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8वीं तक नहीं होगा कोई फेल, 10वीं में हो सकती है बोर्ड की वापसी

शिक्षा पर उच्चतम सलाहकार निकाय की बुधवार को दिन भर हुई बैठक में पुनर्विचार किया गया कि कक्षा आठ तक किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाए और दसवीं में फिर से बोर्ड की परीक्षा लागू हो।
8वीं तक फेल न करने की नीति होगी खत्म, 10वीं में बोर्ड परीक्षा पर भी पुनर्विचार! (फोटो: अविनाश श्रीवास्तव)

शिक्षा पर उच्चतम सलाहकार निकाय की बुधवार को दिन भर हुई बैठक में पुनर्विचार किया गया कि कक्षा आठ तक किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाए और दसवीं में फिर से बोर्ड की परीक्षा लागू हो। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सुझाव दिया कि स्कूलों में छात्राओं को सैनिटरी नेपकिन वितरित किए जाएं ताकि छात्राओं की पढ़ाई छोड़ने की दर में कमी लाई जा सके।

इस सुझाव का बहुत से राज्यों ने समर्थन किया और सरकार ने प्रतिबद्धता व्यक्त की कि इसे शीघ्र ही लागू किया जाएगा। इस बैठक में नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून का विस्तार उच्चतर स्तर पर कक्षा दस तक और प्री स्कूल स्तर पर नर्सरी तक किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। राजग सरकार के तहत नवगठित शिक्षा संबंधी केंद्रीय सलाहकार बोर्ड (सीएबीई) की यह पहली बैठक थी।

स्मृति ने शुरुआती चर्चा में शिक्षा नीति तैयार करने में राज्यों की भागीदारी पर जोर दिया। जबकि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य अध्ययन से संबंधित कार्यक्रम शामिल किए जाने पर जोर दिया। शिक्षा को छह साल की उम्र से लेकर 14 साल की उम्र के बीच के हर बच्चे के लिए मौलिक अधिकार बनाने वाला आरटीई कानून एक अप्रैल 2010 से प्रभाव में आया था।

इसके तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर सभी निजी स्कूलों के लिए 25 फीसद सीटें वंचित तबके के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।

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