December 06, 2016

ताज़ा खबर

 

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के ऑर्डर पर पूर्व अटॉर्नी जनरल का SC से सवाल- क्या ऐसे मामलों में आपको पड़ना चाहिए?

सोली सोराबजी ने कहा, "क्या ऐसे मामलों में पड़ना अदालत का काम है? क्या खड़े होना ही राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने का एकमात्र तरीका है?

भारत के पूर्व एटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी मानते हैं कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बचाने के फैसले को लागू करना मुश्किल होगा। (फाइल फोटो)

भारत के पूर्व एटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और सभी दर्शकों को इस दौरान खड़े होने को जरूरी बनाने के फैसले को न्यायपालिका का सीमा से बाहर जाना बताया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए सोराबजी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मेरी राय में ये फैसला पर इनक्यूरियम (कानून सीमाओं की अवज्ञा करके दिया गया आदेश)।” सोराबीजी ने उम्मीद जताई है कि सर्वोच्च अदालत अपने फैसले में संशोधन करेगी। 30 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने श्याम नारायण चौकसे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया था। सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान सिनेमाघर के परदे पर राष्ट्रध्वज की तस्वीर भी दिखाए जाने का आदेश दिया है।

सोराबजी ने अपनी बात साफ करते हुए कहा, “क्या ऐसे मामलों में पड़ना अदालत का काम है? क्या खड़े होना ही राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने का एकमात्र तरीका है? हो सकता है कि कुछ लोग शारीरिक कारणों से न खड़े हो पाएं, कुछ लोग बौद्धिक या धार्मिक कारणों से न खड़े हों पाएं क्योंकि वो सचेत तौर पर ये मान सकते हैं कि उनके धार्मिक विश्वास उन्हें खड़े होने से रोकते हैं। दूसरी अहम बात ये है कि उन्होंने (पीठ ने) बिजोय इमैन्युअल केस का एक बार भी हवाला नहीं दिया है। बिल्कुल रेफर ही नहीं किया। न ही ये बताया कि ये आदेश कैसे लागू होगा? अगर कोई शारीरिक या किन्हीं अन्य कारणों से नहीं खड़ा हो पाता है तो इस पर कौन निगरानी रखेगा। और रही दरवाजे बंद करने की बात…तो कोई इमरजेंसी आ गई तो क्या होगा? अगर किसी को तुरंत शौचालय जाना हो तो?”

सोराबजी ने बताया कि इमैन्युअल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक स्कूल में तीन बच्चों को राष्ट्रगान न गाने के लिए स्कूल से निकाले जाने को रद्द कर दिया था। इन बच्चों ने स्कूल प्रशासन से कहा था कि उनकी धार्मिक मान्यता राष्ट्रगान गाने की इजाजत नहीं देती। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रगान गाना बाध्यकारी नहीं है। सोराबजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की मंशा “अच्छी” हो सकती है “लेकिन तरीका सही नहीं है।” सोराबजी ने सवाल उठाते हुए कहा कि “इसे कौन लागू करेगा?” “क्या इसके लिए सिनेमाघरों के मालिक जिम्मेदार होंगे?”

सोराबजी के अनुसार सर्वोच्च के इस फैसले को व्यावहारिक तौर पर लागू करना मुश्किल है। सोराबजी ने कहा, “उन्होंने आर्टिकल 51-ए के तहत दिए गए मौलिक दायित्व का हवाला दिया है लेकिन संविधान में बहुत से और मौलिक दायित्व हैं तो क्या अदालत उन्हें भी लागू करने के निर्देश देगी? मुझे नहीं लगता कि इन्हें न्यायिक तौर पर लागू किया जा सकेगा। हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए…इसे किस तरह लागू किया जाएगा? मुझे लगता है कि न्यायपालिका जरूरत से आगे चली गई है?”

सोराबजी ने कहा है कि सर्वोच्च अदालत को अपने अंतरिम आदेश की पुष्टि नहीं करनी चाहिए। सोराबजी पूछते हैं, “क्या देशभक्ति और राष्ट्रवाद की पहचान सिनेमाघर में खड़े होने (राष्ट्रगान के समय) से होगी?” सोराबजी कहते हैं,”डॉक्टर सैमुअल जॉनसन का कथन याद कीजिए कि राष्ट्रवाद धूर्तों की आखिरी शरणगाह है।”

सोराबजी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज भावनाओं में बह गए। सोराबजी ने कहा, “जजों को ये नहीं सोचना चाहिए कि देश और लोकतंत्र को केवल वही बचा सकते हैं। उन्होंने अपनी सीमा समझनी चाहिए और न्यायपालिका को अपनी लक्ष्मणरेखा का ध्यान रखना चाहिए। अदालत जो कहती है उस पर उसे अमल भी करना चाहिए। उसे अपने दायरे से बाहर नहीं जाना चाहिए।”

सोराबजी ने इमैन्युअल मामले में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस ओ चिनप्पा रेड्डी के नेतृत्व वाली पीठ को फैसले को “बहुत अच्छा फैसला” बताया। सोराबजी कहते हैं कि मामले में अगली सुनवाई में एटॉर्नी जनरल या किसी और को अदालत को बताना चाहिए कि आप ऐसे आदेश नहीं दे सकते और अदालत को इसे सुनना चाहिए। इमैन्युअल मामले का फैसला पढ़ें।

वीडियो चर्चा: फिल्म से पहले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य

वीडियोः सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश सिनेमाघरों में बजेगा राष्ट्रगान, दर्शकों रहेंगे खड़े

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on December 2, 2016 10:19 am

सबरंग