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वसुंधरा सरकार के ख़िलाफ़ संघ ने बजाया बिगुल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी से भाजपा की वसुंधरा सरकार में हड़कंप मच गया है। मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल...
जयपुर में विकास के नाम पर लगातार मंदिरों को तोड़े जाने की सरकार की कार्यशैली को लेकर संघ से जुड़े संगठनों ने कई बार एतराज जताया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी से भाजपा की वसुंधरा सरकार में हड़कंप मच गया है। मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। भाजपा के मंत्रियों, विधायकों और सांसद को संघ ने जम कर फटकार लगाते हुए सरकार की कार्यशैली का विरोध करने की नसीहत भी दी है। केंद्रीय नेतृत्व ने अब प्रदेश भाजपा में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश को राजस्थान की जिम्मेदारी देकर भेज दिया है।

राज्य में डेढ़ साल से शासन कर रही भाजपा सरकार को अब अपने ही लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। भाजपा को जमीनी स्तर पर ताकत देने वाला संघ अब वसुंधरा सरकार की कार्यशैली के खिलाफ मैदान में उतर गया है। उसने जयपुर में मंदिरों को तोडे जाने के विरोध में नौ जुलाई को चक्का जाम आंदोलन का एलान कर सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

संघ के सख्त रवैये को देख कर ही अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी बचाव की मुद्रा में आ गई है। संघ को मनाने के लिए सरकार के स्तर पर सोमवार को दिन भर खासी हलचल मची रही। संघ की हिदायत के बाद जयपुर शहर के भाजपा विधायकों ने भी चक्का जाम आंदोलन में हिस्सा लेने का मन बना लिया है।

जयपुर शहर के तीन विधायक तो सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और एक विधायक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर है। इन चारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। इन सभी का कहना है कि वे संघ के स्वयंसेवक हैं और इस नाते उसका निर्देश मानना जरूरी है।

जयपुर शहर में विकास के नाम पर पिछले कुछ समय से धड़ाधड़ मंदिर तोड़े गए। इसमें जयपुर विकास प्राधिकरण के साथ मेट्रो के लवाजमे ने भी बगैर किसी को भरोसे में लिए मंदिरों को तोड़ दिया। इसको लेकर ही शहर के नागरिक सरकार से नाराज हो गए। सरकार का कुछ संगठनों ने विरोध भी किया पर प्रशासन और पुलिस के बल पर उसे दबाने की कोशिश की गई। इस मामले में शहर के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी आवाज उठाई पर उसे भी अनसुना कर दिया गया। इसके बाद ही संघ प्रचारकों को यह मामला गंभीर लगा।

उन्होंने शहर के सांसद और तमाम विधायकों को संघ के प्रदेश मुख्यालय भारती भवन बुला कर जम कर फटकार लगाई। इससे ही पूरी भाजपा की अब सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है। संघ के कार्यकर्ता हर हालत में नौ जुलाई को दो घंटे का शहर में चक्का जाम आंदोलन कर सरकार को तीखे तेवर दिखाने पर आमादा हो गए हैं। संघ का प्रदेश नेतृत्व इस मामले में सरकार की कोई सफाई सुनने को तैयार नहीं है।

सरकार की तरफ से संघ को सफाई और बचाव के रास्ते बताए जा रहे हैं। इसमें पूरी जिम्मेदारी अब नौकरशाहों पर डाली जा रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का बचाव करते हुए कहा जा रहा है कि उन्हें सही तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई। इसलिए मंदिरों को तोड़ने के मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ संघ का मानना है कि सभी जनप्रतिनिधियों को पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। शहर के मालवीय नगर के विधायक और कैबिनेट मंत्री कालीचरण सर्राफ ने तो संघ के वरिष्ठ प्रचारकों के सामने यह कह दिया कि अफसर उनकी सुनते नहीं है।

इस पर संघ की तरफ से सर्राफ को दो टूक कहा गया कि ऐसी स्थिति है तो फिर मंत्री क्यों हो। संघ ने अपनी तरफ से इस मामलेमें पूरे सबूत जुटा लिए हैं और उन्हें संघ मुख्यालय नागपुर तक पूरी रिपोर्ट बना कर भेजने का फैसला किया है। संघ का मानना है कि वसुंधरा सरकार ने तो पूरी तरह से हिंदुओं की धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने का काम किया है।

दूसरी तरफ संघ के खफा हो जाने के बाद प्रदेश भाजपा में संगठन स्तर पर अब राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री पद पर सौदान सिंह को हटा कर वी सतीश को सोमवार को जयपुर भेजा गया। सौदान सिंह को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खेमे में माना जाता था। उनकी शिकायतें भी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची थीं। उनकी जगह वी सतीश ने सोमवार को आते ही पूरे हालात की जानकारी हासिल की। उन्होंने संघ के साथ ही भाजपा के नेताओं से भी मुलाकात की। सतीश ने ही विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में संगठन का कामकाज संभाला था।

खतरे की घंटी:

राज्य में डेढ़ साल से शासन कर रही भाजपा सरकार को अब अपने ही लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। भाजपा को जमीनी स्तर पर ताकत देने वाला संघ अब वसुंधरा सरकार की कार्यशैली के खिलाफ मैदान में उतर गया है। उसने जयपुर में मंदिरों को तोड़े जाने के विरोध में नौ जुलाई को चक्का जाम आंदोलन का एलान कर सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। संघ के सख्त रवैए को देख कर ही अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी बचाव की मुद्रा में आ गई है।

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  1. उर्मिला.अशोक.शहा
    Jul 7, 2015 at 12:38 pm
    वन्दे मातरम- चुनी हुई सरकार को संघ काम करने दे रोड़े ना अटकाए अगर मंदिर गिरा दिया तो फिरसे अच्छीतरह से बन भी जाएगा लेकिन विकास के मोमेंटम को न रोके जा ग ते र हो
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