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गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करनेवालों को मिले जुर्माने के साथ दो साल से ज्यादा की जेल: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को जुर्माने के साथ दो साल से ज्यादा की सजा दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अब यह समय की जरूरत बन चुकी है कि मोटर व्हिकल ऐक्ट में सजा के प्रावधानों में संशोधन हो।
सुप्रीम कोर्ट ने ड्राइविंग के वक्त मोबाइल पर बात करनेवालों को सख्त से सख्त सजा देने की वकालत की है। (प्रतीकात्मक चित्र)

सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करनेवालों को सख्त से सख्त सजा देने की वकालत की है। कोर्ट ने सरकार से कहा है इस मामले में अगर कानून में बदलाव की जरूरत पड़ती है तो उसे किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग न केवल सड़क पर स्पीड और रोमांच का कम्पीटिशन करते हैं बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डालते हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा की इस टिप्पणी का अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी समर्थन किया और कहा कि खतरनाक ड्राइविंग करनेवालों के लिए मौजूदा मोटर व्हिकल एक्ट में कम सजा का प्रावधान है जिसे संशोधित कर बढ़ाया जाना चाहिए। जस्टिस मिश्रा की बेंच रैश ड्राइविंग के एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को जुर्माने के साथ दो साल से ज्यादा की सजा दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अब यह समय की जरूरत बन चुकी है कि मोटर व्हिकल ऐक्ट में सजा के प्रावधानों में संशोधन हो। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि ‘कई ऐसे लोग हैं जो रोमांच के लिए गाड़ी को उंगलियों पर नचाते हैं। ऐसे लोग अन्य लोगों की जिंदगी की परवाह नहीं करते हैं।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘देश में गाड़ियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है इसलिए लोग सड़कों पर ही स्पीड की कम्पीटिशन करने लगते हैं।’ अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बेंच की टिप्पणी पर सहमति जताते हुए कहा कि रैश ड्राइविंग से हुई मौत के मामले में कठोरता से निपटने की जरूरत है लेकिन उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि IPC के सेक्शन 304A से यह संभव नहीं है क्योंकि लापरवाही से ड्राइविंग के केस में हुई मौत पर इस कानून के तहत दो साल की सजा का ही प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इसमें संशोधन की जरूरत है।

कोर्ट ने खतरनाक ड्राइविंग को काफी गंभीरता से लेते हुए अटॉर्नी जनरल से कहा कि आप यह सुनिश्चित कराएं कि किसी व्यक्ति की सनक, फैन्टेसी और दु:साहस का खामियाजा किसी मासूम को न भुगतना पड़े। कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि ऐसे मामलों में कुछ लोगों पर मोटर कानून की धारा 184 के तहत आरोप लगाए जाते हैं। इससे गुनहगार को कम से कम सजा मिल पाती है। इस धारा के तहत पहले अपराध पर अधिकतम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है जो बहुत कम है। दूसरी बार अपराध करने पर दो साल की सजा या 2000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

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