में भी सहयोग के नए रास्ते खुलते हैं। रविवार को यहां पहुंचे सिरिसेना ने श्रीलंका का राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। उन्होंने हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव में महिंदा राजपक्षे को मात दी थी। राजपक्षे पिछले दस साल से श्रीलंका के राष्ट्रपति पद पर आसीन थे।

परमाणु समझौते के तहत ज्ञान व विशेषज्ञता के अंतरण व आदान-प्रदान, संसाधन साझा करने, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में कर्मियों के क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण जैसे सहयोग किए जाएंगे। रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन और परमाणु व रेडियोधर्मी आपदा राहत और पर्यावरण संरक्षण में भी सहयोग किया जाएगा। दोनों देशों ने तीन अन्य समझौतों पर भी दस्तखत किए जिसमें कृषि के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। एक और समझौते पर दस्तखत हुए जिसके तहत श्रीलंका नालंदा विश्वविद्यालय परियोजना में हिस्सा ले सकेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे और श्रीलंकाई नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि रक्षा व सुरक्षा सहयोग बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि हमने अपने समुद्री सुरक्षा सहयोग, जिसमें मालदीव के साथ त्रिपक्षीय स्वरूप भी शामिल है, में प्रगति का भी स्वागत किया। उनका मानना है कि दोनों देशों का भाग्य एक-दूसरे से जुड़ा है और हमारी सुरक्षा व समृद्धि को बांटा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि दोतरफा संबंधों व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अच्छी चर्चा हुई। भारत इस बात से सम्मानित महसूस कर रहा है कि सिरिसेना ने पदभार संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। मछुआरों के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि उन्होंने और सिरिसेना ने इसे सर्वोच्च महत्त्व दिया। यह दोनों पक्षों के लोगों की आजीविका को प्रभावित करता है। हम इस बात पर सहमत हुए कि इस मुद्दे पर एक रचनात्मक व मानवीय रवैया अपनाया जाना चाहिए। हम दोनों पक्षों के मछुआरों के संघों को जल्द मिलने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने वार्ता के नतीजों पर प्रसन्नता जताई और कहा- दोनों देशों की दोस्ती सिर्फ एक-दूसरे के लिए अहम नहीं है बल्कि इसका महत्त्व पूरे क्षेत्र के लिए भी है। मैं वास्तव में संबंध सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों की तारीफ करता हूं। दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। मोदी ने श्रीलंका यात्रा पर आमंत्रित करने के लिए सिरिसेना का शुक्रिया अदा किया और कहा कि वे मार्च में श्रीलंका दौरे पर जाने के लिए उत्साहित हैं। आर्थिक संबंधों के बारे में मोदी ने कहा कि दोनों देश आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं के द्वार खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सिरिसेना को बता दिया है कि भारत श्रीलंका में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। हम भारत और श्रीलंका के बीच वायु व समुद्र संपर्क बढ़ाने का भी इरादा रखते हैं।

श्रीलंका में आंतरिक तौर पर विस्थापित लोगों के लिए भारत के सहयोग से चल रही परियोजनाओं के संबंध में मोदी ने कहा-उन्होंने इस मुद्दे पर शानदार प्रगति की है। इसमें आवासीय परियोजना भी शामिल है जिसके तहत 27 हजार से ज्यादा मकान पहले ही बनाए जा चुके हैं। राष्ट्रपति और मैंने प्रगति पर संतोष जताया। मैंने राष्ट्रपति सिरिसेना को आश्वस्त किया कि भारत श्रीलंका के साथ अपनी विकास साझेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है। सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े समझौते की तरफ इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि क्रिकेट की तरह संस्कृति भी दोनों देशों के बीच एक मजबूत बंधन है।

 

 

 

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