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गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल होगा भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए सजा की अवधि पांच साल से बढ़ाकर सात साल करने का प्रावधान है।
महंगा पड़ेगा रईसी दिखाना

भ्रष्टाचार को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए सजा की अवधि पांच साल से बढ़ाकर सात साल करने का प्रावधान है। कंपनी कानून में संशोधन को हरी झंडी दिखा दी गई है। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत मिलने वाली 1000 रुपए की न्यूनतम पेंशन आगे भी जारी रहेगी। स्मार्ट सिटी परियोजना को भी मंजूरी दे दी गई है।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में प्रस्तावित संशोधनों में घूसखोरी के अपराध में रिश्वत देने और रिश्वत लेने वाले दोनों के लिए अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है। कैबिनेट की बैठक के बाद जारी सरकारी बयान के मुताबिक, सजा के प्रावधानों को न्यूनतम छह माह के बजाए तीन साल और अधिकतम पांच साल के बजाए सात साल की सजा होगी। सात साल की सजा होने पर भ्रष्टाचार गंभीर अपराधों की श्रेणी में आ जाएगा। भ्रष्टाचार के मामलों के जल्द निपटारे के लिए दो साल की समय-सीमा तय करने का भी प्रावधान है।

बयान के मुताबिक, पिछले चार साल में भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों से जुड़े मामलों के निपटारे में औसतन आठ साल से अधिक समय लगा। दो साल के भीतर मुकदमा खत्म करके इस तरह के मामलों को जल्द निपटाने का प्रस्ताव किया गया है। किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा आधिकारिक कामकाज अथवा दायित्वों के निर्वहन में की गई सिफारिशों अथवा किए गए फैसलों से जुड़े अपराधों की जांच के लिए, जैसा भी अपराध हो उसके अनुरूप लोकपाल या लोकायुक्त से जांच पड़ताल के लिए पूर्व मंजूरी लेना जरूरी होगा।

कैबिनेट के बुधवार को मंजूर किए गए संशोधन भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 का हिस्सा होंगे, जो राज्यसभा में लंबित है। यह वाणिज्यिक संगठनों को उनसे जुड़े लोगों को सरकारी कर्मचारी को घूस न देने के दिशानिर्देश भी प्रदान करेंगे। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए किए गए इन आधिकारिक संशोधनों में कुर्की का अधिकार जिला अदालत के बजाए सुनवाई अदालत (विशेष जज) के सुपुर्द करने का भी प्रावधान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर रईसी का दिखावा आपराधिक कदाचार माना जाएगा और बेहिसाब माल असबाब की मिल्कियत को इस तरह की अवैध रईसी का सबूत समझा जाएगा। धन के अलावा अन्य तरीकों से की जाने वाली घूसखोरी को भी घूसखोरी शब्द की परिभाषा में शामिल किया गया है। प्रस्तावित संशोधन में एक लोकसेवक के दायित्वों की परिभाषा को भी शामिल किया गया है।

संशोधन विधेयक में शामिल किए जाने वाले प्रस्तावित स्पष्टीकरण के अनुसार, एक लोकसेवक का दायित्व इस तरह से वर्णित किया गया है, जो लोकसेवकों को एक सांविधिक दायित्व अथवा नियमों, सरकारी नीतियों, कार्यपालक निर्देशों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने से रोकता है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में तैयार किया गया था। लेकिन बाद में सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने के लिए इसमें कुछ संशोधनों का प्रावधान किया और भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 को 19 अगस्त 2013 को राज्यसभा में पेश किया गया।

विभाग से संबद्ध संसदीय स्थायी समिति ने पिछले साल छह फरवरी को राज्यसभा में इस विधेयक से संबंधित अपनी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन विधेयक पारित नहीं हो पाया। बयान के अनुसार विधेयक में चूंकि घूसखोरी से जुड़े अपराधों को परिभाषित करने में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं इसलिए प्रस्तावित संशोधनों पर भारत के विधि आयोग की राय भी ली गई है। इसके साथ ही विधेयक में उन्हीं संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है, जिनकी संस्तुति भारत के विधि आयोग ने अपनी 254वीं रिपोर्ट में की है।

सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत पेंशनभोगियों को न्यूनतम 1,000 रुपए मासिक की पेंशन देने की योजना को स्थायी रूप से मंजूर कर दिया। इससे 20 लाख लोगों को फायदा होगा। अभी यह योजना पिछले माह तक प्रभावी थी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पहली अप्रैल से इस योजना को निलंबित कर रखा था, क्योंकि उसे इस योजना को 31 मार्च से आगे जारी रखने के विषय में कोई निर्देश नहीं मिला था। यह योजना पिछले साल सितंबर में शुरू की गई थी और इसमें न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए मासिक तय की गई थी। इससे पहले बहुत से कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद इससे भी कम पेंशन मिल रही थी।

देश में कारोबार करना सुगम बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने कंपनी कानून में संशोधन के कुछ प्रस्तावों को मंजूरी दी जिससे एक कंपनी को कारोबार शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से एक ब्योरा प्रस्तुत करने से मुक्ति मिल जाएगी।

इसके अलावा कंपनी कानून के विभिन्न प्रावधानों से छूट देने के उद्देश्य से जारी किए जाने वाले अधिसूचना के मसविदों के लिए मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने को भी मंजूरी दी गई है। ये संशोधन अब कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2014 में शामिल किए जाएंगे। इन संशोधनों में कंपनी द्वारा कारोबार शुरू करने या उधार लेने के अधिकारों का उपयोग करने से पहले एक ब्योरा दाखिल करने की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव भी शामिल शामिल है।

