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आडवाणी के ‘आपातकाल’ बयान पर शिवसेना का सवाल, कौन था निशाने पर…

लालकृष्ण आडवाणी के देश में दोबारा आपातककाल जैसे हालात की आशंका से इंकार नहीं किए जाने संबंधी चर्चित बयान के बाद शिवसेना ने आज सामना में...
Author June 22, 2015 15:40 pm
शिवसेना ने सामना के संपादकीय में प्रश्न किया कि वह कौन व्यक्ति है जिसकी ओर लालकृष्ण आडवाणी इशारा कर रहे हैं?

लालकृष्ण आडवाणी के देश में दोबारा आपातककाल जैसे हालात की आशंका से इंकार नहीं किए जाने संबंधी चर्चित बयान के बाद शिवसेना ने आज कहा कि अगर भाजपा के दिग्गज नेता किसी नेता की ओर इशारा कर रहे थे तो उन्हें खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, ‘‘जब आडवाणी ने आपातकाल के फिर से आने को लेकर आशंका प्रकट की है, तो वह निश्चित तौर पर किसी की ओर इशारा कर रहे हैं। अब प्रश्न यह है कि वह कौन व्यक्ति है जिसकी ओर आडवाणी इशारा कर रहे हैं? उनके आशंका को कैसे हल्के में लिया जा सकता है?’’

आडवाणी की देश के ‘सबसे बड़े कद के नेता’ के तौर पर सराहना करते हुए शिवसेना ने कहा, ‘‘आज वह भले ही मुख्यधारा की राजनीति में नहीं हों, लेकिन भाजपा नेता और मीडिया यह जानते हैं कि उनको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में जब उन्होंने कहा कि आपातकाल जैसे हालात दोबारा बनने से इंकार नहीं किया जा सकता, तो चर्चा का केंद्रबिंदु वह हो गए।’’

शिवसेना ने कहा कि आडवाणी 1975 में लगे आपातकाल के साक्षी हैं जब नेताओं को बिना पुख्ता वजहों के सलाखों के पीछे डाल दिया गया और देश में पूरी तरह अराजकता थी।

भाजपा की सहयोगी पार्टी ने कहा, ‘‘40 साल के बाद अचानक से किस वजह से आडवाणी को यह सोचना पड़ा कि आपातकाल फिर से लग सकता है और लोकतंत्र को कुचला जा सकता है?’’

शिवसेना ने आगे कहा कि आज के समय मीडिया, खासकर सोशल मीडिया बहुत मजबूत हो गया है और उस हालात की कल्पना करना मुश्किल है कि लोकतंत्र को कुचला जा सकता है।

शिवसेना ने कहा, ‘‘इसके साथ ही कोई आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता की टिप्पणी को नजरअंदाज नहीं कर सकता। अगर वह भाजपा के आंतरिक मामलों को लेकर संकेत देना चाहते हैं तो उनको स्पष्ट रूप से बोलना चाहिए। क्योंकि अतीत में मुरली मनोहर जोशी और कीर्ति आजाद जैसे नेता भी बोल चुके हैं।’’

आडवाणी ने हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा होने के बावजूद अभी के समय में जो ताकतें लोकतंत्र को कुचल सकती हैं, वे मजबूत हुई हैं।’’

पूर्व उपप्रधानमंत्री और अभी भाजपा के मागदर्शक मंडल के सदस्य आडवाणी ने कहा, ‘‘ आज, मैं यह नहीं कहता कि राजनीतिक नेतृत्व परिपक्व नहीं है। मुझे इसकी कमजोरियों के कारण विश्वास नहीं है। मुझे यह विश्वास नहीं है कि ऐसा (आपातकाल) फिर नहीं हो सकता है।’’

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  1. H
    H D
    Jun 26, 2015 at 6:03 pm
    Please pay attention towards senior citizen
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    1. उर्मिला.अशोक.शहा
      Jun 23, 2015 at 9:07 am
      वन्दे मातरम- कभी आपने सुना है बेटा बाप को मशवरा देता हो और तीर्थ स्वरुप से स्पष्टीकरण मांगता हो?लेकिन जब तक अपनी त्रासवादी क्षमता न दिखाए तबतक ऐसे महानुभावो को चैन नही आता महाराष्ट्र चुनाव में जनताने इनका अवतार चित्रित किया और इन्हे पिग्मी बनाकर अविश्व्स व्यक्त किया फिर भी अकल के तारे तोड़ने से बाज नहीं आते ऐसे मुँहजोर महामहोपाध्याय जो सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने हेतु ऐसी हरकते करते है जनता उन्हें कभी भी बर्दास्त नहीं करेगी क्यों की इनका पिंड ही पहलवान का है जा ग ते र हो
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      1. उर्मिला.अशोक.शहा
        Jun 23, 2015 at 8:59 am
        वन्दे मातरम- भाजप क्षमता को आजमाना तथाकथित मित्रो का व्यर्थ प्रयास रहता है.और मशवरा तभी देना चाहिए जब माँगा जाये लेकिन आधे अधूरे अनगिनत ऐसे नेता होते है जिन्हे राजनीती का ग म भ न गुठना जरुरी होता है जैसे पन्खोमे ताकत आते ही छोटे उड़ान भरने की चेष्टा करते है और गिराने के बाद दिनमे तारे नजर आते है ऐसे नेताओमें मुंबई के मोहोराम के शेरो का जिक्र आवश्यक बन जाता है उड़ान भरने से पहलेही आसमान की बुलन्दिओको मुठीमे करने का अहंकार जब झलकता है तभी उनके अकांक्षाओको पूर्ण विराम लग जाता है जा ग ते र हो
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        1. उर्मिला.अशोक.शहा
          Jun 23, 2015 at 8:47 am
          वन्दे मातरम-पूज्य आडवाणीजी एक समर्पित नेता की मिसाल है जब उनकी अगुवाई में देश का शासन तंत्र बदलना असफल हुआ तो मोदी जी को आजमाया गया और मोदी जी के बदले आडवाणी जी को फिरसे कमान सोपि जाती तो जिस उत्साह से लगन से मोदी जी ने मेहनत करके भ्रष्टाचारी शासन तंत्र बदलने का काम किया है वैसा आडवाणी जी करने में सफल नहीं होते और भ्रष्टाचारी फिरसे सत्ताधीश होते इस देश में जितने भी उप पंत प्रधान हुए वो पंत प्रधान नहीं बन सके फिरभी अडवाणी जी पूजनीय है और अपने बच्चोको क्षमा करे जा ग ते र हो
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