मजबूत विपक्ष के लिए एक होगा पुराना जनता परिवार

Samajwadi Party chief Mulayam Singh Yadav anata Parivar
कभी जनता परिवार का हिस्सा रहीं छह राजनीतिक पार्टियां जल्द ही एक पार्टी का रूप ले लेंगी (फोटो: भाषा)

विपक्ष की ताकत को मजबूती देने के प्रयास के तहत कभी जनता परिवार का हिस्सा रहीं छह राजनीतिक पार्टियां जल्द ही एक पार्टी का रूप ले लेंगी। इन पार्टियों के नेताओं ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव को इस बारे में तौर-तरीके तय करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सपा, जनता दल (सेकुलर), राष्ट्रीय जनता दल, जद (एकी), इंडियन नेशनल लोकदल और समाजवादी जनता पार्टी विदेश में जमा कालाधन लाने में मोदी सरकार की नाकामी और किसानों के मुद्दे व बढ़ती बेरोजगारी पर कथित यूटर्न के खिलाफ आगामी 22 दिसंबर को धरना देंगे।

जद (एकी) के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से कहा कि इन छह पार्टियों ने गुरुवार को मुलायम सिंह के आधिकारिक आवास पर हुई बैठक में सपा प्रमुख को अधिकृत किया कि वे विलय के जरिए इन दलों को एक करने के तौर-तरीकों पर काम करें। कुमार ने कहा कि सभी ने महसूस किया है कि एक पार्टी होनी चाहिए क्योंकि इन सभी के दर्शन और सिद्धांत एक हैं। यह पूछे जाने पर कि कहीं इन दलों के हाथ मिलाने की वजह नरेंद्र मोदी का भय है तो कुमार ने कहा कि मामला यह नहीं है। लेकिन मकसद यह है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में एक मंच का गठन किया जाए।

नीतीश ने कहा कि ये छह राजनीतिक दल वाम मोर्चे जैसी राजनीतिक इकाइयों के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। उन्होंने इस बारे में आगे विवरण नहीं दिया। मुलायम के आवास पर हुई बैठक में उनके और नीतीश के अलावा राजद प्रमुख लालू प्रसाद, जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव, सपा नेता रामगोपाल यादव, जद (सेकु) नेता एचडी देवगौड़ा, इनेलो के नेता दुष्यंत चौटाला और सजपा के नेता कमल मोरारका मौजूद थे। यह पूछे जाने पर कि प्रस्तावित एकीकृत पार्टी आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ेगी तो नीतीश ने कहा कि नेताओं ने राष्ट्रीय परिदृश्य पर ध्यान दिया है और बातचीत किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि नेता संसद में जनहित के मुद्दे पर एक ही सुर में बोल रहे हैं। अब वे आगामी 22 दिसंबर को संसद परिसर के बाहर धरना देंगे। धरने का मकसद कालेधन के मुद्दे पर राजग सरकार पर निशाना साधना है। नीतीश ने कहा कि चुनाव से पहले वादा किया गया था कि कालाधन वापस लाया जाएगा और प्रत्येक नागरिक को 15 लाख रुपए दिए जाएंगे। लेकिन इस वादे को पूरा नहीं किया गया।