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नोटबंदी की मार, बैंकों में कतार

पहली तारीख को वेतन निकालने के लिए परेशान रहे लोग, 10 हजार से ज्यादा नहीं दे रहे बैंक।
Author नई दिल्ली | December 2, 2016 03:56 am
नई दिल्ली में बैंक ऑफ़ बड़ौदा के एटीएम के बाहर कतार में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते लोग। (Photo Source: PTI/File)

नए नोटों की तंगी झेल रहे देश भर के बैंकों के बाहर गुरुवार को अपनी तनख्वाह निकालने के लिए भीड़ लगी रही। लंबी कतार में लगे रहने के बाद वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों को उस समय निराशा हुई जब उन्हें सीमा से कम नकदी ही मिल पाई। कई बैंक अपने ग्राहकों को पांच हजार से दस हजार रुपए ही देने की हालत में थे। ज्यादातर बैंक दस हजार से ज्यादा रुपए नहीं दे रहे थे। दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ और कोलकाता से लेकर कानपुर तक हर जगह तनख्वाह लेने के लिए बैंकों के भीतर और बाहर अफरा-तफरी थी। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके उपनगरीय इलाकों में बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी-लंबी लाइनें दिखीं। लोग महीने की शुरुआत में खर्च के लिए नकदी निकालने में जुटे थे। यही हाल गुजरात में था। दिल्ली में लोग अपना वेतन निकालने के लिए तड़के से एटीएम के बाहर कतार बांधे दिखे ताकि उन्हें जरूरत के हिसाब से नकदी मिल सके। सभी को डर सता रहा था कि कहीं उनकी बारी आने से पहले ही बैंकों में नकदी खत्म न हो जाए। नतीजा दोपहर तक भीड़ बढ़ती चली गई। एक बैंक में चेक से वेतन निकालने गए लोगों को एक हजार रुपए देकर टरका दिया गया। बैंक शाखाओं पर उमड़े खाताधारकों को शांत करने के लिए बैंक अपने पास उपलब्ध नकदी के मुताबिक थोड़ी राशि ही उपलब्ध करा पाए।

चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला समेत समूची ट्राईसिटी की बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर खूब भीड़ जुटी, पर हर जगह कुछ ही घंटों में नकदी खत्म हो जाने से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सूरत-ए-हाल कुछ ऐसे रहे कि बैंकों के बाहर करंसी पाने के लिए मारामारी होती रही। कुछ बैंक कर्मियों को अपना अंदर कामकाज छोड़ कर बाहर कतार बांधे खड़े लोगों को यह समझाने-बुझाने के लिए बाहर आना पड़ा कि परेशान होने की बजाय वे लोग अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड आदि का इस्तेमाल भुगतानों में कर सकते हैं।भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक आदि प्रमुख सरकारी बैंकों के अलावा एचडीएफसी, आइसीआइसीआई आदि की शाखाओं के बाहर भी पहली तारीख को वेतन निकालने के लिए बड़ी संख्या में ग्राहकों की भीड़ लगी रही पर कुछ ही घंटों के अंदर समूची नकदी खत्म हो जाने से उन्हें बड़ी परेशानी हुई। पीएनबी की स्थानीय मुख्य शाखा में कार्यरत एक आला बैंक अधिकारी ने बताया कि वह करीब 300 लोगों को ही शुरू में भुगतान कर पाए पर चूंकि भीड़ ज्यादा थी और बैंक में उतनी नकदी नहीं है, इसलिए उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। हालांकि, उन्होंने आरबीआइ से ज्यादा मात्रा में नकदी की मांग रखी।

