December 05, 2016

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मुसलिम समुदाय तीन तलाक पर गंभीरता से विचार करे : संघ

तीन तलाक का मुद्दा मुसलमानों का आंतरिक मामला है और इस संदर्भ में मुसलिम समुदाय को गंभीरता से सोचना चाहिए।

Author हैदराबाद | October 26, 2016 05:36 am
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता। (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मंगलवार को कहा कि मुसलिम समुदाय को तीन तलाक पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसे पहले सोमवार को प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमानों के बीच एक साथ तीन तलाक की व्यवस्था को खारिज किया था। तीन तलाक को लेकर चल रही बहस के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा व केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तीन तलाक व एक समान नागरिक संहिता जैसे शरीयत से जुड़े धार्मिक मुद्दों को लेकर नया विवाद खड़ा कर रही है। यह निंदनीय है। केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार और भाजपा तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के हक में हैं। यह व्यवस्था महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण और समानता के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है।

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संघ के अखिल भारतीय महासचिव भैयाजी जोशी ने हैदराबाद में संवाददाताओं से कहा कि तीन तलाक का मुद्दा मुसलमानों का आंतरिक मामला है और इस संदर्भ में मुसलिम समुदाय को गंभीरता से सोचना चाहिए। मुसलिम महिलाएं इस मुद्दे पर अदालत गई हैं। वर्तमान में लिंग आधारित कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। तीन तलाक के मुद्दे पर महिलाएं अदालत में गई हैं और हम आशा करते हैं कि उनको उचित न्याय मिलेगा। संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी परिषद की बैठक के आखिरी दिन जोशी ने कहा कि मुसलिम समुदाय को इस पर सोचना और फैसला करना चाहिए।

मायावती ने लखनऊ में कहा कि जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है तबसे संघ के संकीर्ण, सांप्रदायिक व कट्टरवादी एजंडे को किसी न किसी रूप में देश के लोगों पर थोपने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि ताजा विवाद में मुसलिम पर्सनल लॉ व तीन तलाक के शरीयत से संबंधित मुद्दे और समान नागरिक संहिता के मसले को छेड़ दिया गया है। इससे पहले अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय और दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने का दर्जा छीन कर एक सुलझे हुए मामले को दोबारा से शुरू कर विवाद पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने मुसलिम पर्सनल लॉ, तीन तलाक व समान नागरिक संहिता आदि के मुद्दों को लेकर नया विवाद खड़ा करके इसकी आड़ में घिनौनी राजनीति शुरू कर दी है। मायावती ने कहा कि बेहतर होगा कि किसी धर्म से जुड़े सवाल पर उस धर्म को मानने वाले लोगों को ही तय करने दिया जाए।

 

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First Published on October 26, 2016 5:36 am

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