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21800 करोड़ का देनदार: सरकार को दिए जाने वाले कुल इनकम टैक्‍स का 11% केवल एक शख्स का

आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2000-01 की तुलना में 2015-16 तक टैक्स से होने वाली आय में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है।
प्रतीकात्मक तस्वीर

वित्त वर्ष 2014-15 में एक अनाम भारतीय पर 21870 करोड़ रुपये टैक्स बकाया था। ये राशि संबंधित वित्त वर्ष में सभी भारतीयों की कुल टैक्स देनदारी का 11 प्रतिशत है। ये जानकारी आयकर विभाग द्वारा अक्टूबर 2016 में वित्त वर्ष 2014-15 के आयकर रिटर्न के असेसमेंट रिपोर्ट से सामने आयी है। वित्त वर्ष 2014-15 के आयकर रिटर्न के अनुसार देश में 64 करदाताओं पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स देनदारी थी। इन 64 करदाताओं पर कुल 1,13,068 करोड़ का टैक्स देनदारी थी। ये राशि कुल टैक्स देनदारी 4.46,719 करोड़ का करीब 25 प्रतिशत थी।

डाटा वेबसाइट इंडियास्पेंड डॉट कॉम के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में तीन करदाताओं ने कारोबार से अपनी निजी आय 500 करोड़ रुपये से अधिक बतायी थी। दो टैक्स दाताओं ने वित्त वर्ष 2014-15 में आयकर रिटर्न (वित्त वर्ष 2013-14 के लिए) में बताया कि लम्बी अवधि के जमा पर उन्हें 500 करोड़ रुपये से अधिक का नकद लाभ हुआ। आयकर विभाग ने इन करदाताओं का नाम नहीं सार्वजनिक किया है। हाल ही में ऑक्सफेम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों के पास देश के 58 प्रतिशत लोगों जितनी संपत्ति है। ऑक्सफेम की रिपोर्ट के अनुसार भारत के शीर्ष 57 अरबपतियों के पास देश की 70 प्रतिशत आबादी के बराबर दौलत है।

वित्त वर्ष 2014-15 के आंकड़ों के अनुसार आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल तीन करोड़ 65 लाख लोग निजी करदाता हैं जिन्होंने आयकर रिटर्न भरते समय कुल 16.50 लाख करोड़ की आय की घोषणा की थी। इन करदाताओं पर कुल 1.91 लाख करोड़ रुपये टैक्स देनदारी बनती है। वित्त वर्ष 2013-14 में भारत में कुल तीन करोड़ 35 लाख से अधिक करदाता थे। वहीं वित्त वर्ष 2012-13 में कुल दो करोड़ 89 लाख से अधिक करदाता थे।

वित्त वर्ष 204-15 में तीन करोड़ 60 लाख से अधिक करदाताओं ने वेतन से 9.8 लाख करोड़ रुपये की आय की घोषणा की थी। ये राशि संबंधित वर्ष के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का सात प्रतिशत थी। संबंधित वर्ष में 506 लाख करोड़ की आय करदाताओं ने कारोबारी से बतायी थी। वहीं 2.4 लाख करोड़ की आय टैक्स रिटर्न भरने वालों ने अन्य स्रोतों से बतायी थी।

आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2000-01 (31764 करोड़ रुपये) की तुलना में 2015-16 (2.9 लाख करोड़ रुपये) तक टैक्स से होने वाली आय में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है। इंडियास्पेंड की मई 2016 की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 में टैक्स से हुई कुल आय का 53 प्रतिशत केवल दो राज्यों महाराष्ट्र और दिल्ली से आया था।

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