देश के बड़े बैंकों ने हालांकि, एक तारीख को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त व्यवस्था करने का दावा किया लेकिन ज्यादातर बैंक शाखाओं में नकदी की किल्लत थी। सार्वजनिक क्षेत्र के एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने कहा कि बैंकों को नकदी की तंगी के कारण लोगों को तय सीमा से कम राशि देने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ बैंक शाखाओं ने प्रति व्यक्ति पांच हजार रुपए तो कुछ ने दस हजार और 12 हजार रुपए तक ही अपने ग्राहकों को नकदी दी है। हालांकि रिजर्व बैंक ने खाताधारकों को सप्ताह में 24 हजार रुपए नकद देने की सीमा तय की है। एटीएम गुरुवार को भी बड़ी संख्या में खाली रहे। नोटबंदी की घोषणा के 24 दिन बाद भी एटीएम में पर्याप्त नकदी नहीं मिल पा रही है।  बैंकों ने 80 फीसद एटीएम को नए नोटों के अनुरूप ढाले जाने का दावा किया है लेकिन इसके बावजूद एटीएम से नकदी नहीं मिल रही है। दूसरी तरफ दो हजार रुपए का नोट हाथ में होने के बाद बाजार में खरीदारी नहीं हो पा रही है क्योंकि छोटे नोट उपलब्ध नहीं है।

एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कल दावा किया था कि वेतन बांटने के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। बैंकों में अतिरिक्त नकदी भेजी जा रही है। लेकिन आज जमीनी स्थिति कुछ अलग ही नजर आई। गुजरात में भी यही स्थिति देखने को मिली। यहां भी बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें दिखीं। वेतनभोगी और पेंशनर पहली तारीख होने पर नकदी पाने के लिए लाइन में खड़े थे। कुछ बैंक शाखाएं तो ऐसी भी रहीं जिन्होंने नकदी नहीं होने की जानकारी देते हुए लोगों को लौटा दिया। वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनरों ने लंबी कतार देख कर लौटना ही बेहतर समझा। उनका कहना है कि उनके लिए बैंकों में अलग से व्यवस्था नहीं की गई है।

कानपुर: शहर के माल रोड, सिविल लाइंस, ग्वालटोली, वीआइपी रोड, फूलबाग, किदवईनगर, गोविंदनगर, दादानगर, कल्याणपुर आदि इलाके के बैंकों के बाहर सुबह दस बजे से ही लोगों की लंबी लंबी लाइनें लग गईं। बैंकों के बाहर व्यवस्था न बिगड़े इसलिए पुलिस की व्यवस्था भी की गई है। शहर में बैंक आफ इंडिया की मुख्य शाखा माल रोड में व्यवस्था काफी अच्छी दिखी। जहां शाखा के मुख्य प्रबंधक प्रमोद के आनंद खुद बैंक के अंदर खड़े होकर वेतन लेने वाले लोगों को धन दिलावाने में मदद करते रहे। वहीं शहर के ग्वालटोली इलाके के स्टेट बैंक में तनख्वाह लेने से ज्यादा भीड़ पेंशन लेने वालों की है। यहां के मैनेजर आरके सिंह कहते हैं कि कोशिश यह है कि सबको रुपए मिल जाएं और किसी को खाली हाथ न जाना पड़े। बैंक में भीड़ बहुत ज्यादा है इसके बावजूद स्थिति काबू में है। शाखा के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस काम में लगाया गया है।

मुंबई: पवई इलाके में एटीएम मेंं सबसे पहले प्रवेश करने वाले लोगोंं में शामिल निजी फर्म में पदाधिकारी प्रदीप पवार ने कहा, ‘मुझे सिर्फ दो हजार रुपए का एक नोट मिला है, लेकिन यह मुझे महज पांच मिनट में मिल गया। अब कल मुझे फिर से नकदी निकालने आना होगा ताकि महीने के खर्च के लिए पर्याप्त धन निकाल सकूं।’केनरा बैंक के प्रबंधनिदेशक और सीईओ राकेश शर्मा ने बताया, ‘इस समय हमारी किसी शाखा मेंं नकदी की कमी नहीं है। वेतन और पेंशन आने के बाद मांग में अचानक वृद्धि का अंदाजा लगाते हुए हमने शाखाओं में पर्याप्त नकदी होना सुनिश्चित किया है।’

 

 

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