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि इन आधिकारिक संशोधनों से कारोबार करने में सुगमता से जुड़े मुद्दे हल होंगे और कंपनियों के एक वर्ग के लिए कानून के विशेष प्रावधानों से छूट आदि मुहैया कराने के लिए अधिसूचना के मसविदे को मंजूरी के लिए प्रक्रिया में तेजी तय होगी। सरकार ने कहा है कि वह चाहती है कि कारोबार करना आसान बनाने के मामले में भारत की स्थिति सुधरे और देश शीर्ष 50 में शामिल हो। मौजूदा समय में देश 142वें पायदान पर है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजग सरकार की प्रमुख 100 स्मार्ट सिटी परियोजना को मंजूरी दे दी। इसके अलावा नए शहरी नवीकरण मिशन को भी हरी झंडी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल एक लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा। शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन परियोजनाओं पर क्रमश: 48,000 करोड़ रुपए व 50,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

स्मार्ट सिटी प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका मकसद शहरों को रहने के अधिक योग्य बनाना और आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन देना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत चुने गए प्रत्येक शहर को पांच साल तक हर वर्ष 100 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मिलेगी।

स्मार्ट सिटी बनने की चाह रखने वालों का चयन ‘सिटी चैलेंज प्रतियोगिता’ के जरिए किया जाएगा। प्रत्येक राज्य कुछ निश्चित संख्या में नियमों के तहत ऐसे शहरों का चयन करेगा और वे स्मार्ट सिटी प्रस्ताव तैयार करेंगे, जिसे केंद्रीय मदद के लिए आगे भेजा जाएगा। अगले पांच साल के लिए इन दो मिशनों के तहत केंद्रीय खर्च आपस में संबद्ध है और यह इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि जेएनएनयूआरएम के लिए 2005 से 2014 के दौरान 42,900 करोड़ रुपए के योजना व्यय को मंजूरी दी गई है। इसमें से सिर्फ 36,398 करोड़ रुपए की केंद्रीय मदद जारी की गई है।

यही नहीं राज्य और शहरी स्थानीय निकाय पीपीपी मॉडल के तहत उल्लेखनीय मात्रा में निजी निवेश जुटाएंगे जिससे परियोजना की लागत को पूरा किया जा सके। स्मार्ट सिटी कार्रवाई योजना के लिए प्रत्येक शहर के लिए विशेष इकाई (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए शहरी स्थानीय निकाय, राज्य सरकार व केंद्र के बीच एसपीवी के लिए दस्तखत किए जाएंगे। देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने के पीछे उपलब्ध संसाधनों और ढांचागत सुविधाओं का कुशल और स्मार्ट निदान अपनाने को प्रोत्साहित करना मकसद है ताकि शहरी जीवन को बेहतर बनाया जा सके और स्वच्छ व बेहतर परिवेश मुहैया कराया जा सके।

कैबिनेट ने क्षतिपूरक वनीकरण कोष विधेयक 2015 को मंजूरी दे दी, जो गैर वन उद्देश्यों में बदली गई वन भूमि के लिए जारी कोष के पारदर्शी ढंग से त्वरित उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की दो नई बटालियनों को मंजूरी दी जिसमें 2,000 जवान होंगे। कैबिनेट ने मौजूदा एनडीआरएफ की इकाइयों की मजबूती के लिए सीमा की हिफाजत में तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की दो अतिरिक्त बटालियनों को तब्दील किए जाने की मंजूरी दी। भूकम्प की चपेट में आए नेपाल और भारत के कुछ प्रभावित हिस्सों में बचाव अभियान चला रही एनडीआरएफ की अभी दस बटालियनें हैं। दो नई बटालियनें वाराणसी और अरुणाचल प्रदेश में तैनात होंगी।

एसएसबी की इन दो अतिरिक्त बटालियनों को एनडीआरएफ बटालियनों में परिवर्तित किए जाने का उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में आपदा की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया उपलब्ध कराना और मौजूदा एनडीआरएफ बटालियनों की क्षमता बढ़ाना है। वाराणसी और अरुणाचल प्रदेश में इन दो एनडीआरएफ बटालियनों की तैनाती किए जाने से एनडीआरएफ की तैनाती संबंधी विशाल अंतर को कम किए जाने में मदद मिलेगी।

अभी एनडीआरएफ बटालियनें गुवाहाटी (असम), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), कटक (ओड़िशा), वेल्लोर (तमिलनाडु), पुणे (महाराष्ट्र), गांधीनगर (गुजरात), बठिंडा (पंजाब), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), पटना (बिहार) और विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में तैनात हैं।

सरकार ने समुद्री जहाजों में इस्तेमाल होने वाले बलास्ट वाटर व तलछट से पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए वैश्विक घोषणा पत्र की तर्ज पर वाणिज्यिक नौवहन अधिनियम में संशोधन के लिए मर्चेंट शिपिंग (संशोधन) विधेयक, 2015 पेश करने को मंजूरी दे दी। ब्लास्ट वाटर न रखने के लिए बनाए गए जहाजों, लड़ाकू जहाजों, नौसेना के सहायक पोत और सरकार के स्वामित्व वाले अन्य गैर वाणिज्यिक पोतों को इससे छूट होगी। ब्लास्ट वाटर जहाजों की पेंदी में स्थापित एक पानी की टंकी होती है। यह पानी जहाजों को संतुलित रखने के प्रयोजन से रखा जाता है। मौजूदा पोतों को ब्लास्टवाटर और तलछट के प्रबंध की नई व्यवस्था अपनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करने का समय दिया जाएगा।

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