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कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने सपा के पूर्व सांसद अतीक अहमद को किया गिरफ्तार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माफिया से नेता बने अहमद को प्राथमिकी दर्ज करने के एक महीने बाद भी गिरफ्तार नहीं करने को लेकर जिला पुलिस को फटकार लगाई थी ।
अतीक अहमद इलाहाबाद की फूलपूर सीट से सांसद रह चुके हैं। (एजेंसी फाइल फोटो)

इलाहाबाद के बाहरी इलाके में एक कृषि संस्थान के कर्मचारियों पर हाल में हुए कथित हमले के मामले में शनिवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद अतीक अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई जब शुक्रवार को ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माफिया से नेता बने अहमद को प्राथमिकी दर्ज करने के एक महीने बाद भी गिरफ्तार नहीं करने को लेकर जिला पुलिस को फटकार लगाई थी ।

इलाहाबाद के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार राय ने बताया, ‘अहमद को नैनी पुलिस थाने में गिरफ्तार किया गया, जहां आज दोपहर वह पिछले साल दिसंबर में एसएचआईएटीएस कृषि संस्थान के कर्मचारियों की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के सिलसिले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए गए थे। उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल भेजने से पहले एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।’ बीते 14 दिसंबर को कृषि संस्थान के कर्मचारियों पर कथित हमले के सिलसिले में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में अहमद के साथ-साथ उनके कई समर्थकों को भी नामजद किया गया था।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी बी भोसले की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने अहमद को गिरफ्तार करने में नाकाम रहने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने अहमद के आपराधिक इतिहास से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए थे और आदेश दिया था कि मामले के सभी आरोपियों को मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 फरवरी तक गिरफ्तार किया जाए ।

न्यायालय ने पुलिस को चेतावनी दी थी कि यदि अहमद को जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह मामले की छानबीन का जिम्मा ‘किसी और एजेंसी’ को सौंपने पर विचार कर सकता है। यह बताए जाने पर कि फूलपुर से पूर्व सांसद अहमद ने इलाहाबाद की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण याचिका दायर की है, न्यायालय ने साफ कर दिया कि यदि वह ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें यह ‘इस न्यायालय के समक्ष करना होगा, किसी और अदालत में नहीं ।’

उच्च न्यायालय कृषि संस्थान के कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मांग की गई कि प्रशासन को उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए जाएं। न्यायालय ने याचिका वापस लेने के संस्थान के प्रॉक्टर के अनुरोध को कल ठुकरा दिया था और कहा था, ‘यदि आप मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते तो हम इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनेंगे और स्वत: आगे की कार्यवाही करेंगे।’

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  1. A
    Ajij mohammad
    Feb 12, 2017 at 4:45 am
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