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शिंगणापुर मंदिर मुद्दा: प्रतिबंध के ख़िलाफ़ फड़णवीस के दरवाजे पर महिला संगठन ‘भूमाता’

अहमदनगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर में 400 महिला कार्यकर्ताओं की जबरन प्रवेश करने की कोशिश को पुलिस द्वारा विफल किये जाने के एक दिन बाद भूमाता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई ने देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात की
Author पुणे | January 28, 2016 03:49 am
अहमदनगर में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर में जुटी भीड़।

महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में पवित्र ‘चबूतरे’ में महिला श्रद्धालुओं के प्रवेश पर सदियों पुराने प्रतिबंध के खिलाफ अभियान का नेतृत्व कर रहे महिलाओं के संगठन ने पाबंदी हटाने के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस से मुलाकात की। अहमदनगर जिले में स्थित इस मंदिर में 400 महिला कार्यकर्ताओं की जबरन प्रवेश करने की कोशिश को पुलिस द्वारा विफल किये जाने के एक दिन बाद भूमाता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई ने यहां फड़णवीस से मुलाकात की और एक मांग पत्र सौंप कर लैंगिक पूर्वाग्रह खत्म करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने मंदिर में और राज्य में सभी पवित्र स्थलों पर बेरोक टोक प्रवेश देने की मांग भी की।

यहां एक कार्यक्रम से इतर फड़णवीस के साथ बैठक हुई। वहीं जिस स्थान पर मंदिर स्थित है उस गांव की ग्राम सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर देसाई और उनके द्वारा चबूतरे पर धावा बोलने की कोशिश की निंदा की। हालांकि, यह योजना उस वक्त नाकाम हो गई जब पुलिस ने यहां से 70 किलोमीटर दूर सुपा गांव में मार्च को रोक दिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखे जाने के बाद कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया।

शिंगणापुर की ग्राम सभा की एक बैठक में तृप्ति देसाई और उनके ब्रिगेड की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।
तनावपूर्ण माहौल के मद्देनजर कल वार्ता का समर्थन करने वाले फड़णवीस ने वहां से रवाना होने से पहले मांगों पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, देसाई ने संवाददाताओं से कहा कि फड़णवीस ने मांग के पक्ष में ही प्रतिक्रिया दी है क्योंकि उन्होंने एक सकारात्मक आश्वासन के साथ ज्ञापन स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि वह महिलाओं के उद्देश्यों को मजबूत करने के लिए अपनी पत्नी के साथ मंदिर जाएंगे।

मंदिर के ‘चबूतरे’ तक महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं देने की परंपरा के खिलाफ देसाई के नेतृत्व में 400 से अधिक महिलाओं ने एक आंदोलन छेड़ दिया है। इनमें ज्यादातर महिलाएं पुणे से हैं। वहां सिर्फ पुरुषों को शनि देव की पूजा अर्चना करने की इजाजत है।

फड़णवीस ने मंगलवार को मंदिर प्रशासन और कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत का समर्थन किया ताकि महिलाओं के मंदिर के भीतरी क्षेत्र स्थित पवित्र चबूतरे पर प्रवेश पर लगे प्रतिबंध पर रास्ता निकाला जा सके। फडणवीस ने कहा कि महिलाओं को पूजा करने का अधिकार है।

अपने पास गृह विभाग भी रखने वाले फड़णवीस ने कहा, ‘‘भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म महिलाआें को पूजा करने का अधिकार देता है। पूजा पाठ में भेदभाव हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। मंदिर अधिकारियों को वार्ता के जरिए मुद्दे का हल करना चाहिए।’’

कांग्रेस ने अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यह पूरे समाज का पवित्र कर्तव्य है कि ऐसे किसी कदम का समर्थन किया जाए। पार्टी महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने नयी दिल्ली में कहा कि यह सरकार की भी जिम्मेदारी है ताकि जो लोग इसमें समस्या पैदा कर रहे हैं उसे दूर किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘शनि शिंगणापुर में पूजा अर्चना के अधिकार पर जोर देने वाले महाराष्ट्र के एक महिला संगठन के कदम की मैं सराहना करता हूं।’’

उन्होंने कहा कि सदियों से हमारे देश में धर्म और दर्शन के क्षेत्र में महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है। बगैर किसी भेदभाव के ज्ञान और धर्म का दरवाजा हर किसी के लिए खोला जाना चाहिए।

महाराष्ट्र क्षेत्र कांग्रेस समिति के अध्यक्ष संजय निरूपम ने कहा कि वह शनि मंदिर में समान अधिकार को लेकर महिलाओं के आंदोलन का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि महिलाओं को सभी मंदिरों में समान अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं का सम्मान हमारा मुख्य मूल्य है। उन्हें अवश्य ही शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए।’’

इस बीच, नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से सार्वजनिक स्थानों पर जाति, धर्म और लिंग के आधार पर किसी तरह के भेदभाव के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोजपा अहमदनगर जिले में इस मंदिर में पूजा अर्चना के लिए महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ है।

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