December 03, 2016

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साइबर सुरक्षा की मजबूत किलेबंदी की तैयारी में भारत, इजराइली और रूसी सुरक्षा एजंसियों से मिलेगा सहयोग

इजराइल की कंपनी ‘आरडी आइ’ से तकनीकी जानकारी और अनुभव की शेयरिंग के लिए बातचीत शुरू की गई है।

Author November 1, 2016 06:45 am

साइबर सुरक्षा की दृष्टि से दिसंबर के 2017 तक भारत अपनी किलेबंदी मजबूत कर लेने की तैयारी में है। इस मिशन में इजराइल और रूस की एजंसियां भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करेंगी। पहली कवायद ‘नेशनल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन सेंटर’ को अस्तित्व में लाने की है, जो किसी भी तरह के साइबर हमले से चंद सेकेंड में निपटने में सक्षम होगा। सरकारी संस्थानों के डाटा, फौज के दस्तावेज, हवाई जहाज संचार, पॉवर ग्रिड, बैंक आदि की साइबर सुरक्षा ‘एअरटाइट’ करने का लक्ष्य है।

अगले कुछ दिनों में रूस और इजराइल के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर कई समझौते किए जाने की कवायद चल रही है। रक्षा मंत्रालय के एक आला अधिकारी के मुताबिक अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में इजराइली सरकार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कर्नल राम दोर ने भारत का दौरा कर यहां नेशनल इंटेलीजेंस बोर्ड और अन्य उच्च स्तरीय सरकारी संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों के साथ बैठक की, जिसमें आतंकवादी समूहों और अन्य देशों के द्वारा की जाने वाली हैकिंग को लेकर बातचीत हुई। उन्होंने तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार करने का एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें रोजाना युद्ध के माहौल जैसी सक्रियता और सतर्कता रखी जाएगी। इजराइल की कंपनी ‘आरडी आइ’ से तकनीकी जानकारी और अनुभव की शेयरिंग के लिए बातचीत शुरू की गई है। अन्य एक कंपनी ‘वाइटल इंटेलीजेंस ग्रुप’ के साथ साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देने वाला एक संस्थान तैयार करने पर बातचीत चल रही है, जो रक्षा मंत्रालय के मातहत काम करेगा। इसे अगले साल मुंबई में अपना दफ्तर खोलने की अनुमति दी गई है। नई दिल्ली और हैदराबाद में भी इसके दफ्तर होंगे।

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चंद रोज पहले भारत-इजराइल संयुक्त आयोग बनाया गया है, जिसकी पहली बैठक नवंबर में कराए जाने की योजना है। तब वहां के राष्ट्रपति रुवेन लिवलिन भारत के दौरे पर होंगे। अभी तारीख तय नहीं हुई है। हाल में तेल अवीव में पदस्थापित भआरतीय राजदूत पवन कुमार ने लिवलिन से मुलाकात की, जिसमें अपने भारत दौरे को लेकर उन्होंने संकेत दिए हैं। दोनों देशों के राजनयिक सुरक्षा, आतंकवाद रोधी, जल संसाधन, कृषि और स्टार्ट-अप को लेकर बातचीत का मसविदा तैयार कर रहे हैं।

जहां तक रूस का सवाल है,भारत वहां के विशेषज्ञों के साथ सोशल मीडिया के जरिए और आतंकवादी समूहों द्वारा साइबर हमले के खतरों को लेकर बातचीत चल रही है। भारत और रूस के विशेषज्ञों का एक साइबर एक्सपर्ट समूह गठित किया गया है, जो सोशल मीडिया के जरिए आतंकी समूहों के द्वारा रंगरूटों की भर्ती करने के अभियान पर नजर रख रहा है। यही समूह अब लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए- मोहम्मद पर भी नजर रख रहा है, जो भारत में बड़े साइबर हमले की तैयारी में हैं।

रूस में साइबर सुरक्षा के लिए काम करने वाली 30 कंपनियों का समूह ‘कासपरस्की लैब’ ने अक्तूबर में 20 साइबर हमलों की चेतावनी दी, जिस पर समय रहते कार्रवाई की गई। अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में पाकिस्तान से आतंकी गुटों ने जम्मू एअर ट्रैफिक कंट्रोल को जाम कर दिया था। जम्मू एटीसी से संपर्क की जाने वाली रेडियो फ्रिक्वेंसी से पाकिस्तानी देशभक्ति गाने सुनाए जाने लगे। कमर्शियल विमानों के पायलट दिग्भ्रमित हो गए। लेकिन अलर्ट किए जाने पर ऊधमपुर में भारतीय वायुसेना के एअरबेस ने विमान के लिए नई फ्रिक्वेंसी दी और कई बड़े हादसे टल गए। इसी तरह मध्य प्रदेश पुलिस के वाहनों के जीपीएस हैक कर लिए गए।

जो कवायद चल रही है, उसमें उम्मीद जगी है कि भारत सरकार के 900 करोड़ रुपए के लागत वाले नेशनल साइबर सिक्योरिटी को-आॅर्डिनेशन सेंटर का काम अब परवान चढ़ सकेगा। ‘नेशनल क्रिटिकल इंफॉरमेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर’ में काम कर रहे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, ‘हमें नेटवर्क आॅर्किटेक्चर, एनक्रिप्टन, क्रिप्टोग्राफी, सुपरवाइजरी कंट्रोल और डाटा एक्विजीशन- इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम के विशेषज्ञ चाहिए। ऐसे जानकार तैयार करने के लिए हमें इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने होंगे।’ ‘डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आॅफ इंडिया’ (डीएससीआइ) में चीफ एक्जीक्यूटिव रामा वेदाश्री के मुताबिक भारतीय साइबर सुरक्षा की जरूरत मार्केट साइज के लिहाज से चार बिलियन डॉलर की हो गई हैं। 2025 तक यह आंकड़ा नौ गुना ज्यादा होगा।’

 

 

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First Published on November 1, 2016 6:45 am

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