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अवार्ड लौटाने वाली शबनम हाशमी बोलीं – नरेंद्र मोदी से कभी बात नहीं करूंगी, मैंने उनका गुजरात वाला रूप देखा है

जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने मंगलवार (27 जून) को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार वापस कर दिया।
जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी

जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने मंगलवार (27 जून) को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार वापस कर दिया। उन्होंने कहा कि वह यह पुरस्कार हाल ही में भीड़ द्वारा ‘‘पीट पीटकर हत्याओं ’’ की घटनाओं के विरोध में वापस कर रही हैं। शबनम हाशमी को यह पुरस्कार 2008 में मिला था। अवार्ड वापसी करते वक्त शबनम ने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुका है। उन्होंने आयोग के प्रमुख गयोरूल हसन रिजवी के हाल के बयानों की भी निंदा की। गयोरूल हसन रिजवी ने हाल में कहा था कि भारत के खिलाफ चैंपियंस ट्राफी में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वालों को पाकिस्तान ‘‘भेजा जाना’’ चाहिए। बीबीसी.कॉम को दिए इंटरव्यू में शबनम ने कहा कि 2002 की घटनाओं ने उनको एक अलग तरह की कार्यकर्ताओं बना दिया था। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी चाहे प्रधानमंत्री बन गए हों लेकिन उन्होंने मोदी का गुजरात वाला रूप देखा है और वह कभी भी उनसे बात नहीं करेंगी।

ट्विटर पर शबनम को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही हैं। कुछ लोग उनके समर्थन में हैं तो कई उनको ‘अवार्ड वापसी गैंग’ का हिस्सा बता रहे हैं। कुछ लोगों ने पिछले साल देश में बढ़ती असहिष्णुता की बात कहकर उनको मिले विभिन्न अवार्ड वापस किए थे जिसके बाद उनके विरोधी लोगों ने उनको ‘अवार्ड वापसी गैंग’ कहना शुरू कर दिया था।

बीजेपी की महिला मोर्चा की सदस्य प्रीति गांधी ने ट्वीट कर शबनम के लिए लिखा, ‘..और अवार्ड वापसी गैंग वापस आ गया है और इस बार उनका नेता कोई और नहीं शबनम हाशमी हैं।’ बीजेपी सांसद परेश रावल ने भी प्रीत गांधी का समर्थन करते हुए उनके ट्वीट को शेयर किया। इसके अलावा कुछ लोगों का कहना है कि शबनम हाशमी ने उनके एनजीओ का विदेशी से चंदा ले सकने वाला लाइसेंस कैंसल होने के चलते अवार्ड वापस किया है। पिछले साल 15 दिसबंर 2016 को खबर आई थी कि गृह मंत्रालय ने शबनम के एनजीओ ‘एक्ट नाऊ फॉर हारमोनी एंड डेमोक्रेसी’ ANHD का विदेशी धन लाइसेंस कैंसल कर दिया था। शबनम के समर्थन वाले लोग उनके अवार्ड वापस करने की खबर को शेयर कर रहे हैं।

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  1. लक्ष्मीकान्त
    Jun 29, 2017 at 8:23 am
    शबनम जी, आपकी दुकान बंद हो गयी इसलिए आप तिलमिला रही हो एकाध शब्द अयूब पंडित पर भी बोल देती | कमी आप में नहीं आपके खून में है आप इंसान तो बहुत अच्छी है कि आपके भाई को खान्ग्रेस्सियों ने मार डाला और उसके बदले खान्ग्रेस ने आपको अवार्ड से नवाज दिया | आपने भी सोचा भाई गया तो क्या हुआ मेरी दूकान तो चल पड़ी | लेकिन सत्ता बदलते ही आपकी दूकान बंद हो गयी | बढ़िया है
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    Reply
    1. A
      Arvind Gupta
      Jun 28, 2017 at 5:04 pm
      शबनम हाशमी ने अपना अवार्ड वापस कर दिया ये तो होना ही था बहाना बना जुनेद की हत्या ये मोहतरमा १९८१ से तथाकथित समाज सेवा कर रही है २००२ मे गुजरात दंगो के बाद की सेवा से इनका असली चेहरा सामने आ गया ये खुल कर सिर्फ एक काम पर फोकस करती रही मोदी विरोध एक एनजीओ खोला जिसके जरिये विदेशो से मोटी रकम लेने लगी ,मोदी विरोध का पुरुस्कार अल्पसंख्यको से जुडा अवार्ड कांग्रेस ने दीया जैसे और मोदी विरोधी गैंग को दिया .2014 मे मोदी देश के प्रधानमंत्री बने मैडम को हज़म नही हुआ,कह दिया मोदी मेरे प्रतिनिधी नही है वो मेरे पीएम नही है सच कमे उनके प्रतिनिधी तो हाफिज सईद जैसे है फिर बिहार चुनाव का माहोल बनना शुरु हो गया अवार्ड वापसी गैंग सक्रिय हो गया यूपी के अखलाक को लेकर मोदी विरोधी माहोल बनाना शुरु कर दिया गया उस समय यूपी मे सपा की सरकार थी अवार्ड वापस होने लगे मगर तब भी इन शबनम ने अवार्ड वापस नही किया क्यु ?? इसलिये उस समय तक उनके एंजीओ को विदेशो से भी फंड मिलना जारी था नवम्बर २०१६ मे फंड मिलने पर रोक लगी और वो अवार्ड वापसी का नाटक करने लगी डीएसपी अयूब के कत्ल पर खामोश रही,ये है इसका असली चेहरा
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      1. R
        rags
        Jun 28, 2017 at 3:27 pm
        अवार्ड वापसी तो बहाना है congress को sansad में लाना है................. जब कश्मीर में माइनॉरिटीज पे ह े हुए तब कहा थी... जब गोदरा ट्रैन जलाई जाहिलो ने तब कहा थी.......... जब मंदिरों पे ह े किये माइनॉरिटीज ने तब कहा थी......... जब वेस्ट बंगाल में दंगे हुए तब कहा मरी हुई थी........... जब असम जल रहा था तब कहा थी......... एक आड़ को भीड़ ने मार डाला तो बहुत तकलीफ होने लगी..... क्यों मार रहे है ये सोंचा कभी.... आयी बड़ी अवार्ड वापिस करने वाली........... अवार्ड के पैसे भी वापस कर और पाकिस्तान चली जा... ये सब उस गाँधी की देंन है.... जब वारा हुआ तो पूरी आबादी का अदला बदला करना चाहिए था... पर उस गाँधी को तो महान बनना था... तो नहीं होने दिया आबादी का अदला बदला.... कितना अच्छा होता इंडिया में सिर्फ हिन्दू रहते...... सब सुखी होते आज...... और भारत माता के हाथ काटने वालो को इस देश ने राष्ट्रपिता बना डाला वह रे मेरे भारत वासियों
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        सबरंग