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सहारा डायरी में हैं 100 से ज्यादा नेताओं के नाम, अधिकारियों ने कहा- झूठी भी हो सकती हैं इसकी डीटेल्स

इस डायरी में 11 पेज ऐसे हैं जिसमें रकम के लेनदेन का जिक्र है। इन 11 पन्नों में पैसे लेने वालों में 100 से ज्यादा राजनेताओं के नाम लिखे गए हैं।
सहारा चीफ सुब्रत राय सहारा। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी कथित सहारा डायरी का मुद्दा और गर्माता जा रहा है। इस डायरी में 11 पेज ऐसे हैं जिसमें रकम के लेनदेन का जिक्र है। इन 11 पन्नों में पैसे लेने वालों में 100 से ज्यादा राजनेताओं के नाम लिखे गए हैं। डायरी में जिन नेताओं का जिक्र है वह बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी, सपा, एनसीपी, जेएमएम, जेवीएम, टीएमसी, बीजडी, बीकेयू, शिव सेना और एलजेपी समेत 18 पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं। इसमें राजनेताओं के नाम वाले प्रिंटेड पेजों की दो लिस्ट हैं, जिसमें कुल 54 नाम दिए गए हैं। दो हाथ से लिखे गए पन्ने हैं और एक अन्य प्रिंटेड पेज है जिसमें पुराने नामों को ही लिखा गया है। इसके अलावा दो और प्रिंटेड पेज हैं जिसमें इलेक्शन लड़ने वाले 62 कैंडिडेट की लिस्ट है।

हाथ से लिखे गए पन्ने में 2010 में दिए गए पेमेंट का जिक्र किया गया है। डायरी में पांच पेज ऐसे भी हैं जिसमें 2013 और 2014 के बीच प्राप्त हुए पैसे की डीटेल सारणीबद्ध तरीके से लिखी गई है। इस 10 महीने के समयावधि में प्राप्त हुई रकम 100 करोड़ के भी पार दिखाई गई है। हालांकि SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के अधिकारियों का कहना है कि डायरी के पन्ने और इसकी एंट्री नकली भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि साहारा के एक अधिकारी ने अपने बयान में भी कहा कि उसने यह एंट्री दूसरी कंपनियों के अधिकारियों को झांसे में लेने के लिए की थी।

गौरतलब है कि बिड़ला और सहारा ग्रुप पर 2013 और 2014 में इनकम टैक्स ने छापे मारे गए थे। छापों में इनकम टैक्स को महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इन फाइलों की जांच की मांग की थी। 25 अक्टूबर 2016 में प्रशांत भूषण ने अपनी शिकायत सभी जांच एजेंसियों और कालेधन की विशेष जांच टीम को लीड कर रहे दो पूर्व जजों की स्पेशल को भेजी थी।

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  1. C
    charan singh
    Dec 22, 2016 at 10:57 am
    मैं लंबे समय तक ारा से जुड़ा रहा हूं। ारा में बड़े स्तर पर नेताओं को पैसा पहुंचाया जाता है। इस दलाली में ऐसे कितने अधिकारी भी होते हैं, जो नेताओं तक पैसा पहुंचाते ही नहीं हैं। बीच में ही खा जाते हैं। इस डायरी में इस तरह के नेताओं के भी नाम रहे होंगे।
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