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स्मृति का रुतबा घटने का असर नजर आ रहा है अमेठी में

स्मृति अमेठी से 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी वहां काफी सक्रिय थी। कांग्रेसी शिकायतों के जबाब में वह पार्टी और सरकार की ओर से अब तक मोर्चा संभालती थीं।
Author सुल्तानपुर | August 9, 2016 03:19 am
केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्‍मृति ईरानी।

मोदी कैबिनेट में स्मृति ईरानी का रुतबा घटने का असर अमेठी में भी नजर आ रहा है। इलाके की पांच विधानसभा सीटों के भाजपा के दावेदारों को अब स्मृति के अलावा और भी मजबूत सहारों की तलाश है। खुद स्मृति भी अमेठी के मामलों में पहले जैसी मुखर नहीं हैं। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से कांग्रेस लगातार गांधी परिवार के निर्वाचन क्षेत्रों अमेठी और रायबरेली के साथ सौतेले व्यवहार की शिकायत करती रही है। स्मृति अमेठी से 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी वहां काफी सक्रिय थी। कांग्रेसी शिकायतों के जबाब में वह पार्टी और सरकार की ओर से अब तक मोर्चा संभालती थीं। जगदीशपुर के फूड पार्क की योजना हो या बंद पड़े सम्राट साइकिल कारखाने की जमीन राजीव गांधी ट्रस्ट को सौंपने का मामला उन्होंने पलटवार कर गांधी परिवार को बैकफुट पर लाने की कोशिश की थी।

मगर बीते दिनों अमेठी के सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान बंद किए जाने के बाद कांग्रेसी नेताओं के हमले पर उन्होंने खामोशी अख्तियार की। बेशक, अब यह मंत्रालय जावेडकर के पास है और उन्होंने जबाब भी दिया लेकिन मोदी सरकार बनने के बाद से अमेठी से जुड़े हर राजनीतिक हमले के मौके पर मोर्चा संभालने वाली स्मृति की चुप्पी ने लोगों को चौंकाया है। क्या मानव संसाधन मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग के मुकाबले महत्वहीन समझे जाने वाले कपड़ा मंत्रालय में भेजे जाने के बाद वे अमेठी की ओर से भी उदासीन हुई हैं? असलियत में इस फेरबदल ने उनकी सरकार और पार्टी में घटती हैसियत का संदेश दिया। साथ ही 2017 के उत्तर प्रदेश् विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी का चेहरा बनाए जाने की चर्चाएं भी थम गईं।

लोकसभा चुनाव में स्मृति ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी। हार के बाद भी मोदी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने अमेठी में जबरदस्त सक्रियता के जरिये राहुल गांधी के लिए अपने ही गढ़ में परेशानियां बढ़ा दी थी। इससे अमेठी में बेहद कमजोर समझी जाने वाली भाजपा को भी खासी ताकत मिली। विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी टिकट के दावेदारों की कतार लंबी हुई। दावेदारों ने स्मृति के अमेठी के दौरों की कामयाबी के लिए पूरी ताकत झोंकी। उन्हें लगता था कि संसदीय क्षेत्र की पांचों सीटों के टिकटों के बंटवारे में स्मृति की ही चलेगी। अब बदले हालात में टिकट के दावेदार स्मृति की ओर जाने से ठिठके हैं। अधिकांश को लगता है स्मृति की पैरवी लाभ की जगह नुकसान ना कर दे!

अमेठी में सक्रियता की बदौलत स्मृति को यू पी में काफी चर्चा और शोहरत मिली। प्रदेश और यहां की राजनीति से उनका वास्ता 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी की असफल लड़ाई तक सीमित है। लेकिन पराजय के बाद अमेठी में स्मृति की दौड़धूप ने उन्हें प्रदेश में पार्टी के संभावित चेहरे लायक राजनीतिक हैसियत दे दी। माना जा रहा था कि नेतृत्व की योजना के अधीन वे अमेठी के जरिये 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में पार्टी को ताकत देने के अभियान में हैं। लेकिन पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से छुट्टी। फिर कैबिनेट में एक महत्वहीन मंत्रालय में भेजने के बाद सभी कैबिनेट कमेटियों से बाहर किए जाने और इसी के साथ उप्र. में उन्हें चेहरे के रूप में पेश करने की चर्चाएं थमने के बीच अब अमेठी में उनकी दिलचस्पी पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम दिलचस्प है। 2017 के चुनाव की रणभेरी बजाने के लिए गांधी परिवार ने मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी को चुना। सोनिया गांधी ने वहां जोरदार रोड शो किया। उधर गांधी परिवार के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में सन्नाटा है। शायद इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव के वक्त से ही अमेठी में तगड़ी चुनौती दे रही स्मृति ईरानी फिलहाल अपनी ही पार्टी नेतृत्व के अविश्वास से जूझ रही हैं!

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  1. M
    modinagarwala
    Aug 9, 2016 at 1:28 am
    स्मृति जी ने अमेठी मैं बहुत सारियां बंटवाई थी , अब टेक्सटाइल मिनिस्टर बनने के बाद पूरी U P मैं बँटवाएंगी
    Reply
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