December 03, 2016

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विदेश में धन भिजवाने में न मनमोहन पीछे न मोदी

काला धन खत्म करने के वादे और अभियान के शोर के बीच देश से करोड़ों डॉलर की रकम विदेश भेज दी गई है।

Author नई दिल्ली | November 15, 2016 02:13 am
जापान: कोबे में भारतीय लोगों के सामने बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो-ANI)

दीपक रस्तोगी

काला धन खत्म करने के वादे और अभियान के शोर के बीच देश से करोड़ों डॉलर की रकम विदेश भेज दी गई है। विदेशों में उपहार, दान, चिकित्सा, स्वयंसेवी संगठनों द्वारा परोपकारी कार्य, शिक्षा और अन्य कई मदों के बहाने करोड़ों रुपए बाहर भिजवाने में सत्ता में बैठी कोई सरकार पीछे नहीं रही। न तो यूपीए के जमाने की मनमोहन सिंह सरकार और न ही मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार।

काला धन को खत्म करने के इस हल्लाबोल के बीच रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया का एक दस्तावेज केंद्र में सत्ता पर काबिज लोगों की नीयत पर सवाल उठा रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक की अवधि में ही 4.6 बिलियन डॉलर की रकम विभिन्न दस्तावेजों आड़ में बाहर भेज दी गई है।  इस तरह के धन विनिमय पर कर में छूट मिलता है। रिजर्व बैंक ने अपनी ‘लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस)’ के बारे में विदेशी मुद्रा विनिमय से जुड़े सभी संस्थानों के लिए परिपत्र जारी किया। एलआरएस योजना के लिए मुख्य निर्देश जारी किए गए। चार फरवरी, 2004 को अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने यह योजना चालू की थी, जिससे यहां के नागरिक विदेशों में रहने वाले अपने पहचान वालों को आसान शर्तों पर रिजर्व बैंक के जरिए धन भेज सकें। केंद्र सरकार ने उसी साल 23 मार्च को इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी। तब से अब तक छह बार विदेशों में धन भेजने की रकम के बारे में संशोधन किया जा चुका है। हर संशोधन के साथ रकम कम से कम दोगुनी तो की ही गई है।

जब यह योजना चालू की गई थी, तब यानी चार फरवरी, 2004 को एलआरएस लिमिट 25 हजार अमेरिकी डॉलर रखी गई थी। यूपीए के जमाने में तत्कालीन बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 20 दिसंबर, 2006 को संशोधन कर यह सीमा बढ़ाकर 50 हजार अमेरिकी डॉलर कर दी। छह महीने बाद यानी, आठ मई 2007 को राशि सीमा एक लाख अमेरिकी डॉलर कर दी गई। उसी साल पांच महीने बाद ही सीमा बढ़ाकर दो लाख अमेरिकी डॉलर कर दी गई। हालांकि, मनमोहन सिंह की सरकार ने अपने आखिरी वर्षों में अचानक इस राशि में भारी कटौती करते हुए 14 अगस्त, 2013 को इसकी सीमा 75 हजार अमेरिकी डॉलर तय कर दी थी।

इस राशि में बदलाव नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने किया। मोदी की सरकार बनने के महीने भर के भीतर ही विदेश में धन भेजने की राशि सीमा बढ़ाकर सवा लाख डॉलर कर दी गई। एक साल बाद यानी, 26 मई 2015 को यह लिमिट ढाई लाख डॉलर कर दी गई। मोदी की सरकार आने के बाद इस मद में राशि सीमा में 130 फीसद की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में 2013 में इस रास्ते विदेश भेजे जाने वाली जो रकम 10,400 करोड़ हुआ करती थी, वह 2015-16 में बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपए हो गई।

रिजर्व बैंक के ताजा नियमों के अनुसार, विदेश में रहने वाले किसी व्यक्ति को इन पांच मदों में एलआरएस के तहत धन भेजने का प्रावधान है-1. उसे विदेश में विदेशी मुद्रा खाता खोलना हो, 2. विदेश में संपत्ति खरीदनी हो, 3. विदेशी कंपनी में निवेश करना हो या उसका अधिग्रहण करना हो, 4. विदेश में अपनी कंपनी या संयुक्त उपक्रम खोलना हो, या फिर, 5. कोई अपने रिश्तेदार के कारोबार में या परोपकार कार्य (एनजीओ) में मदद करना चाहे। इसके अलावा, निजी दौरों में, विदेशों में उपहार देने, रोजगार की तलाश में विदेश जाने, आव्रजन, किसी करीबी रिश्तेदार को जरूरत में मदद करने, कारोबारी यात्रा करने, इलाज के लिए, शिक्षा के मद में खर्च आदि के लिए विदेशों में आरबीआइ के जरिए धन भेजने की छूट है।

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First Published on November 15, 2016 2:13 am

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