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बिहार चुनाव के लिए तैयार तीसरा मोर्चा, छह वामदलों ने मिलाया हाथ

छह वामदलों भाकपा, माकपा, भाकपा माले, एसयूसीआई, फारवर्ड ब्लाक और आरएसपी ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीत..
Author पटना | September 8, 2015 09:50 am
सीताराम येचुरी ने कहा कि बिहार में अभी भी हंसिया और हथौड़ा है जो किसानों और मजदूरों का प्रतीक चिन्ह है। (पीटीआई फोटो)

छह वामदलों भाकपा, माकपा, भाकपा माले, एसयूसीआई, फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीत जदयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन का साथ मिलकर मुकाबला करने का निर्णय लिया है।

इन छह दलों की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए सोमवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में एक मंच पर इकट्ठे हुए इन पार्टियों के नेताओं ने इस आशय की घोषणा किए जाने के साथ बताया कि वर्तमान में वे सीटों के तालमेल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।

इस अवसर पर भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘वह इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। हमसे कहा जाता था कि वामदल एकजुट क्यों नहीं होते। आज हम भगवाधारी पार्टी (भाजपा) के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश नीत महागठबंधन को धूल चटाने के लिए एकजुट हो गए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 चुनावी था जो मोदी और उनके ‘जुमलों’ का साल था पर भाजपा और आरएसएस के लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करने, कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने और हर तरफ हिंदुत्व को थोपने के अपने एजेंडे की वजह से वर्ष 2015 में देश भर में हो रहे आंदोलन के कारण आज बैक फुट पर है।

भट्टाचार्य ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर बिहार में दलितों का नरसंहार करने वालों से सांठगांठ करने तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दलितों के नरसंहार मामलों की जांच के लिए गठित अमीर दास आयोग को भंग करके उसमें संलिप्त रहे उच्च जाति के प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना का बचाव करने का आरोप लगाया।

भाकपा के वरिष्ठ नेता एबी वर्द्धन ने कहा कि हम राज्य और देश के लिए आंदोलन की शुरूआत कर रहे हैं। हमारी कामयाबी पर कोई शक नहीं। हम भाजपा नीत सामंती, सांप्रदायिक, कारपोरेट शक्तियों तथा लालू, नीतीश और कांग्रेस के अवसरवादी महागठबंधन को पछाडने के लिए हम बिहार की जनता को जागृत करेंगे।

उन्होंने बिहार की जनता के लिए ‘तीसरे मोर्चे’ या ‘वामगठबंधन’ की जीत सुनिश्चित किया जाना प्रदेश के हित के वास्ते जरूरी बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार और लालू और नीतीश के 25 सालों के शासन ने उनके लिए कुछ नहीं किया।

वर्द्धन ने कहा कि ये लोग केवल बड़ी-बड़ी बातें करते रहे और अहंकार पाले रखा पर जनता के लिए कुछ नहीं किया। बिहार की करीब 90 प्रतिशत आबादी अभी भी गरीब है। इसलिए वामदलों का तीसरे मोर्चा जरूरी है। बिहार में लड़ाई देश का भविष्य तय करेगा।

वामदलों की इस बैठक को संबोधित करते हुए माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि बिहार में वामदलों की एकजुटता देश की समस्त जनता के लिए एकमात्र विकल्प है। उन्होंने कहा कि हम राजनीतिक त्रिकोण पर हैं। एक कोने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत सांप्रदायिक शक्तियां हैं जिसने ‘अच्छे दिन’ का नारा दिया पर उसके कुशासन के कारण देश भर में जारी आर्थिक लूट की वजह से जनता प्याज और दाल नहीं पा रही है।

येचुरी ने कहा कि दूसरे कोने पर राजद और जदयू नीत जातिवाद राजनीतिक शक्तियों ने कब्जा कर रखा है जो कि सत्ता पाने के लिए लोगों की भावना का इस्तेमाल करते हैं। वामदल तीसरे कोने पर है जो जनता का शासन चाहती है। हम कुशासन को समाप्त कर सत्ता में आएंगे।

येचुरी ने कहा कि बिहार में अभी भी हंसिया और हथौड़ा है जो किसानों और मजदूरों का प्रतीक चिन्ह है। ये ‘लव और कुश’ इस प्रदेश में मोदी के ‘अश्वमेघ यज्ञ’ के घोड़े को रोकेंगे। उन्होंने चुनाव के निकट आने पर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दिये जाने की संभावना जताते हुए जनता को बिहार और पूरे देश को बचाने के लिए सचेत और एकजुट रहने की अपील की।

येचुरी ने कहा कि देश में संसाधनों और धन की कमी नहीं है पर यह कुछ लोगों के पास तक सीमित है और दूसरे भूखे मरने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि देश के सौ लोग ऐसे हैं जिनके पास करीब 64 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति है जो कि देश के आधे सकल घरेलू उत्पाद के बराबर है जबकि दूसरी ओर 90 प्रतिशत लोग जो दस हजार रुपये प्रति माह से कम अर्जित कर रहे हैं। करीब 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत लोगों के पास जीविकोपार्जन के लिए आवश्यक से कम धन है।

येचुरी ने कहा कि ऐसी स्थिति में केंद्र की सरकार ने औद्योगिक विकास के नाम पर पिछले छह वर्षों के दौरान औद्योगिक घरानों को करों में करीब 6 लाख करोड रुपये की छूट दी है। उन्होंने कहा कि देश में अमीर और गरीब के बीच फासला बढ़ने के साथ कारखानों के बंद होने, बेरोजगारी बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार गरीबों को मिलने वाले अनुदान में कटौती करने की कोशिश में लगी है।

भाकपा नेता एबी वर्द्धन, माकपा नेता सीताराम येचुरी और भाकपा माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि एकजुट हुए छह वामदल बिहार में सभी (243) सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और उनके बीच सीटों के बंटवारे की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इस बारे में घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की तिथि का एलान किए जाने पर कर दी जाएगी।

वर्द्धन और येचुरी ने कहा कि करीब 240 सीटों पर आम सहमति बन गयी है और बाकी अन्य को लेकर वार्ता जारी है। भट्टाचार्य ने बताया कि उनकी पार्टी ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव 2010 के दौरान 104 सीटों पर चुनाव लड़ा था पर इस बार आपसी तालमेल के साथ भाकपा माले 85 से 90 सीटों पर लड़ेगी।

इस अवसर पर वर्द्धन, येचुरी और भट्टाचार्य के अलावा फारवर्ड ब्लॉक के सचिव देवब्रत विश्वास, आरएसपी के महासचिव अबानी राय, एसयूसीआई की केंद्रीय समिति के सदस्य क्षय मुखर्जी सहित इन वामदलों के कई अन्य नेता भी उपस्थित थे।

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  1. N
    Naveen Bhargava
    Sep 8, 2015 at 1:11 pm
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग