ताज़ा खबर
 

बाल ठाकरे ने ‘दादागीरी’ नहीं की होती तो शोभा डे ‘पेज-3 पार्टियों में बुर्के में शामिल होतीं’

मराठी फिल्में दिखाना अनिवार्य किए जाने का विरोध करने वाली लेखिका शोभा डे पर शिवसेना ने तीखा हमला करते हुए आज कहा कि यदि बाल ठाकरे ने मराठी संस्कृति को बचाने के लिए ‘‘दादागीरी’’ नहीं की होती तो शोभा के पूर्वज ‘‘पाकिस्तान में पैदा हुए होते’’ और वह ‘‘पेज-3 पार्टियों में बुर्के में शामिल होतीं।’’ […]
Author April 9, 2015 16:56 pm
शिवसेना विधायक ने शिकायत की थी कि डे के ट्वीट ने मराठी भाषा और मराठी भाषी लोगों का अपमान किया है।

मराठी फिल्में दिखाना अनिवार्य किए जाने का विरोध करने वाली लेखिका शोभा डे पर शिवसेना ने तीखा हमला करते हुए आज कहा कि यदि बाल ठाकरे ने मराठी संस्कृति को बचाने के लिए ‘‘दादागीरी’’ नहीं की होती तो शोभा के पूर्वज ‘‘पाकिस्तान में पैदा हुए होते’’ और वह ‘‘पेज-3 पार्टियों में बुर्के में शामिल होतीं।’’

मल्टीप्लेक्सों में प्राइम टाइम में मराठी फिल्में दिखाना अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए शोभा ने ट्वीट किया था, ‘‘मैं मराठी फिल्मों से प्यार करती हूं। यह मुझे निर्णय करने दीजिए कि मैं कब और कहां उन्हें देखूं, देवेंद्र फडणवीस। यह कुछ और नहीं, बल्कि दादागीरी है।’’

सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर जानी मानी उपन्यासकार के ट्वीट पर कल आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की मांग की थी।

शिवसेना ने यहां अपने मुखपत्र सामना में आज एक संपादकीय में कहा, ‘‘आपने मराठी भूमि के लिए बड़ी सेवा की है जिसमें आप पैदा हुईं। महाराष्ट्र के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की टिप्पणियां एक मराठी महिला ने कीं।’’

लेखिका पर तीखा हमला बोलते हुए संपादकीय में कहा गया, ‘‘क्योंकि आपने राज्य सरकार के निर्णय को दादागीरी करार दिया है, हम आपको बताना चाहते हैं…यदि छत्रपति शिवाजी ने अपने समय में और बालासाहब ठाकरे ने ‘दादागीरी’ नहीं की होती तो तब आपके पूर्वज और बच्चे पाकिस्तान में पैदा हुए होते और आप पेज 3 पार्टियों में बुर्का पहनकर शामिल होतीं।’’

शिवसेना ने कहा, ‘‘मराठी संस्कृति और भोजन पर शोभा ने जो टिप्पणी की है, वह मराठी लोगों का अपमान करने के समान है। उन्होंने हमारी संस्कृति का भी अपमान किया है।’’

संपादकीय में पाकिस्तान शब्द के संदर्भ के बारे में पूछे जाने पर पार्टी ने स्पष्ट किया कि टिप्पणियां मराठी लोगों पर ‘‘अन्याय के खिलाफ’’ शिवाजी और बाल ठाकरे की लड़ाई को रेखांकित करने के लिए हैं।

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने कल कहा था कि शोभा डे ने सदन की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोभा ने अपने ट्वीट में कहा कि मल्टीप्लेक्सों में अब पॉपकॉर्न की जगह (मराठी भोजन) ‘दही मिसल’ और ‘वड़ा पाव’ मिलेगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.