December 11, 2016

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भारत-बांग्लादेश सीमा पर पकड़े गए संदिग्ध सिग्नल, हैम रेडियो आॅपरेटर 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात

बंगाल एमेच्योर रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास ने बताया यह एक संदिग्ध घटना है और सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

Author कोलकाता | October 24, 2016 02:12 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

पिछले कुछ महीनों के दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा पर बांग्ला और उर्दू भाषा में कूट सिग्नल मिलने के बाद यह संदेह जताया जा रहा है कि क्या चरमपंथी अपने संवाद के लिए इस गैरपरांपरागत तरीके का उपयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने कूट भाषा वाले इन सिग्नलों के मद्देनजर हैम रेडियो आॅपरेटरों को चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात कर दिया है। ऐसे सिग्नलों के बारे में सबसे पहले जून में पता चला था। तब इन रेडियो सिग्नलों और अनधिकृत रेडियो संवादों को शौकिया हैम रेडियो आॅपरेटरों ने बशीरहाट और सुंदरबन क्षेत्र में पकड़ा था।  बांग्ला और उर्दू भाषा के इन कूट सिग्नलों के पकड़ में आने पर आॅपरेटरों ने केंद्र को सूचित किया। इसके बाद उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी केंद्र में बुलाया गया और सिग्नलों पर नजर रखने को कहा गया।

अब 23 हैम रेडियो आॅपरेटरों का एक दल चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात है और इन रेडियो सिग्नलों की वास्तविक लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रहा है। बंगाल एमेच्योर रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास ने बताया ‘यह एक संदिग्ध घटना है और सुरक्षा के लिए भी खतरा है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब भी हमने उनसे बात करने की कोशिश की, उन्होेंने अपनी बातचीत रोक दी। कुछ समय के अंतराल के बाद वह फिर सांकेतिक बांग्ला और उर्दू भाषा में अपना संवाद शुरू कर देते हैं।’ विश्वास ने बताया ‘जो लोग इस रेडियो फ्रिक्वेंसी पर बात करते हैं उनका स्पष्ट बांग्लादेशी लहजा है। मैंने अपने रेडियो क्लब के सदस्यों को सतर्क किया और उन्होंने भी ऐसे संवाद सुने। इस तरह का संवाद जून में शुरू हुआ और दुर्गा पूजा तक चला।’ उन्होंने कहा कि यह घटना सामने आने के बाद उन्होंने केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को लिखा और अनजान सिग्नलों और सांकेतिक भाषा वाले संदिग्ध संवाद के बारे में बताया।

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विश्वास ने कहा ‘केंद्रीय मंत्रालय को पत्र भेजने के बाद हमने अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्टेशन के अधिकारियों की कोलकाता में एक बैठक बुलाई जिसमें अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। हमने उन्हें पूरी बात बताई। हमसे सतत निगरानी करने और संवाद के स्रोत का पता लगाने की कोशिश करने को कहा गया।’ कई दिनों की कोशिश के बाद विश्वास और उनके दल को रेडियो संवादों की लोकेशन नॉर्थ 24 परगना के बासिरहाट इलाके और साउथ 24 परगना के सुंदरबन में मिली। विश्वास ने बताया ‘ऐसे संवाद रात को होते हैं और इनका स्रोत भारत बांग्लादेश के सीमाई इलाकों में है।’ संवाद के संदिग्ध होने के बारे में पूछने पर विश्वास ने बताया कि 2002-03 के दौरान भी उन्होंने ऐसे संवाद पकड़े थे और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और पुलिस को सूचित किया। बुद्धदेव के आदेश पर सिग्नलों का पता लगाने के बाद पुलिस ने साउथ 24 परगना के गंगासागर से छह चरमपंथियों को गिरफ्तार किया था। राज्य के आइबी अधिकारी इस बात से इनकार नहीं करते कि आतंकी संगठन मोबाइल नेटवर्कों को निगरानी पर रखे जाने के बाद आपस में संवाद करने के लिए इस तरह की फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

 

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First Published on October 24, 2016 2:12 am

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