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संजीव चतुर्वेदी ने पीएमओ के कामकाज से निराशा जताई

कई घपलों का भंडाफोड़ करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वे केवल स्वतंत्र न्यायपालिका की वजह से ‘बच’ सके। चतुर्वेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए न कि ईमानदार अफसरों के खिलाफ। मैं प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज से निराश हूं।
कई घपलों का भंडाफोड़ करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज पर निराशा जताई है।

कई घपलों का भंडाफोड़ करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वे केवल स्वतंत्र न्यायपालिका की वजह से ‘बच’ सके। चतुर्वेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए न कि ईमानदार अफसरों के खिलाफ। मैं प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज से निराश हूं।

क्योंकि प्रधानमंत्री के कहे मुताबिक भ्रष्टाचार को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति के अनुरूप काम किया। मैंने इस संदेश को दिल से लिया और एम्स में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए निजी तौर पर खतरा उठाया।’

एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद से हटाए जाने से पहले वहां कथित घोटाले की छानबीन शुरू करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को इस साल के रेमन मैगसायसाय पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनके साथ ही स्वयंसेवी संस्था ‘गूंज’ के संस्थापक अंशु गुप्ता का भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी और फिलहाल एम्स में उप सचिव के पद पर काम कर रहे चतुर्वेदी (40) को ‘उभरते नेतृत्व’ श्रेणी के तहत उनकी बेमिसाल सत्यनिष्ठा, साहस और सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा करने में किसी तरह का समझौता नहीं करने की दृढ़ता व पूरी लगन व मेहनत के साथ भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने को लेकर इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।

जबकि दूसरे विजेता गुप्ता ने 1999 में स्वयंसेवी संस्था गूंज की स्थापना के लिए अपनी कॉरपोरेट की नौकरी छोड़ दी थी। उन्हें भारत में दान करने की संस्कृति को एक नया रूप देने और दुनिया को यह याद दिलाने के लिए चुना गया है कि कि सच्चा दान हमेशा मानव की गरिमा का सम्मान करता है और उसे बनाए रखता है। यह गैर सरकारी संगठन पुराने कपड़ों और घर-गृहस्थी के सामान को इकट्ठा करता है और उसे जरूरतमंद लोगों के बीच बांटता है।

पुरस्कार पर अपनी प्रतिक्रिया में चतुर्वेदी ने कहा कि यह ईमानदार अफसरों का मनबोल बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि वे एक स्वतंत्र न्यायपालिका के कारण ही टिके हुए हैं।

चतुर्वेदी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय से काफी निराश हुए और उन्होंने ताकतवर लोगों की कथित संलिप्तता वाले भ्रष्टाचार के कई मामलों में कार्रवाई की। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ जैसे नारों से प्रेरणा हासिल की। मैं तनिक भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति के साथ काम करता हूं। जैसा कि प्रधानमंत्री ने सिद्धांत दिया है। मैंने इस संदेश को आत्मसात किया और एम्स में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए पर्याप्त निजी जोखिम भी उठाए।

पिछले पांच साल में चतुर्वेदी का 12 बार तबादला हुआ है। उन्होंने हरियाणा सरकार में रहने के दौरान भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया कि हालांकि उन्होंने एम्स में कथित अनियमितता के बारे में दस्तावेजी साक्ष्य पीएमओ को भेज कर दोषियों को दंडित करने के लिए एक निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं किया गया और उन्हें प्रताड़ित करने पर जोर दिया गया।

पुरस्कार की घोषणा करते हुए रेमन मैगसायसाय अवार्ड फाउंडेशन ने चतुर्वेदी को भारत की जनता के लिए सरकार के ईमानदारी से काम करने को सुनिश्चित करने को लेकर उन्हें दृढ़ कौशल वाले कार्यक्रम और प्रणाली को बेहतर करने का भी श्रेय दिया। उन्हें पिछले साल अगस्त में एम्स के मुख्य सतर्कता आयुक्त के पद से हटा दिया गया था।

इस पुरस्कार से पहले ही नवाजे जा चुके दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फरवरी में केंद्र को पत्र लिख कर चतुर्वेदी को दिल्ली सरकार में स्थानांतरित करने की मांग की थी। केंद्र ने अभी तक इस अनुरोध पर कोई फैसला नहीं किया है।

उधर, गुप्ता ने कहा कि एनजीओ के हजारों स्वयंसेवियों के काम को यह पुरस्कार मान्यता देता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए तीन जरूरी चीजें हैं-रोटी, कपड़ा और मकान लेकिन दुर्भाग्य से कपड़ा पुण्य कमाने की एक वस्तु बन गई है। हम इसे विकास का विषय बनाना चाहते हैं, कुछ ऐसा कि सरकारी एजंसियां सचमुच में इसकी जरूरत पर गौर करें।

रेमन मैगसायसाय अवॉर्ड फाउंडेशन के न्यास बोर्ड की घोषणा के मुताबिक इस पुरस्कार के लिए चुने गए तीन अन्य लोगों में लाओस के कोमाली चांथावोंग, फिलीपीन के लिगाया फर्नांडे अमिलबांग्सा और म्यांमा के क्याउ तू शामिल हैं। इस पुरस्कार की शुरुआत 1957 में की गई थी। इसे एशिया का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार फिलीपीन के तीसरे राष्ट्रपति रेमन मैगसायसाय की याद में दिया जाता है।

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  1. R
    Rohit Kumar
    Jul 30, 2015 at 4:21 pm
    'स्वच्छ भारत' केवल झाडू लगाने से नहीं हो जाता बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी होगी। अपनी कार्यप्रणाली बदलनी होगी और लाल फीताशाही पर रोक लगानी होगी। मोदी सरकार से बहुत आशाएं रही हैं। संजीव चतुर्वेदी एक कर्मठ भारतीय अधिकारी हैं, उन्हें उनकी ईमानदारी के लिए सम्मानित करने की बजाए क्यों हर बार प्रताड़ित किया जाता है? किसी अधिकारी का पांच साल में 12 बार तबादला होने के क्या मायने हैं?
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  2. J
    jagannath patil
    Jul 30, 2015 at 11:00 am
    कई घपलों का भंडाफोड़ करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वे केवल स्वतंत्र न्यायपालिका की वजह से ‘बच’ सके। चतुर्वेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए न कि ईमानदार अफसरों के खिलाफ। मैं प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज से निराश हूं। - इस टिपण्णीसे प्रधानमंत्री जी ने स्वयं सज्ञान लेना चाहिए !
    Reply
  3. J
    jagannath patil
    Jul 30, 2015 at 10:56 am
    मानव जीवन के लिए तीन जरूरी चीजें हैं-रोटी, कपड़ा और मकान लेकिन दुर्भाग्य से - रोटी, कपड़ा यह पुण्य कमाने जरिया बन गये है। हम इसे विकास का विषय बनाना चाहिये, कुछ ऐसा कि प्रधानमंत्री और सरकारी एजंसियां सचमुच में इसकी जरूरत पर गौर करें। - See more at:
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